ईरान जंग से ट्रंप के अपने हुए पराए! कभी जान देने को तैयार समर्थकों में दरार क्यों, MAGA वाली बात समझिए


‘मैं अगर न्यूयॉर्क के फिफ्थ एवेन्यू पर खड़े होकर किसी को गोली मार दूं, तो भी अपना समर्थन नहीं खोऊंगा.’  यह बात 2016 में अमेरिका में पहली बार राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी कर रहे डोनाल्ड ट्रंप ने शेखी बघारते हुए कही थी. इसको 10 साल का समय गुजर चुका है. अमेरिका फर्स्ट और मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) की जिस लहर पर सवार होकर ट्रंप दूसरी बार दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क के राष्ट्रपति बने, वह अब दरकती नजर आ रही है. ईरान युद्ध ने वह कर दिखाया जो शायद ही कोई दूसरा मुद्दा कर पाता. कई साल तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अपने MAGA आंदोलन पर लगभग पूरी तरह से कंट्रोल रहा. ट्रंप और उनके कोर समर्थकों की सबसे प्रभावशाली आवाजों के बीच एक दरार पैदा कर दी है.

ट्रंप के खिलाफ क्यों हुआ ‘MAGA’ का एक धड़ा?
अमेरिका और इजरायल की तरफ से किए गए टार्गेटेड हमलों से शुरू हुआ यह मामला जल्द ही एक इलाकाई संघर्ष में बदल गया, जिससे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई और कई सारे मोर्चे खुल गए. अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम पर सहमति और बातचीत के बीच इस जंग ने ग्लोबल एनर्जी का संकट पैदा कर दिया है.

ट्रंप के सैन्य रुख ने शुरुआत से ही MAGA के प्रमुख चेहरों को बांट दिया. कुछ ने कट्टरपंथी नजरिए का समर्थन किया, जबकि अन्य लोगों ने तर्क दिया कि यह विदेशी उलझनों से बचने के ‘अमेरिका फर्स्ट’ थ्योरी का उल्लंघन है. यह विभाजन तब और गहरा गया जब ट्रंप के बयान हर कुछ दिन पर अदल-बदल कर आते रहे. वह कभी युद्ध बढ़ाने तो कभी पीछे हटने के बीच डगमगाते नजर आए.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर ईरान को अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए चेतावनी और उसके बाद एक पूरी सभ्यता को मिटा देने की धमकी इस विवाद का निर्णायक मोड़ साबित हुई. इसके कुछ ही घंटों के बाद, ट्रंप युद्धविराम की ओर झुक गए, जिससे युद्ध का समर्थन और विरोध कर रहे दोनों ही तरफ के लोग उनसे नाराज हो गए.

किन प्रमुख आवाजों ने ट्रंप का साथ छोड़ दिया?
यह विरोध राजनीतिक विरोधियों से नहीं, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप की अपनी ही मीडिया और विचारधारा के साथ ही कोर समर्थक इकोसिस्टम के अंदर से आया है. दक्षिणपंथी मीडिया की सबसे प्रभावशाली आवाजों में शामिल टकर कार्लसन ने ट्रंप की धमकियों को ‘युद्ध अपराध’ और ‘बेहद घिनौना’ करार दिया. उन्होंने संस्थानों से राष्ट्रपति को सीधे ‘नहीं’ कहने का आग्रह किया.

वहीं इनडिपेंडेंट पॉडकास्टर मेगिन केली ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, ‘क्या वह एक सामान्य इंसान की तरह व्यवहार नहीं कर सकते? आप एक पूरी सभ्यता को मिटाने की धमकी नहीं दे सकते हैं.’ कन्जर्वेटिव इन्फ्लुएंसर कैंडिस ओवेन्स ने ट्रंप को पद से हटाने की मांगों का समर्थन करते हुए लिखा, ‘अब शायद दादाजी को ओल्ड एज होम में भेजने का समय आ गया है.’

कॉन्सपिरेसी थियरिस्ट एलेक्स जोन्स ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप के साथ जो हुआ, उसे देखकर बहुत दुख होता है. वह एक समय जैसे थे, उससे पूरी तरह से बदल गए हैं. वह डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी से ग्रस्त हैं. मैं इस देश और दुनिया को लेकर बहुत चिंतित हूं. रिपब्लिकन सांसद मार्जोरी टेलर ग्रीन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘हम कभी नहीं बदले, ट्रंप बदल गए. अमेरिका फर्स्ट! हम किसी भी सभ्यता को पूरी तरह से नहीं खत्म कर सकते हैं.

युद्ध और युद्धविराम पर समर्थकों का बंटवारा
यह विवाद केवल युद्ध के विरोध तक ही सीमित नहीं था. मार्क लेविन जैसे सैन्य कार्रवाई के समर्थकों ने आलोचना की कि ईरान में सत्ता परिवर्तन क्यों नहीं किया गया? वहीं, पूर्व रणनीतिकार स्टीव बैनन ने वॉर्निंग दी कि इस जंग का नतीजा केवल देश को अधिक लोकलुभावन और राष्ट्रवादी बनाने के रूप में निकलेगा.

ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया
वहीं ट्रंप अपने आलोचकों पर बरस पड़े. व्यक्तिगत हमले करते हुए उन्हें ‘मूर्ख’ करार दिया और ‘मुसीबत पैदा करने वाला’ बताया. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि कार्लसन, केली और ओवेन्स जैसे लोग ‘MAGA’ में शामिल नहीं हैं. वे लोग केवल मुफ्त प्रचार के लिए कुछ भी कह सकते हैं. उन्होंने कार्लसन को ‘कम आईक्यू वाला व्यक्ति’ और जोन्स को ‘दिवालिया’ तक करार दे डाला.

क्या है ये MAGA अभियान?
मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA), दरअसल अमेरिकी राजनीति को बदलने एक नारा है, जिसने जनआंदोलन का रूप ले लिया. यह केवल एक चुनावी स्लोगन नहीं, बल्कि एक ऐसा दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी आंदोलन बन चुका है जिसने अमेरिका की घरेलू और विदेश नीति की दिशा बदलकर रख दी है. यह डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में शुरू हुआ एक कैम्पेन है. इसका मुख्य मकसद अमेरिका को उसके गोल्डेन पीरियड में वापस ले जाना है. ट्रंप के समर्थक 20वीं सदी के मध्य काल को ऐसा समय मानते हैं, जब अमेरिका आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर था और दुनिया में कोई भी चुनौती उसके आगे नहीं थी. टैरिफ और इमिग्रेशन इस नीति के मुख्य आधार हैं.

क्या वैश्विक स्तर पर भी बढ़ रही हैं मुश्किलें?
ट्रंप की ईरान नीति ने यूरोप के दक्षिणपंथी नेताओं के साथ उनके संबंधों को भी तनावपूर्ण बना दिया है.

  • इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी हमलों के लिए इटैलियन अड्डों के उपयोग की अनुमति देने से इनकार कर दिया.
  • फ्रांस की मरीन ले पेन ने ट्रंप के युद्ध संबंधी लक्ष्यों को ‘अनिश्चित’ करार दिया.
  • जर्मनी की अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी पार्टी (AfD) ने अमेरिकी सैनिकों को अपने देश से वापस चले जाने के लिए कहा.

क्या कहते हैं आंकड़े?
जनता के बीच भी इस युद्ध को लेकर बेचैनी बढ़ रही है. सीएनएन ने 2 अप्रैल को पोल कराया, जिसमें सैन्य कार्रवाई के लिए समर्थन 41 प्रतिशत से गिरकर 34 प्रतिशत रह गया है. लोगों में असंतोष भी बढ़ रहा है. 66 फीसदी लोग युद्ध के खिलाफ हैं. वहीं डोनाल्ड टंप के कट्टर MAGA समर्थकों में से भी अधिकतर लोग ईरान में जमीनी हमला करने के खिलाफ हैं.



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