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धर्मग्रंथों में लिखे गए ‘स्वर्ग’ को लेकर एक पूर्व हार्वर्ड वैज्ञानिक ने चौंकाने वाला दावा किया है. डॉ. माइकल गुइलेन का कहना है कि स्वर्ग कोई काल्पनिक जगह नहीं, बल्कि इसी ब्रह्मांड में ‘कॉस्मिक होराइजन’ (Cosmic Horizon) के पार स्थित एक भौतिक स्थान है, जो धरती से 439 अरब ट्रिलियन किलोमीटर दूर है. उनके इस दावे ने वैज्ञानिक जगत में बहस छेड़ दी है. अन्य खगोलविदों ने इस थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए इसे विज्ञान के नाम पर परोसा जा रहा ‘अध्यात्म’ और ‘कोरी कल्पना’ करार दिया है.
क्या सच में मिल गया स्वर्ग का एड्रेस? (AI इमेज)
सदियों से स्वर्ग और नर्क की बातें केवल धर्मग्रंथों, कहानियों और आस्था तक ही सीमित रही हैं. लेकिन क्या हो अगर कोई वैज्ञानिक यह कहे कि उसने ‘स्वर्ग’ का सटीक पिनकोड और पता (Exact Location) ढूंढ लिया है? हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में फिजिक्स के पूर्व लेक्चरर और साइंस कम्युनिकेटर डॉ. माइकल गुइलेन (Michael Guillén) ने कुछ ऐसा ही अजीबोगरीब दावा किया है. उन्होंने अपनी एक हालिया ओपिनियन पोस्ट में कहा है कि स्वर्ग इसी ब्रह्मांड में एक ‘भौतिक स्थान’ (Physical Place) हो सकता है.
कहां है स्वर्ग और धरती से कितनी है दूरी?
डॉ. गुइलेन की थ्योरी के अनुसार, जिसे हम ‘जन्नत’ या ‘स्वर्ग’ कहते हैं, वह अंतरिक्ष में ‘कॉस्मिक होराइजन’ (Cosmic Horizon) के पार मौजूद है. यह पृथ्वी से लगभग 439 अरब ट्रिलियन किलोमीटर दूर है. एडविन हबल के ‘हबल लॉ’ (Hubble’s Law) का हवाला देते हुए गुइलेन बताते हैं कि ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है. जो आकाशगंगाएं पृथ्वी से जितनी दूर हैं, वे उतनी ही तेज गति से हमसे दूर जा रही हैं. यह गति प्रकाश की गति के बराबर हो सकती है. गुइलेन का दावा है कि स्वर्ग इसी कॉस्मिक होराइजन के दूसरी तरफ स्थित हो सकता है.
अपने दावे के समर्थन में गुइलेन के 4 ‘तर्क’
- गुइलेन ने अपनी इस आध्यात्मिक: वैज्ञानिक थ्योरी को साबित करने के लिए आधुनिक कॉस्मोलॉजी (ब्रह्मांड विज्ञान) और अल्बर्ट आइंस्टीन के सिद्धांतों का सहारा लिया है:
- ब्रह्मांड की अदृश्य सीमा: उनका कहना है कि कॉस्मिक होराइजन के पार एक पूरा ब्रह्मांड मौजूद है, लेकिन वह हमसे हमेशा के लिए छिपा हुआ है क्योंकि हम वहां तक कभी नहीं पहुंच सकते.
- समय का रुक जाना: आइंस्टीन की ‘थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी’ का हवाला देते हुए गुइलेन कहते हैं कि कॉस्मिक होराइजन पर समय रुक जाता है. स्वर्ग के बारे में भी यही कहा जाता है कि वहां कोई भूत, वर्तमान या भविष्य नहीं होता, बल्कि ‘शाश्वतता’ (Timelessness) होती है.
- बिग बैंग से भी पुराना: आधुनिक विज्ञान मानता है कि ब्रह्मांड लगभग 13.8 अरब साल पुराना है और प्रकाश की गति (3 लाख किमी प्रति सेकंड) के कारण हम केवल वहीं तक देख सकते हैं जहां से प्रकाश हम तक पहुंच पाया है. गुइलेन का तर्क है कि इस होराइजन के पास सबसे पुरानी खगोलीय वस्तुएं हैं, जो शायद ‘बिग बैंग’ से भी पहले की हो सकती हैं.
यह विज्ञान नहीं, कोरी कल्पना है
गुइलेन के इस दावे ने वैज्ञानिक समुदाय को हैरान और परेशान कर दिया है. खगोलविदों ने इसे विज्ञान के साथ अध्यात्म की ‘खिचड़ी’ पकाने का प्रयास बताया है. कनेक्टिकट कॉलेज में एस्ट्रोनॉमी के एसोसिएट टीचिंग प्रोफेसर डॉ. एलेक्स जियानिनास (Alex Gianninas) ने गुइलेन के दावों की हवा निकालते हुए पॉपुलर मैकेनिक्स से कहा, ‘कॉस्मिक होराइजन कोई ईंट-पत्थर या भौतिक स्थान नहीं है, बल्कि यह सिर्फ एक सीमा है जिसके पार हम अपनी वर्तमान तकनीक और भौतिकी के नियमों के कारण देख या संवाद नहीं कर सकते.’
कई अन्य वैज्ञानिकों का भी मानना है कि बिग बैंग जैसी वैज्ञानिक घटनाओं को ‘सृष्टि की रचना’ की धार्मिक कहानियों से जोड़ना खतरनाक और भ्रामक है. विज्ञान सबूतों पर बात करता है, जबकि कॉस्मिक होराइजन के पार स्वर्ग होने का दावा पूरी तरह से ‘मेटाफिजिक्स’ (तत्वमीमांसा) है, जिसका यथार्थवादी खगोल विज्ञान से कोई लेना-देना नहीं है. कुल मिलाकर, स्वर्ग के पते का यह दावा विज्ञान जगत में एक ‘हंसी का पात्र’ बनकर रह गया है.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें





