तेहरान: अमेरिका ने ईरान को आर्थिक रूप से अपाहिज बनाने की पूरी प्लानिंग कर डाली है. अब ट्रंप ईरान की मेहनत की कमाई पर भी ग्रहण लगाने की प्लानिंग कर रहे हैं. जहां एक तरफ ट्रंप ने ईरान पर आज की रात सबसे भीषण और घातक हमले का ऐलान किया है. वहीं, दूसरी तरफ अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी यानी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान की रीढ़ तोड़ने के लिए ‘इकोनॉमिक हंटर’ चला दिया है. अमेरिका ने चेतावनी दे दी है कि ईरान की हर एक हिमाकत और खाड़ी देशों पर किए गए मिसाइल हमलों से होने वाले नुकसान की पाई-पाई ईरान के फ्रीज किए गए फंड से वसूली जाएगी. अमेरिका ने ये फंड ‘गल्फ दोस्तों’ के साथ बांटने का ऐलान कर दिया है.
सांतवें आसमान पर पहुंचा ट्रंप का गुस्सा
इस पूरे विवाद और अमेरिकी गुस्से की बड़ी वजह बुधवार की रात को हुआ वो भीषण मिसाइल हमला है, जिसने खाड़ी के दो शांत देशों- कुवैत और बहरीन को दहला दिया. ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने के चक्कर में इन दोनों देशों पर मिसाइलों की बौछार कर दी, जिसके बाद दोनों ही देशों को अपने एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिवेट करने पड़े.
इसी हमले के बाद ओवल ऑफिस से मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान ने हाल ही में अमेरिकी सेना के अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया था, जिसका बदला लेने के लिए आज रात ईरान को मिट्टी में मिला दिया जाएगा. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरानी नेताओं ने समझौते के लिए बहुत लंबा वक्त ले लिया, और अब बातचीत का समय खत्म हो चुका है.
Iran के फंड से होगी दोस्तों के नुकसान की भरपाई
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ईरान को खुली चुनौती देते हुए लिखा ‘ईरानी शासन जो जीरो-सम गेम खेल रहा है, उसमें उसकी हार तय है. अमेरिका के खाड़ी दोस्तों को वो जो भी नुकसान पहुंचाएगा, उसकी भरपाई ईरानी खातों से पैसे निकाल कर की जाएगी. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अथॉरिटी को जो भी टैक्स या टोल वसूला जाएगा, उसे उनके ही जब्त खातों से बराबर कर दिया जाएगा. ईरान का हर एक हमला उसके आर्थिक विनाश को और गहरा करेगा’.
रणनीतिक और आर्थिक भाषा में ‘जीरो-सम गेम’ का मतलब होता है ऐसा खेल जहां एक का फायदा पूरी तरह दूसरे के नुकसान पर टिका हो. वॉशिंगटन ने इस बार इस गेम को ही पलट दिया है. अमेरिका का कहना है कि ईरान फारस की खाड़ी में चाहे जो भी सैन्य या आर्थिक चाल चले, अमेरिका उसके जब्त पड़े विदेशी रिजर्व से उतनी ही रकम निकाल कर अपने दोस्तों को बांट देगा. यानी ईरान किसी भी हाल में इस जंग से जीतकर नहीं निकल सकता.
ईरान के होर्मुज प्लान की काट
दरअसल, इस पूरी आर्थिक जंग के पीछे ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का वो समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का लगभग 20% यानी पांचवां हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है. ईरान ने बीते 5 मई को ‘पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ (PGSA) नाम की एक कानूनी संस्था बनाई थी, जिसका काम इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से टैक्स और टोल वसूलना था.
अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने इस संस्था पर तुरंत बैन लगा दिया है. अमेरिका का आरोप है कि यह संस्था और कुछ नहीं, बल्कि ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) द्वारा दुनिया के व्यापारिक जहाजों से अवैध वसूली और आतंकवाद को बढ़ावा देने का एक नया जरिया है. अमेरिका ने दुनिया भर की कंपनियों को चेतावनी दी है कि जिसने भी ईरान को यह टोल टैक्स दिया, उस पर अमेरिकी प्रतिबंधों का ऐसा हंटर चलेगा कि उनका पूरा बिजनेस ठप हो जाएगा.
ईरान का फंड कहां फंसा है, क्या है अमेरिका का रोल?
ईरान का जो पैसा दुनिया के अलग-अलग देशों जैसे कतर, इराक, चीन, या भारत के बैंकों में जमा है, वो असल में अमेरिकी पाबंदियों के तहत लॉक है. अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम जैसे SWIFT पर अमेरिका का दबदबा है. अमेरिका ने नियम बना रखा है कि कोई भी देश डॉलर में ईरान को भुगतान नहीं कर सकता. इसलिए, भले ही वह पैसा दूसरे देशों में हो लेकिन बिना अमेरिकी वित्त मंत्रालय की हरी झंडी के कोई भी देश उस पैसे को छू तक नहीं सकता.
अगर कुल वैश्विक फंड की बात करें, तो दुनिया के अलग-अलग देशों के बैंकों में ईरान का करीब 100 अरब डॉलर से लेकर 120 अरब डॉलर यानी लगभग 8.3 लाख करोड़ से 10 लाख करोड़ रुपये का फंड फंसा हुआ है. ये वो पैसा है जो ईरान ने अलग-अलदग देशों को कच्चा तेल और गैस बेचकर कमाया था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों और बैंकिंग पाबंदियों के चलते वह इस पैसे को अपने देश वापस नहीं ले जा सका.




