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भारत में भी एक ऐसी अनोखी जगह है, जहां जमीन से निकलने वाला गर्म पानी इतना तपता है कि उसमें बिना गैस या चूल्हे के खाना पकाया जा सकता है. यह प्राकृतिक चमत्कार हर साल हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है.
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित तत्तापानी (Tattapani) और मणिकरण साहिब (कुल्लू) अपने प्राकृतिक गर्म पानी के कुंडों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं. इनमें से मणिकरण साहिब सबसे ज्यादा चर्चित है, जहां जमीन से निकलने वाले गर्म पानी का तापमान इतना अधिक होता है कि लोग इसमें चावल, दाल, आलू और अन्य खाद्य पदार्थ आसानी से पका लेते हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु कपड़े की पोटली में चावल या दाल बांधकर गर्म कुंड में डाल देते हैं और कुछ ही समय में खाना तैयार हो जाता है.
इस अनोखी घटना के पीछे कोई चमत्कार नहीं, बल्कि विज्ञान है. मणिकरण क्षेत्र हिमालय की भू-वैज्ञानिक गतिविधियों वाले इलाके में आता है. पृथ्वी के भीतर मौजूद गर्म चट्टानें और भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) भूजल को गर्म कर देती हैं. यही गर्म पानी प्राकृतिक झरनों के रूप में बाहर निकलता है. कई जगहों पर इसका तापमान 90 से 95 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जो खाना पकाने के लिए पर्याप्त होता है. इसी वजह से यहां बिना आग या गैस के भोजन तैयार किया जा सकता है.
धार्मिक आस्था भी जुड़ी है
मणिकरण साहिब सिर्फ प्राकृतिक गर्म पानी के लिए ही नहीं, बल्कि धार्मिक महत्व के कारण भी प्रसिद्ध है. यहां स्थित गुरुद्वारा श्री मणिकरण साहिब में हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. गुरुद्वारे के लंगर में बनने वाले कुछ खाद्य पदार्थ भी इन प्राकृतिक गर्म कुंडों की मदद से पकाए जाते हैं. हिंदू मान्यताओं के अनुसार यह स्थान भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ा हुआ है, जबकि सिख धर्म में भी इसका विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि यह स्थान श्री गुरु नानक देव जी की यात्रा से जुड़ा हुआ है.
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विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें




