Michigan Primary News: 19 साल पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने एक युवा छात्र का भाषण सुना और मंच से उतरते ही उससे कहा था- तुम्हें डॉक्टर नहीं, राजनीति में होना चाहिए. उस वक्त उस छात्र ने मुस्कुराकर जवाब दिया था, ‘मेरे जैसे नाम वाला राजनीति में शायद सफल नहीं हो पाएगा.’ अब वही नाम अमेरिका की राजनीति में नई पहचान बन चुका है. अब्दुल एल-सैयद (Abdul El-Sayed) ने डेमोक्रेटिक पार्टी की मिशिगन सीनेट प्राइमरी जीतकर खुद को राष्ट्रीय राजनीति के बड़े चेहरों में शामिल कर लिया है. 41 साल के अब्दुल एल-सैयद ने डेमोक्रेटिक प्राइमरी में चार बार की सांसद हैली स्टीवंस को हराया. हैली स्टीवंस को पार्टी के बड़े नेताओं का समर्थन और चुनाव प्रचार के लिए करोड़ों डॉलर की फंडिंग मिली थी. इसके बावजूद एल-सैयद ने जीत दर्ज की. अब नवंबर 2026 में उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स से होगा. अगर वह यह चुनाव जीतते हैं तो अमेरिकी इतिहास में सीनेट (राज्यसभा) पहुंचने वाले पहले मुस्लिम बन जाएंगे.
अब्दुल एल-सैयद ने अभी अमेरिकी सीनेट का चुनाव नहीं जीता है. उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी की प्राइमरी जीती है. यानी पार्टी के भीतर हुआ वह चुनाव, जिसमें तय किया जाता है कि आम चुनाव में पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार कौन होगा. भारत में पार्टी या हाईकमान तय करता है कि प्रत्याशी कौन होगा. लेकिन अमेरिका में पार्टियों के अंदर भी चुनाव होता है. अब नवंबर 2026 में मिशिगन से अमेरिकी सीनेट की सीट के लिए असली मुकाबला होगा. इसमें डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से अब्दुल एल-सैयद और रिपब्लिकन पार्टी की ओर से माइक रोजर्स आमने-सामने होंगे.
अब्दुल एल-सैयद का जन्म डेट्रॉयट में हुआ. उनके पिता मिस्र से अमेरिका आए थे, जबकि उनकी मां अमेरिकी हैं. वह पेशे से डॉक्टर हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य यानी पब्लिक हेल्थ के क्षेत्र में लंबे समय तक काम कर चुके हैं. उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच, सीसे के प्रदूषण, मेडिकल कर्ज और जरूरी दवाओं की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर काम किया. बाद में वह वेन काउंटी के स्वास्थ्य विभाग से भी जुड़े और स्वास्थ्य नीति के विशेषज्ञ के तौर पर पहचान बनाई.
अब्दुल एल-सैयद रोड्स स्कॉलर रह चुके हैं, जिसे दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित छात्रवृत्तियों में गिना जाता है. उन्होंने मिशिगन यूनिवर्सिटी से उच्च सम्मान के साथ पढ़ाई पूरी की. इसके बाद कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल डिग्री हासिल की और फिर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी की.
2007 में मिशिगन यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन मुख्य अतिथि थे. लेकिन यहां उनसे ज्यादा अब्दुल के भाषण की चर्चा थी. समारोह के बाद क्लिंटन ने अब्दुल एल-सैयद को अलग बुलाया और पूछा कि जब वह इतने अच्छे वक्ता हैं तो डॉक्टर क्यों बन रहे हैं. उन्होंने राजनीति में आने की सलाह दी. इस पर एल-सैयद ने हंसते हुए कहा था, ‘मेरे जैसे नाम वाला राजनीति में शायद नहीं चल पाएगा.’ उनका कहने का मतलब मुस्लिम से था. करीब दो दशक बाद वही नाम अब अमेरिकी राजनीति में बड़ी पहचान बन चुका है. समर्थक उन्हें ‘मिशिगन का ओबामा’ तक कहने लगे हैं.
अब्दुल एल-सैयद ने 2018 में मिशिगन के गवर्नर पद के लिए चुनाव लड़ा था, लेकिन डेमोक्रेटिक प्राइमरी में ग्रेचेन व्हिटमर से हार गए थे. इसके बाद उन्होंने लेखन, पॉडकास्ट और टीवी कार्यक्रमों के जरिए राजनीति में सक्रियता बनाए रखी. 2020 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन की हेल्थकेयर यूनिटी टास्क फोर्स में भी उन्हें शामिल किया गया. उन्होंने अप्रैल 2025 में सीनेट चुनाव अभियान शुरू किया और धीरे-धीरे प्रगतिशील मतदाताओं का समर्थन हासिल कर लिया.
अब्दुल एल-सैयद खुद को डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव धड़े का नेता मानते हैं. वह ‘मेडिकेयर फॉर ऑल’, चुनावी फंडिंग में सुधार, व्यापक इमिग्रेशन सुधार और इजरायल को बिना शर्त अमेरिकी सैन्य सहायता खत्म करने जैसे मुद्दों का समर्थन करते रहे हैं. उन्हें बर्नी सैंडर्स, एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज, एलिजाबेथ वॉरेन और यूनाइटेड ऑटो वर्कर्स यूनियन का समर्थन भी मिला.
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