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Oxygen Toxicity: स्कूबा डाइविंग एक एडवेंचर एक्टिविटी है. लेकिन यदि इसे सावधानी और सतर्कता के साथ न किया जाए तो ये जानलेवा भी साबित हो सकता है. हाल ही में मालदीव में 5 लोगों की मौत का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि इसका कारण ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी हो सकता है. ये क्या होता है, चलिए इस लेख में समझते हैं.
मालदीव में हाल ही में हुई स्कूबा डाइविंग दुर्घटना ने समुद्र की गहराई में छिपी एक जानलेवा खतरे को उजागर किया है. दरअसल, इस हादसे में 5 इटालियन टूरिस्ट की मौत हुई है जो अंडरवाटर केव को एक्सप्लोर करने के लिए गहरे पानी में उतरे थें. बताया जा रहा है कि हादसा मालदीव के वावू एटोल इलाके के पास हुआ, जहां गोताखोर लगभग 160 फीट गहराई तक उतर गए थे.
मृतकों में प्रसिद्ध समुद्री जीव वैज्ञानिक मोनिका मोंटेफाल्कोन और उनकी 20 साल की बेटी भी शामिल थीं. इनके अलावा रिसर्च फेलो म्यूरियल ओडेनिनो, मरीन बायोलॉजी ग्रेजुएट फेडेरिको गुआल्तियेरी और डाइविंग इंस्ट्रक्टर जियानलुका बेनेडेट्टी की भी जान चली गई. रिपोर्ट के अनुसार, 14 मई को ये ग्रुप अलीमाथा द्वीप के पास समुद्र के अंदर बनी गुफाओं की खोज कर रहा था, लेकिन डाइविंग के बाद वे वापस सतह पर नहीं लौट सके.
ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी मौत की वजह?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस हादसे की एक बड़ी वजह “ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी” हो सकती है. ऑक्सीजन हमारे जीवन के लिए जरूरी है, लेकिन ज्यादा दबाव वाली परिस्थितियों में यही ऑक्सीजन शरीर के लिए खतरनाक बन सकती है. समुद्र में गहराई बढ़ने के साथ दबाव भी बढ़ता जाता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का असर सामान्य से ज्यादा हो जाता है.
ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन भी जानलेवा
एक्सपर्ट के मुताबिक, ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन शरीर में जहरीले तत्व पैदा कर सकती है, जो दिमाग और शरीर के अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं. गहरे समुद्र में डाइविंग के दौरान सबसे बड़ा खतरा “सेंट्रल नर्वस सिस्टम ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी” का होता है. इसके लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं.
ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी के लक्षण
ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी के दौरान चक्कर आना, उलझन महसूस होना, आंखों के सामने धुंधलापन, मांसपेशियों में झटके, मतली और अचानक दौरे पड़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अगर पानी के अंदर किसी डाइवर को दौरा पड़ जाए, तो उसके डूबने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है.
समुद्र की गहराई में छिपा खतरा
आमतौर पर स्कूबा डाइविंग में लोग सामान्य हवा जैसी गैस का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ज्यादा गहराई पर यही गैस खतरनाक हो सकती है. अनुभवी डाइवर कई बार विशेष गैस मिश्रण का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अगर उसकी मात्रा सही न हो तो ऑक्सीजन जहरीली साबित हो सकती है. गुफाओं में डाइविंग करना और भी ज्यादा जोखिम भरा होता है. वहां रोशनी कम होती है, पानी का बहाव तेज हो सकता है और घबराहट बढ़ने से सांस तेज चलने लगती है. इससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रभाव और बढ़ सकता है. खराब मौसम, तेज हवाएं, तनाव और थकान भी इस खतरे को बढ़ाने वाले कारण माने जाते हैं.
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शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें
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