सोमवार को उस समय फिर हिंसा भड़क गई, जब उपद्रवी कैदियों ने जेल के हथियारों पर कब्जा कर लिया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह हिंसा जेल के भीतर मादक पदार्थों की तस्करी का समर्थन करने वाले गुट और उसका विरोध करने वाले गुट के बीच हुई।

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श्रीलंका के पश्चिमी तटीय शहर नेगोंबो की एक जेल में सोमवार को कैदियों के दो समूहों के बीच हुई खूनी झड़प में 25 लोगों की मौत हो गई है और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। घायलों और मृतकों में कैदी और जेल अधिकारी दोनों शामिल हैं। इस हिंसक झड़प के बाद हालात संभालने के लिए श्रीलंकाई सेना से सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।
नेगोंबो की क्षमता से अधिक कैदियों वाली इस जेल में रविवार को दोषी कैदियों और हिरासत में रखे गए लोगों के दो गुटों के बीच झड़पें शुरू हुईं थीं। अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को उस समय फिर से हिंसा भड़क गई, जब उपद्रवी कैदियों ने जेल के हथियारों पर कब्जा कर लिया। अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह हिंसा जेल के भीतर मादक पदार्थों की तस्करी का समर्थन करने वाले गुट और उसका विरोध करने वाले गुट के बीच हुई।
पुलिस ने बताया कि स्थिति पर काबू पाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और दंगा नियंत्रण इकाइयों को तैनात किया गया है। पुलिस ने बताया कि झड़पों के बाद व्यवस्था बहाल करने और हिंसा रोकने के प्रयासों के तहत सोमवार को तीन कैदियों को पल्लानसेना जेल शिविर में स्थानांतरित किया गया है। पुलिस के अनुसार, और भी कई कैदियों को उच्च सुरक्षा वाले दूसरे जेलों में शिफ्ट किया जा सकता है।
हिंसा का स्पष्ट कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन कहा जा रहा है कि सोमवार को दंगा करने वाले कैदियों ने जेल में सुरक्षाकर्मियों के लिए रखी बंदूकें छीन लीं, जिसके बाद झड़प हिंसक हो गई और कई लोगों की मौत हो गई। जेल विभाग के प्रवक्ता एसी गजनायके ने बताया कि घटना की विशेष जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जेल आयुक्त के निर्देश पर विशेष जांच दल का गठन किया गया है। मामले की अलग से पुलिस जांच भी जारी है।
इस बीच, श्रीलंका के न्याय मंत्री हर्षना नानायक्कारा ने नेगोंबो जेल में कैदियों के बीच हुई हिंसा पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। घटना के संबंध में रविवार को मजिस्ट्रेट स्तर की जांच भी की गई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जेल के अंदर के इलाकों को अभी भी खाली कराया जा रहा है और अधिकारी मृतकों और घायलों की गिनती करने में जुटे हैं। वहीं सेना के प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस ने सहायता के लिए सेना से अनुरोध किया है लेकिन फिलहाल वे स्टैंडबाय पर हैं।





