ये उत्तराखंड का सबसे खूबसूरत गांव, ठीक सामने हिमालय की चोटियां, कैसे पहुंचे यहां?


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Leeti Village Bageshwar : यहां पहुंचते ही चारों ओर फैले हरे-भरे पहाड़, सीढ़ीनुमा खेत, खेतों में काम करती महिलाएं, जंगल की ओर जाते ग्रामीण और पहाड़ों के ऊपर तैरते बादल किसी चित्र जैसी सुंदरता का एहसास कराते हैं. यहां से हिमालय की कई पर्वत श्रृंखलाएं साफ दिखाई देती हैं. लोकल 18 से स्थानीय निवासी लक्ष्मण कोरंगा बताते हैं कि इस गांव की सबसे बड़ी पहचान यहां के कीवी के बागान हैं. यहां की सुंदरता, कीवी के बागान, पारंपरिक होम स्टे और ग्रामीण जीवन की सादगी हर किसी का दिल जीत लेती है.

बागेश्वर. उत्तराखंड के बागेश्वर का लीती उन चुनिंदा पहाड़ी गांवों में शामिल है, जहां आज भी प्रकृति अपनी मूल खूबसूरती के साथ जीवंत दिखाई देती है. जब कई प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ओवर टूरिज्म की वजह से भीड़भाड़ वाले हो चुके हैं, ऐसे में लीती गांव शांति, प्राकृतिक सौंदर्य और पहाड़ी संस्कृति का अनुभव करने वालों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रहा है. यहां पहुंचते ही चारों ओर फैले हरे-भरे पहाड़, सीढ़ीनुमा खेत, खेतों में काम करती महिलाएं, जंगल की ओर जाते ग्रामीण और पहाड़ों के ऊपर तैरते बादल किसी चित्र जैसी सुंदरता का एहसास कराते हैं. लीती गांव कपकोट विकासखंड के अंतर्गत आता है, और समुद्र तल से लगभग 1,800 से 2,000 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है. गांव के आसपास का वातावरण सालभर ठंडा और स्वच्छ रहता है. यहां से हिमालय की कई पर्वत श्रृंखलाओं के मनमोहक दृश्य भी साफ दिखाई देते हैं. सुबह और शाम का समय विशेष रूप से बेहद आकर्षक होता है, जब बादल पूरे गांव को अपनी चादर में समेट लेते हैं.

लोकल 18 से स्थानीय निवासी लक्ष्मण कोरंगा बताते हैं कि इस गांव की सबसे बड़ी पहचान यहां के कीवी के बागान हैं. पिछले कुछ वर्षों में स्थानीय किसानों ने पारंपरिक खेती के साथ-साथ कीवी की व्यावसायिक खेती को अपनाया है. मौसम अनुकूल होने के कारण यहां अच्छी गुणवत्ता के कीवी का उत्पादन होता है, जिससे किसानों की आय भी बढ़ी है. फल पकने के मौसम में पूरे गांव के बागानों की हरियाली पर्यटकों को खूब आकर्षित करती है.

कई घरों में होम स्टे

पर्यटन की दृष्टि से भी लीती गांव तेजी से आगे बढ़ रहा है. गांव के कई परिवार अपने घरों में होम स्टे संचालित कर रहे हैं. यहां आने वाले पर्यटकों को पहाड़ी शैली के घरों में ठहरने का अवसर मिलता है. साथ ही मंडुवे की रोटी, भट्ट की चुड़कानी, झंगोरे की खीर, गहत की दाल और अन्य पारंपरिक कुमाऊंनी व्यंजनों का स्वाद भी चखने को मिलता है. स्थानीय लोगों का अपनापन और सरल जीवनशैली यहां आने वाले हर पर्यटक को यादगार अनुभव देती है.

कैसे पहुंचे यहां?

बागेश्वर जिला मुख्यालय से सड़क मार्ग के जरिए पहले कपकोट पहुंचा जा सकता है. इसके बाद लीती गांव तक मोटर मार्ग उपलब्ध है. निजी वाहन या स्थानीय टैक्सी के माध्यम से गांव तक आसानी से पहुंचा जा सकता है. सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जबकि निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है. वहां से सड़क मार्ग के जरिए बागेश्वर और फिर लीती पहुंचा जा सकता है. यहां की प्राकृतिक सुंदरता, कीवी के बागान, पारंपरिक होम स्टे और ग्रामीण जीवन की सादगी हर किसी का दिल जीत लेती है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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