वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति पावर के नशे में इस कदर चूर हैं कि उन्होंने पूरी दुनिया में तेल संकट पैदा कर दिया है. ट्रंप जिस ईरान जंग को एक ‘छोटा सा मिलिट्री ऑपरेशन’ बता रहे थे, वो आज 146 दिनों बाद भी जारी है. आलम ये है कि दोनों देशों के बीच जंग खत्म होते-होते दोबारा फुल स्केल पर शुरू हो चुकी है. अब किसी को नहीं पता कि मिडिल ईस्ट की आग कब बुझेगी. इसी असमंजस के बीच अमेरिकी कांग्रेस में एक जबरदस्त ड्रामा देखने को मिला, जहां अगर कुछ वोटों का गणित इधर से उधर हो जाता तो ट्रंप के हाथ से युद्ध की कमान छिन जाती और ये जंग हमेशा के लिए खत्म हो जाती.
US Congress में ट्रंप की वॉर पावर्स के खिलाफ ड्रामा
अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति ट्रंप के ‘ईरान युद्ध अधिकारों’ पर जबर्दस्त हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला. प्रस्ताव में साफ शर्त रखी गई थी कि जब तक संसद आधिकारिक मंजूरी न दे दे, तब तक ट्रंप ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना का इस्तेमाल नहीं कर सकते.
इस मुद्दे पर जब वोटिंग हुई, तो निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने ट्रंप को जोर का झटका देते हुए उनके युद्ध लड़ने के अधिकारों पर ब्रेक लगाने वाला प्रस्ताव पास कर दिया लेकिन असली ट्विस्ट ऊपरी सदन (सीनेट) में आया, जहां ट्रंप महज 2 वोटों के अंतर से बाल-बाल बच निकले और ये प्रपोजल खारिज हो गया.
कौन थे ट्रंप को धोखा देने वाले वो 4 अपने?
अमेरिका में राष्ट्रपति को सेना का कमांडर-इन-चीफ माना जाता है लेकिन अमेरिकी संविधान के मुताबिक किसी देश के खिलाफ औपचारिक युद्ध की घोषणा करने का अधिकार केवल संसद के पास है. ट्रंप ने बिना संसद की मंजूरी के 28 फरवरी से ईरान पर हमले शुरू कर दिए थे, जिससे अमेरिकी सांसद बेहद नाराज थे.
वाशिंगटन से डेमोक्रेट सांसद प्रमिला जयपाल द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव पर जब वोटिंग हुई, तो इसके पक्ष में 214 वोट और खिलाफ में 208 वोट पड़े. यानी 6 वोटों के अंतर से प्रस्ताव पास हो गया.
ट्रंप की ही पार्टी के 4 सांसदों ने धोखा दिया. रिपब्लिकन पार्टी का इस सदन में बहुमत है. फिर भी ट्रंप के 4 अपनी ही पार्टी के सांसदों ने खिलाफ जाकर डेमोक्रेट्स का साथ दिया.
- टॉम बैरेट (मिशिगन): रिपब्लिकन पार्टी के सांसद होने के बावजूद टॉम बैरेट ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया और राष्ट्रपति ट्रंप के युद्ध अधिकारों पर लगाम लगाने वाले डेमोक्रेट्स के प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया.
- ब्रायन फिट्जपैट्रिक (पेंसिल्वेनिया): सदन में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत होने के बाद भी ब्रायन फिट्ज़पैट्रिक ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ रुख अपनाया और विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ खड़े नजर आए.
- वॉरेन डेविडसन (ओहियो): ओहियो से रिपब्लिकन सांसद वॉरेन डेविडसन ने ट्रंप की युद्ध नीति का विरोध करते हुए प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया, जिससे राष्ट्रपति ट्रंप को संसद के भीतर बड़ा झटका लगा.
- थॉमस मैसी (केन्टकी): थॉमस मैसी उन चार बागी सांसदों में शामिल रहे जिन्होंने पार्टी के रुख के विपरीत जाकर वोट डाला और ट्रंप के खिलाफ इस अहम प्रस्ताव को पास कराने में मुख्य भूमिका निभाई.
सीनेट में सिर्फ 2 वोट का फासला और बच गए ट्रंप!
निचले सदन में मिली इस हार के कुछ ही घंटों बाद असली ड्रामा अमेरिकी सीनेट में हुआ. अगर सीनेट में भी ये प्रस्ताव पास हो जाता तो ट्रंप कानूनी रूप से चौतरफा घिर जाते और उन्हें ईरान से अपनी सेना पीछे खींचनी पड़ती लेकिन सीनेट के नतीजे ने ट्रंप को संजीवनी दे दी.
सीनेट में प्रस्ताव को रोकने के लिए वोटिंग हुई. प्रस्ताव के खिलाफ यानी ट्रंप के समर्थन में 49 वोट पड़े, जबकि प्रस्ताव के पक्ष में यानी ट्रंप को रोकने के लिए 47 वोट पड़े.
मैजिक नंबर सिर्फ 2 का था, अगर 2 वोट और प्रस्ताव के पक्ष में आ जाते तो मामला 49-49 से टाई हो जाता और ट्रंप के युद्ध छेड़ने के अधिकार पर संसद का ताला लग जाता. लेकिन 49-47 के इस बेहद करीबी अंतर ने ट्रंप की कुर्सी और उनकी युद्ध नीति दोनों को फिलहाल बचा लिया.
क्रॉस-वोटिंग का हाई-वोल्टेज ड्रामा
इस वोटिंग की सबसे दिलचस्प बात ये रही कि दोनों ही पार्टियों के सांसदों ने अपनी पार्टी की लाइन तोड़कर क्रॉस-वोटिंग की.
- ट्रंप की पार्टी से बगावत: रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स ने ट्रंप के खिलाफ जाकर डेमोक्रेट्स के प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया.
- डेमोक्रेट्स में सेंध: दूसरी तरफ, डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर जॉन फेटरमैन (पेंसिल्वेनिया) ने अपनी पार्टी से बगावत करते हुए ट्रंप का साथ दिया और प्रस्ताव के खिलाफ वोट डाला.
- 4 सांसदों की गैरहाजिरी: इस बेहद अहम मौके पर रिपब्लिकन पार्टी के 4 सांसद सदन में मौजूद ही नहीं रहे, जिसकी वजह से मुकाबला और ज्यादा सांस रोक देने वाला बन गया था.
Mid Term Election में फंसेंगे ट्रंप?
वोटिंग के बाद भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘यह कोई पार्टी पॉलिटिक्स का मुद्दा नहीं है. अमेरिका के ज्यादातर लोग, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों, यही मानते हैं कि ये एक असंवैधानिक और गैर-कानूनी युद्ध है जिसे तुरंत बंद होना चाहिए. हमारे सैनिक मारे जा रहे हैं, आम नागरिक जान गंवा रहे हैं और तेल के दाम आसमान छू रहे हैं’.
दरअसल, अमेरिका में इस साल नवंबर में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं. आम जनता में इस युद्ध को लेकर भारी गुस्सा है. ट्रंप ने वादा किया था कि ये एक छोटा मिलिट्री ऑपरेशन होगा जिससे ईरान घुटने टेक देगा लेकिन इसके उलट ये युद्ध एक ऐसे दलदल में बदल चुका है जिससे अमेरिका का निकलना मुश्किल हो रहा है.
रात-दिन हो रहे हमले, लाल सागर तक फैली जंग
एक तरफ संसद में वोटों की खींचतान चल रही थी, तो दूसरी तरफ मध्य पूर्व में बारूद बरस रहा था
- लाल सागर में यमन के हूती विद्रोहियों का हमला: यमन के हूती लड़ाकों ने लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों पर मिसाइल दाग दी, जिससे दुनिया के इस सबसे अहम समुद्री व्यापारिक रास्ते पर युद्ध और ज्यादा भीषण हो गया है.
- ट्रंप की धमकी: हूती हमले के बाद ट्रंप ने ईरान और उसके सहयोगियों को ‘भारी सैन्य सजा’ देने का वादा किया है.
- रात भर बमबारी: सीजफायर वार्ता टूटने के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान पर रात भर नए हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं.




