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Deworming Medicine for Kids: बच्चों में पेट के कीड़ों की समस्या काफी कॉमन है, लेकिन सही समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी होता है. मुंबई की पीडियाट्रिशियन डॉक्टर श्रुति घटालिया के अनुसार बच्चों को समय-समय पर डी-वॉर्मिंग की दवा देना जरूरी है. 1 साल की उम्र के बाद 6 साल तक बच्चों को हर 6 महीने में एक बार कीड़ों की दवा देनी चाहिए.
1 साल की उम्र के बाद 6 साल तक बच्चों को हर 6 महीने पर कीड़ों की दवा देनी चाहिए.
Stomach Worms in Children: बच्चों में पेट के कीड़े (intestinal worms) की समस्या भारत में कॉमन है. गंदे हाथ, मिट्टी में खेलना, बिना हाथ धोए खाना खाना या संक्रमित पानी और भोजन के कारण बच्चों के पेट में कीड़े हो सकते हैं. कई बार माता-पिता को इसका पता भी नहीं चलता, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य लग सकते हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि बच्चों को पेट के कीड़े की दवा किस उम्र से देनी चाहिए और क्या इसे नियमित रूप से देना जरूरी होता है.
मुंबई की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रुति घटालिया ने News18 को बताया आमतौर पर 1 साल की उम्र के बाद बच्चों को डॉक्टर की सलाह पर डी-वॉर्मिंग यानी पेट के कीड़ों की दवा दी जा सकती है. यह दवा आमतौर पर बच्चों को हर 6 महीने में एक बार देनी चाहिए. ऐसा 1 साल से लेकर 6 साल तक करना चाहिए. हालांकि दवा की सही मात्रा और समय बच्चे की उम्र, वजन और सेहत के अनुसार तय किया जाता है. इसलिए अपनी मर्जी से कोई भी दवा नहीं देनी चाहिए.
बच्चों में पेट के कीड़ों के लक्षण कैसे पहचानें?
डॉक्टर के मुताबिक पेट में कीड़े होने पर बच्चों में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं. जैसे बार-बार पेट दर्द होना, भूख कम लगना, वजन न बढ़ना, कमजोरी महसूस होना, रात में दांत पीसना या गुदा के आसपास खुजली होना. कुछ बच्चों में चिड़चिड़ापन और पढ़ाई या खेल में ध्यान कम लगने जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं. अगर लंबे समय तक यह समस्या बनी रहे, तो बच्चे के पोषण और विकास पर भी असर पड़ सकता है.
दवा के साथ सफाई भी बेहद जरूरी
एक्सपर्ट की मानें तो सिर्फ दवा खिलाने से ही पेट के कीड़ों की समस्या पूरी तरह नहीं रुकती. इसके लिए बच्चों को हाथ धोने की आदत सिखाना, साफ पानी पिलाना और खाने से पहले सफाई का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है. बच्चों के नाखून छोटे रखने चाहिए और बाहर से आने के बाद हाथ साबुन से जरूर धुलवाने चाहिए. साथ ही खुले में रखा खाना खिलाने से बचना चाहिए. अच्छी स्वच्छता अपनाकर पेट के कीड़ों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न दें
कई माता-पिता मेडिकल स्टोर से सीधे दवा खरीदकर बच्चों को दे देते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं माना जाता. हर बच्चे की उम्र और सेहत अलग होती है, इसलिए दवा की मात्रा भी अलग हो सकती है. गलत डोज या जरूरत से ज्यादा दवा देने से साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए अगर बच्चे में पेट के कीड़ों के लक्षण दिखाई दें, तो सबसे पहले बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है. खुद बच्चे का ट्रीटमेंट करना खतरनाक हो सकता है. इस तरह की गलती कभी न करें.
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अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें





