SpaceX Rocket Crash on Moon: एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का रॉकेट चांद पर क्रैश हो गया. जी हां, स्पेसएक्स (SpaceX) का एक रॉकेट पिछले एक साल से अंतरिक्ष में भटक रहा था. मगर बुधवार को आखिरकार वह चांद से टकरा गया. यह रॉकेट SpaceX Falcon 9 रॉकेट का हिस्सा था. स्पेसएक्स (SpaceX) के फाल्कन-9 रॉकेट का एक हिस्सा जब बुधवार तड़के चंद्रमा से टकराया, तब उसकी रफ्तार करीब 8690 किमी प्रति घंटे थी. वैज्ञानिकों ने इस घटना की पुष्टि की है. इस टक्कर के बाद चंद्रमा की सतह से धूल और गैस का गुबार उठा. इसे दुनिया के कुछ सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोपों ने रिकॉर्ड किया. हालांकि, चंद्रमा की परिक्रमा कर रहे किसी भी अंतरिक्ष यान को इस टक्कर की नजदीकी तस्वीरें लेने का मौका नहीं मिल सका.
दरअसल, फाल्कन 9 का एक रॉकेट चांद की सतह पर आवाज की स्पीड से सात गुना अधिक तेजी से टकराया. इससे तीन टन TNT के बराबर एनर्जी निकली. फिर भी, यह गड्ढा इतना छोटा है कि इसे धरती से नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता. रॉकेट तो छोटे-छोटे मलबों में बिखर गया. स्पेसएक्स का यह रॉकोट पिछले साल से स्पेस में तैर रहा था. चांद से टक्कर के बाद यह भटके हुए स्पेसक्राफ्ट और स्पेस जंक के दूसरे टुकड़ों की लिस्ट में शामिल हो गया है जो सदियों से चांद की सतह पर बमबारी करते रहे हैं.
एक साल से अंतरिक्ष में तैर रहा था यह रॉकेट
दरअसल, यह रॉकेट का सेकेंड स्टेज था. इसी फाल्कन-9 रॉकेट ने जनवरी 2025 में फायरफ्लाई एयरोस्पेस के चंद्र लैंडर को चंद्रमा की ओर भेजा था. मिशन पूरा होने के बाद रॉकेट का यह हिस्सा अंतरिक्ष में ही घूमता रहा. वैज्ञानिकों ने पहले ही अनुमान लगा लिया था कि इसकी दिशा ऐसी है कि यह आखिरकार चंद्रमा से टकराएगा. इसलिए दुनिया भर के खगोलविद इस घटना पर लगातार नजर बनाए हुए थे.
किस रफ्तार से हुई टक्कर
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इस रॉकेट का वजह करीब 4,000 किलोग्राम था. जी हां, यह रॉकेट करीब 8,690 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चंद्रमा की सतह से टकराया. इतनी तेज गति के कारण टक्कर काफी शक्तिशाली थी और इससे चंद्रमा की मिट्टी और धूल का बड़ा गुबार उठा.
कहां चांद पर टकराया
टक्कर चंद्रमा की टर्मिनेटर लाइन के पास हुई. यह वह हिस्सा होता है, जहां चंद्रमा का रोशनी वाला भाग और अंधेरा भाग एक-दूसरे से मिलते हैं. इस वजह से टक्कर के बाद उठा धूल का गुबार कुछ समय के लिए सूरज की रोशनी में चमकता दिखाई दिया. हालांकि, पृथ्वी से इसे खुली आंखों से देख पाना संभव नहीं था.
चांद पर SpaceX के रॉकेट की जोरदार टक्कर, टेलीस्कोप ने कैद किया धूल और गैस का गुबार (फाइल फोटो)
टक्कर के दौरान क्या हुआ?
इस घटना को चिली स्थित परानाल वेधशाला में मौजूद यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला के वेरी लार्ज टेलीस्कोप ने रिकॉर्ड किया. वैज्ञानिकों ने टक्कर के बाद करीब 5 से 10 मिनट तक बने धूल और गैस के गुबार का अध्ययन किया. ईएसओ के वैज्ञानिकों ने बताया कि टेलीस्कोप ने इस गुबार में सोडियम और लिथियम गैस के संकेत दर्ज किए हैं. इन संकेतों का अध्ययन करके वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि टक्कर के बाद कौन-कौन से तत्व बाहर निकले और उनकी मात्रा कितनी थी.
क्या स्पेसएक्स की योजना का हिस्सा थी यह टक्कर?
वहीं, स्पेसएक्स ने भी साफ किया है कि यह टक्कर किसी योजना का हिस्सा नहीं थी. कंपनी के अनुसार, मिशन पूरा होने के बाद रॉकेट का यह हिस्सा अंतरिक्ष में रह गया था और उसकी कक्षा धीरे-धीरे बदलती रही. इसी कारण वह आखिरकार चंद्रमा से टकरा गया. वैज्ञानिकों का अनुमान था कि यह चंद्रमा के पश्चिमी किनारे पर स्थित आइंस्टीन क्रेटर के पास गिरेगा, जो पृथ्वी से आसानी से दिखाई नहीं देता.
कैसे भटकता रहा अंतरिक्ष में
रॉकेट का यह हिस्सा फाल्कन-9 का है, जिसे स्पेसएक्स ने अमेरिका और जापान के मिशन के लिए लॉन्च किया था. दरअसल रॉकेट के इस हिस्से को धरती पर वापस लौटने के लिए ही डिजाइन किया गया था. मगर ईधन खत्म होने की वजह से इसे डीऑर्बिट नहीं कराया जा सका.




