डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत से पहले मारी पलटी, ईरान से अब ये है डिमांड, बता दिया होर्मुज का भी प्लान


अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम को लेकर पाकिस्तान में होने वाली बातचीत को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ किसी भी बातचीत से पहले उनकी सबसे बड़ी और लगभग एकमात्र शर्त है कि तेहरान परमाणु हथियार न बनाए. उन्होंने साफ कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की कभी अनुमति नहीं दी जाएगी और यही उनकी प्राथमिकता का 99 प्रतिशत है.

ट्रंप वर्जीनिया के शार्लोट्सविले में ट्रंप वाइनरी में एक फंडरेजर कार्यक्रम में जा रहे थे. एयर फोर्स वन के पास पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘नो न्यूक्लियर वेपन. ये 99% बात है.’ ट्रंप ने दोहराते हुए कहा, ‘परमाणु हथियार नहीं बनेगा, यही नंबर वन प्राथमिकता है.’ उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को सैन्य रूप से हरा दिया गया है और अब कूटनीति का समय है.

होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप का प्लान

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ट्रंप ने कहा कि यह मुद्दा जल्द ही सुलझ जाएगा. उन्होंने कहा, ‘यह अपने आप खुल जाएगा. हम इसे खोल देंगे, चाहे उनके साथ या उनके बिना.’ उन्होंने यह भी कहा कि भले ही अमेरिका सीधे तौर पर इस रास्ते पर निर्भर नहीं है, लेकिन दुनिया के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग पर टिकी है, इसलिए इसे चालू कराना जरूरी है.

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव लंबे समय से वैश्विक चिंता का विषय रहा है. ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में एक्शन प्लान से अमेरिका को बाहर निकाल लिया था और तेहरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे. इसके बाद से दोनों देशों के बीच संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं.

हालिया घटनाक्रम ने इस टकराव को और गंभीर बना दिया है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए, जिनमें सैन्य ठिकानों और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत ने हालात को और ज्यादा विस्फोटक बना दिया.

इस्लामाबाद पर दुनिया की नजर

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के प्रतिनिधि के अनुसार, इस संघर्ष के चलते लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और बड़ी संख्या में आम नागरिकों की जान गई है. नागरिक इलाकों पर हमलों की भी रिपोर्ट सामने आई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है.

ऐसे माहौल में अब इस्लामाबाद में संभावित बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है. हालांकि ट्रंप के सख्त रुख से यह साफ है कि किसी भी समझौते की राह आसान नहीं होगी और परमाणु मुद्दा ही इस पूरे संकट का सबसे बड़ा केंद्र बना रहेगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पर लगातार हमलों के बाद अमेरिका अब कूटनीतिक रास्ता अपनाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि लंबे युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर बुरा असर पड़ रहा है.

अभी देखना यह होगा कि 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत में दोनों पक्ष कितनी लचीलापन दिखाते हैं और क्या वाकई स्थायी समझौते की दिशा में कोई प्रगति होती है.



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