अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी अस्थायी समझ के बाद गहन वार्ता होनी चाहिए: कलास
यूरोपीय संघ के एक शीर्ष पदाधिकारी ने सोमवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी तरह की अस्थायी सहमति बनने के बाद तेहरान के परमाणु भंडार और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर अवश्य ही गहन बातचीत होनी चाहिए।
उन्होंने पश्चिम एशिया में स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान के लिए 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ के सहयोग की पेशकश भी की।
यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की शीर्ष प्रतिनिधि काजा कलास ने कहा कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य मध्यस्थ रहा है, और इस्लामाबाद के राजनयिक प्रयासों ने दोबारा युद्ध शुरू होने से रोकने में मदद की है।
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री इसहाक डार के साथ अपनी बातचीत के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कलास ने कहा कि उनकी यह यात्रा वैश्विक और क्षेत्रीय परिवर्तनों के बीच एक महत्वपूर्ण समय पर हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया की स्थिति सहित वैश्विक घटनाक्रमों पर भी चर्चा की।
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर समन्वित हमले किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई और कई शीर्ष कमांडर मारे गए। ईरान ने महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली और इसका इस्तेमाल अमेरिका पर युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव बनाने में किया।
कलास ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच नाजुक युद्धविराम को बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक ‘‘बहुत बारीक राजनयिक अवसर’’ मौजूद है।
उन्होंने कहा, ‘‘फिर भी, अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी अस्थायी समझौते के बाद ईरान के परमाणु भंडार और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन बातचीत होनी चाहिए।’’
ईयू पदाधिकारी ने कहा कि उनका संगठन एक स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान में योगदान देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, ‘‘हम आर्थिक प्रभाव, कठिन परिश्रम से अर्जित परमाणु विशेषज्ञता, खाड़ी देशों के साझेदारों के साथ दीर्घकालिक संबंध और ईरान के साथ प्रत्यक्ष संपर्क लेकर आए हैं।’’




