यहां दिन में ‘गुड नाइट’ और रात में ‘गुड मॉर्निंग’ होती है… हैदराबाद जा रहे हैं? तो इस ‘टाइम मशीन’ जैसे नॉकटर्नल हाउस को देखना न भूलें


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Nocturnal House Hyderabad: हैदराबाद के नेहरू जूलॉजिकल पार्क का नॉकटर्नल हाउस लोगों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है. यहाँ डे-नाइट रिवर्सल तकनीक के जरिए दिन में कृत्रिम अंधेरा और रात में रोशनी कर नॉकटर्नल जानवरों को सक्रिय रखा जाता है. पर्यटक यहाँ उल्लू, चमगादड़, बिज्जू, सिवेट और जंगली बिल्लियों को उनकी प्राकृतिक गतिविधियों में देख सकते हैं. फ्लैश फोटोग्राफी पर पूरी तरह रोक है. यह केंद्र मनोरंजन के साथ वन्यजीव संरक्षण और शिक्षा का भी अनोखा उदाहरण है.

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हैदराबाद. आमतौर पर सूरज निकलते ही दिन की शुरुआत होती है, लेकिन हैदराबाद के नेहरू जूलॉजिकल पार्क में एक ऐसी जगह है जहाँ सूरज उगते ही रात हो जाती है. यह अनोखी दुनिया है ‘नॉकटर्नल हाउस’ की, जहाँ दिन के समय घना अंधेरा और रात जैसा माहौल बनाया जाता है. यह विशेष व्यवस्था पर्यटकों को उन जानवरों की गतिविधियाँ देखने का मौका देती है जो आमतौर पर केवल रात में सक्रिय रहते हैं और दिनभर सोते हैं. यही कारण है कि यह जगह अब पर्यटकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बन चुकी है.

नेहरू जूलॉजिकल पार्क ने नॉकटर्नल (निशाचर) जानवरों को दिन में सक्रिय दिखाने के लिए ‘डे-नाइट रिवर्सल’ तकनीक अपनाई है. इसके तहत दिन के समय पूरे परिसर में कृत्रिम अंधेरा रखा जाता है. यहाँ कम रोशनी वाले नीले और लाल बल्बों का उपयोग किया जाता है, जिससे जानवरों को रात जैसा अहसास होता है. वहीं शाम को चिड़ियाघर बंद होने के बाद यहाँ तेज रोशनी कर दी जाती है ताकि जानवरों को दिन होने का अनुभव हो और वे आराम करने चले जाएं.

पर्यटकों को दिखती है जानवरों की असली दुनिया
नॉकटर्नल हाउस में प्रवेश करते ही लोगों को ऐसा महसूस होता है जैसे वे किसी अलग दुनिया में आ गए हों. अंधेरे माहौल में पर्यटक उल्लू, चमगादड़, बिज्जू, सिवेट, स्लो लोरिस और जंगली बिल्लियों को सक्रिय अवस्था में देख सकते हैं. आमतौर पर ये जानवर दिन के समय सोते रहते हैं, इसलिए अन्य चिड़ियाघरों में लोग इन्हें सक्रिय रूप में नहीं देख पाते. लेकिन यहाँ पर्यटकों को इनकी प्राकृतिक गतिविधियों को करीब से देखने का मौका मिलता है.

फ्लैश फोटोग्राफी पर पूरी तरह प्रतिबंध
चिड़ियाघर प्रबंधन के अनुसार नॉकटर्नल हाउस में फ्लैश फोटोग्राफी पूरी तरह प्रतिबंधित है. अचानक होने वाली तेज रोशनी इन संवेदनशील जानवरों की आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है और उनके आर्टिफिशियल चक्र को भी बिगाड़ सकती है. पर्यटकों से यहाँ शांत रहने की अपील भी की जाती है ताकि जानवरों को किसी प्रकार का तनाव महसूस न हो. यह केंद्र मनोरंजन के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण और शिक्षा का भी एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है.

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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें



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