पैसा होने पर भी नहीं म‍िलेंगी चीजें! अमेरिकी एक्सपर्ट ने बजाई खतरे की घंटी, बोले-डेंजरस फेज में दुन‍िया


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पैसा होने पर भी नहीं म‍िलेंगी चीजें! अमेरिकी एक्सपर्ट ने बजाई खतरे की घंटी

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दुनिया अब सिर्फ बढ़ती महंगाई से नहीं, बल्कि एक बेहद खतरनाक ‘किल्लत’ के दौर से गुजरने वाली है। शीर्ष अमेरिकी सुरक्षा विशेषज्ञ रॉबर्ट पेप ने चेतावनी दी है कि जल्द ही पैसा होने के बावजूद चीजें नहीं मिलेंगी. जेट फ्यूल से लेकर प्लास्टिक तक की सप्लाई चेन टूटने लगी है, जो एक भयंकर वैश्विक आर्थिक मंदी का संकेत है.

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अमेर‍िकी एक्‍सपर्ट इशारा कररहे क‍ि इसी तरह दुकानें खाली हो जाएंगी.

ईरान जंग के बाद अगर आपको लग रहा है क‍ि दुनिया सिर्फ महंगाई से परेशान है, तो आप गलतफहमी में हैं. अमेरिका के एक टॉप स‍िक्‍योर‍िटी एक्‍सपर्ट कह रहे क‍ि हालात और खराब होने जा रहे हैं. दुन‍िया डेंजरस फेज में पहुंच चुकी है. जहां पैसा होने के बावजूद आपको चीजें नहीं म‍िलेंगी.

यह चेतावनी शिकागो यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर और शिकागो प्रोजेक्ट ऑन सिक्योरिटी एंड थ्रेट्स के निदेशक रॉबर्ट ए पेप ने दी है. उन्‍होंने एक्‍स पर ल‍िखा, यह अब सिर्फ कीमतों में उछाल का मामला नहीं रह गया है. यह अब चीजों की शार्टेज में बदल चुका है. उन्होंने अर्थशास्त्रियों पर तंज कसते हुए कहा कि ज्यादातर एनालिस्ट अभी भी सिर्फ बढ़ती कीमतों पर बात कर रहे हैं, जो कि पूरी तरह से आउटडेटेड नजरिया है. पेप ने चेतावनी दी कि हम एक बहुत ही खतरनाक दौर में प्रवेश कर रहे हैं. उन्होंने याद दिलाया कि 10 दिन पहले ही उन्होंने इस संकट के आने की चेतावनी दे दी थी, और अब इसके भयानक परिणाम जमीन पर दिखने लगे हैं. सप्‍लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है.

दुनिया भर में दिखने लगा असर

  1. यूरोप: यहां एविएशन सेक्टर को जेट फ्यूल की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. नतीजा हजारों उड़ानें रोजाना रद्द हो रही हैं.
  2. दक्षिण कोरिया: यहां प्लास्टिक उद्योग में भारी मुश्क‍िलें आ गई हैं. यहां तक क‍ि कई फैक्‍ट्र‍ियों में प्रोडक्‍शन ठप हो रहा है.
  3. एशिया: पूरे एशियाई महाद्वीप में शुरुआती स्तर पर सप्लाई गैप दिखने लगा है. कई देशों में अभी से तेल के ल‍िए मारामारी है. यह बहुत बड़े संकट की शुरुआत है.

अब बात पैसे की नहीं, एक्‍सेस की है…

प्रोफेसर पेप ने समझाया कि लोग सबसे बड़ी गलती यह कर रहे हैं कि वे इसे सिर्फ महंगाई की नजर से देख रहे हैं. उन्होंने लिखा, लोगों को लगता है कि यह सब ऊंची कीमतों के बारे में है. लेकिन ऐसा नहीं है. हर नाकेबंदी के दौरान एक ऐसा वक्त आता है… जब कीमत मायने रखना बंद कर देती है… और उस सामान तक आपकी पहुंच ही सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है. यानी, एक वक्त ऐसा आएगा जब आप मुंहमांगी कीमत देने को तैयार होंगे, लेकिन बाजार में वह सामान मौजूद ही नहीं होगा.

इत‍िहास से सबक सीखना होगा

अपने न्यूज़लेटर ‘द एस्केलेशन ट्रैप’ का हवाला देते हुए रॉबर्ट पेप ने बताया कि इतिहास इस बात का गवाह है कि जब एक बार किल्लत या अकाल शुरू हो जाता है, तो सिस्टम कभी स्थिर नहीं होता, बल्कि वह और ज्यादा सिकुड़ने लगता है. उन्होंने बताया कि इसके बाद क्या चेन रिएक्शन होता है. पहले प्रोडक्‍शन स्‍लो हो जाता है. सप्लाई चेन पूरी तरह टूट जाती है. सरकारों को मजबूरन दखल देना पड़ता है. यही तरीका है, जब दुन‍िया मंदी के दौर में प्रवेश कर जाती है. हम ठीक उसी बिंदु पर खड़े हैं, जहां से अगर यह स्थिति अगले 30 से 60 दिनों तक और जारी रही, तो दुनिया को इतना नुकसान होगा, ज‍िसकी कभी भरपाई नहीं हो पाएगी.

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Gyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें



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