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आगरा का नाम आते ही सबसे पहले ताजमहल याद आता है, लेकिन इस शहर में इसके अलावा भी कई ऐतिहासिक और खूबसूरत इमारतें मौजूद हैं. मुगलकाल से जुड़ी ये धरोहरें अपनी अनोखी वास्तुकला, इतिहास और शांत वातावरण के लिए जानी जाती हैं. इनमें कुछ जगहें ऐसी भी हैं, जिनके बारे में आज बहुत कम लोग जानते हैं, लेकिन उनकी खूबसूरती किसी बड़े पर्यटन स्थल से कम नहीं है.
आगरा के अशोपा हॉस्पिटल के पास स्थित सादिक खां और सालावत खां का मकबरा एक ऐतिहासिक और बेहद खूबसूरत इमारत है. इस मकबरे की सबसे खास बात यह है कि यहां पिता और पुत्र दोनों एक साथ दफन हैं, जिसकी वजह से यह इमारत अपनी अलग पहचान रखती है. स्थानीय लोग इसे ‘64 खंभा इमारत’ के नाम से भी जानते हैं.

आगरा के सिकंदरा चौराहे से मथुरा की ओर मरियम का मकबरा स्थित है. यह मकबरा मुगल बादशाह अकबर की पत्नी मरियम-उज़-ज़मानी से जुड़ा बताया जाता है. चारों ओर हरियाली और शांत वातावरण होने के कारण यह जगह लोगों को काफी आकर्षित करती है. यहां आने वाले पर्यटक इतिहास के साथ सुकून भरे माहौल का भी आनंद लेते हैं.

आगरा के सिकंदरा में स्थित अकबर का मकबरा मुगल वास्तुकला का बेहद शानदार नमूना माना जाता है. बताया जाता है कि बादशाह अकबर की मृत्यु के बाद उनके पुत्र जहांगीर ने उन्हें यहीं दफनाया था. लाल बलुआ पत्थरों से बनी यह खूबसूरत इमारत अपनी भव्यता के लिए जानी जाती है. मकबरे में सफेद संगमरमर का भी बेहद आकर्षक तरीके से इस्तेमाल किया गया है, जो इसकी सुंदरता को और खास बनाता है.
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आगरा के दीवानी चौराहे के सामने कर्नल जोन्स विलियम हेंसींग का मकबरा स्थित है, जिसे स्थानीय लोग ‘लाल ताजमहल’ के नाम से जानते हैं. यह इमारत एक पत्नी ने अपने पति की याद में बनवाई थी. ताजमहल जैसी आकृति होने के कारण इसे आगरा का दूसरा ताजमहल भी कहा जाता है. इस इमारत के मुख्य मकबरे में कर्नल जोन्स विलियम हेंसींग की कब्र बनी हुई है, जो इसे ऐतिहासिक रूप से खास बनाती है.

आगरा का मेहताब बाग मुगलकाल से ही काफी मशहूर माना जाता है. यहां चारों ओर हरियाली और शुद्ध वातावरण का सुंदर माहौल देखने को मिलता है. इस जगह से ताजमहल का पूरा व्यू बेहद आकर्षक नजर आता है. बाग में मौजूद कई पेड़-पौधे लोगों को शांति और सुकून का एहसास कराते हैं. यमुना किनारे स्थित होने की वजह से यहां मिट्टी की भीनी-भीनी खुशबू वातावरण को और खास बना देती है.

आगरा के बल्केश्वर में स्थित जसवंत सिंह की छतरी यमुना किनारे बनी बेहद सुंदर और आकर्षक इमारत है. लाल बलुआ पत्थरों से बनी इस इमारत को हिंदू स्थापत्य शैली का शानदार नमूना माना जाता है. इसमें मुगल और हिंदू वास्तुकला का खूबसूरत मिश्रण देखने को मिलता है. बताया जाता है कि इस छतरी का निर्माण जसवंत सिंह राठौर ने अपने बड़े भाई अमर सिंह राठौर की पत्नी रानी हाड़ा की याद में करवाया था.

आगरा के दिल्ली गेट का इतिहास मुगलकाल से जुड़ा हुआ है. बताया जाता है कि पुराने समय में किले में प्रवेश करने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल किया जाता था. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इसके नीचे एक सुरंग भी मौजूद है, जो सीधे दिल्ली तक जाती है. हालांकि, इसका कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन लोगों के बीच यह कहानी काफी प्रचलित है. वर्तमान में यह ऐतिहासिक इमारत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी Archaeological Survey of India के अधीन है.

आगरा के गढ़ी भदौरिया क्षेत्र में ढाकरी का महल स्थित है. यह ऐतिहासिक इमारत 16वीं सदी में बनाई गई थी. लाल बलुआ पत्थरों से बनी यह खूबसूरत इमारत मुगल वास्तुकला की झलक पेश करती है. वर्तमान में यह इमारत Archaeological Survey of India के अधीन संरक्षित है. आसपास अवैध निर्माण होने के कारण यह इमारत अब काफी हद तक घिर चुकी है. वहीं, प्रचार-प्रसार की कमी की वजह से बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं.





