who is king Strait of Hormuz | Israel-Iran War: हॉर्मुज की ‘नब्ज’ दबाकर दुनिया को झुकाने की तैयारी में ईरान, क्या आग का गोला बनेगा फारस की खाड़ी?


Iran mines Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट में तनाव इस कदर बढ़ गया है कि अब दुनिया की ‘आर्थिक लाइफलाइन’ कहे जाने वाले ‘स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) पर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं. ईरान ने बार-बार चेतावनी दी है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका पूरा नियंत्रण है और उसकी अनुमति के बिना यहां से परिंदा भी पर नहीं मार सकता. हाल ही में यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) के तट के पास एक ब्रिटिश कंटेनर जहाज पर हुए अज्ञात हमले ने इस दावे को और हवा दे दी है. हालांकि इस हमले की सीधी जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है, लेकिन रणनीतिकारों का मानना है कि यह ईरान की उसी चाल का हिस्सा है, जिससे वह अमेरिका और इजरायल को उनकी औकात दिखाना चाहता है.

ब्रिटिश जहाज पर हमला क्या एक ट्रेलर या चेतावनी?

यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, यूएई के पास एक मालवाहक जहाज को किसी अज्ञात हथियार से निशाना बनाया गया, जिससे वह आग के गोले में तब्दील हो गया. यह घटना उस समय हुई है जब हॉर्मुज में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला एक संदेश है कि अगर इजरायल या अमेरिका ने ईरान पर सीधा हमला किया, तो ईरान दुनिया की सबसे संवेदनशील समुद्री नस को दबा देगा.

क्यों दुनिया की नजर फारस की खाड़ी पर है?

वह नब्ज जो पूरी दुनिया को हिला सकती है

स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण चोक पॉइंट (Choke Point) है. यह ओमान और ईरान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है. दुनिया के कुल कच्चे तेल की खपत का करीब 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई का तेल यहीं से होकर एशिया, यूरोप और अमेरिका पहुंचता है.

भौगोलिक शक्ति

ईरान इस रास्ते के उत्तरी तट पर बैठा है. विशेषज्ञों की राय में ईरान की स्थिति यहां वैसी ही है जैसे एक छोटी सी चींटी हाथी के कान में घुसकर उसे गिरा दे. ईरान के पास हॉर्मुज को ब्लॉक करने की क्षमता है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें रातों-रात 200 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच सकती हैं.

ईरान की शतरंज वाली चाल

सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल से युद्ध लड़ने के बजाय अब ‘प्रॉक्सी’ और ‘इकोनॉमिक टेरर’ की रणनीति अपना रहा है. ईरान जानता है कि अगर उसने हॉर्मुज बंद किया तो अमेरिका में महंगाई आसमान छूने लगेगी और ट्रंप प्रशासन पर घरेलू दबाव बढ़ जाएगा.

ईरान हॉर्मुज का इस्तेमाल एक ‘इंश्योरेंस पॉलिसी’ की तरह कर रहा है. (फाइल फोटो : रॉयटर्स)

इजरायल की घेराबंदी

इजरायल के लिए समुद्री व्यापार बेहद जरूरी है. ईरान समर्थित हूतियों ने पहले ही लाल सागर को अशांत कर रखा है, अब हॉर्मुज पर दबाव बनाकर ईरान इजरायल की पूरी सप्लाई चेन काट देना चाहता है.

बातचीत की मेज पर ताकत

ईरान इस तनाव का उपयोग अमेरिका के साथ किसी भी भविष्य की डील में ऊपरी हाथ रखने के लिए कर रहा है. मिडिल ईस्ट मामलों के जानकारों की मानें तो ईरान हॉर्मुज का इस्तेमाल एक ‘इंश्योरेंस पॉलिसी’ की तरह कर रहा है. उसे पता है कि जब तक वह इस रास्ते को कंट्रोल करेगा, दुनिया उसे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर पाएगी. ब्रिटिश जहाज पर हमला इस बात की बानगी है कि समुद्र में अब कोई भी सुरक्षित नहीं है. वहीं, रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) आर. पी. सिंह का कहना है कि अमेरिका के लिए हॉर्मुज को खुला रखना उसकी साख का सवाल है. अगर ईरान इसे ब्लॉक करने की कोशिश करता है तो हम तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर होंगे क्योंकि अमेरिका अपनी पूरी नौसैनिक शक्ति यहां झोंक देगा.

कुलमिलाकर ईरान ने हॉर्मुज की नब्ज दबाकर यह साफ कर दिया है कि वह अमेरिका और इजरायल के दबाव में झुकने वाला नहीं है. ब्रिटिश जहाज का जलना महज एक हादसा नहीं, बल्कि उस बड़े तूफान का संकेत है जो आने वाले दिनों में फारस की खाड़ी में ग्लोबल ट्रेड को तबाह कर सकता है. अब गेंद अमेरिका और इजरायल के पाले में है क्या वे कूटनीति से इस ‘नब्ज’ को ढीला करवा पाएंगे या फिर हॉर्मुज की यह आग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगी?



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