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Ghaziabad jaundice test : गाजियाबाद के नवजातों की पीलिया जांच अब बिना खून निकाले की जा रही है. इसके लिए संयुक्त जिला अस्पताल में आधुनिक ट्रांसक्यूटेनियस बिलिरुबिनोमीटर मशीन लगाई गई है. इससे बच्चों को बिना दर्द दिए कुछ ही सेकंड में पीलिया का स्तर पता चल जाता है. इस मशीने के आने से जांच प्रक्रिया भी पहले से काफी आसान और तेज हो गई है. गाजियाबाद की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमा ज्योति बिष्ट बताती हैं कि यह मशीन दर्द रहित तकनीक पर काम करती है. डॉ. बिष्ट के अनुसार, समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में पीलिया का खतरा ज्यादा रहता है.
गाजियाबाद. यूपी स्थित गाजियाबाद के संयुक्त जिला अस्पताल में अब नवजात बच्चों में पीलिया की जांच बिना खून निकाले की जा रही है. अस्पताल में आधुनिक ट्रांसक्यूटेनियस बिलिरुबिनोमीटर मशीन लगाई गई है जिससे बच्चों को बिना दर्द दिए कुछ ही सेकंड में पीलिया का स्तर पता चल जाता है. पहले जांच के लिए नवजात का खून लेना पड़ता था, लेकिन अब मशीन को बच्चे की त्वचा पर लगाकर ही रिपोर्ट मिल रही है. इससे न सिर्फ बच्चों को दर्द से राहत मिली है, बल्कि जांच प्रक्रिया भी पहले से काफी आसान और तेज हो गई है.
अनावश्यक ब्लड सैंपलिंग में कमी
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि अब जन्म लेने वाले सभी नवजात बच्चों की सबसे पहले इसी मशीन से स्क्रीनिंग की जा रही है. जिन बच्चों में पीलिया का स्तर ज्यादा मिलता है, केवल उन्हीं का आगे ब्लड टेस्ट कराया जाता है. इससे अनावश्यक ब्लड सैंपलिंग कम हुई है और अभिभावकों को भी राहत मिली है. पहले हर बच्चे की खून की जांच करनी पड़ती थी जिससे रिपोर्ट आने में समय लगता था और कई बार परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ता था.
3 बार रीडिंग
गाजियाबाद की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमा ज्योति बिष्ट ने बताया कि यह मशीन पूरी तरह दर्द रहित तकनीक पर काम करती है. मशीन को बच्चे की त्वचा पर फोरहेड या स्टरनम बोन पर रखकर जांच की जाती है. मशीन तीन बार रीडिंग लेकर बिलिरुबिन का स्तर बताती है. इससे तुरंत पता चल जाता है कि बच्चे को जॉन्डिस है या नहीं. डॉ. बिष्ट कहती हैं कि पहले कई बार बच्चे का ब्लड सैंपल 6 घंटे बाद लेना पड़ता था और लैब बंद होने की वजह से रिपोर्ट आने में देरी हो जाती थी लेकिन अब जांच तुरंत हो रही है. डॉ. बिष्ट के अनुसार समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में पीलिया का खतरा ज्यादा रहता है क्योंकि उनका लीवर पूरी तरह विकसित नहीं होता.
क्या सभी को पीलिया
डॉ. बिष्ट कहती हैं कि हालांकि जन्म के बाद अधिकांश नवजातों में किसी न किसी स्तर का पीलिया पाया जाता है. ऐसे में शुरुआती जांच बहुत जरूरी होती है ताकि समय रहते इलाज शुरू किया जा सके. अस्पताल में हाल ही में शुरू हुई इस सुविधा से अब तक 10 से 12 नवजात बच्चों की जांच की जा चुकी है. अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, मशीन की कीमत सात से आठ लाख रुपये है. इस नई तकनीक से नवजात बच्चों की बेहतर देखभाल हो सकेगी और गंभीर स्थिति बनने से पहले ही बीमारी का पता लगाया जा सकेगा.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें





