क्या नहीं बढ़ेंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें? और कच्चे तेल में उछाल से घरेलू शेयर बाजार सहमा


कच्चे तेल में उछाल से घरेलू शेयर बाजार सहमा, सेंसेक्स 417 अंक फिसला

कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेज उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव में मंगलवार को घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट रही। सेंसेक्स 417 अंकों के नुकसान में रहा जबकि निफ्टी 97 अंक गिरकर बंद हुआ।

विश्लेषकों ने कहा कि मुख्य रूप से बैंक, वित्तीय एवं वाहन कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट से मानक सूचकांक नुकसान में रहे।

बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 416.72 अंक यानी 0.54 प्रतिशत गिरकर 76,886.91 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 562.57 अंक तक लुढ़ककर 76,741.06 तक पहुंच गया था।

वहीं, एनएसई का 50 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक निफ्टी 97 अंक यानी 0.40 प्रतिशत गिरकर 23,995.70 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स के समूह में शामिल 30 कंपनियों में से एक्सिस बैंक, एचसीएल टेक, इंटरग्लोब एविएशन, मारुति सुजुकी, भारतीय स्टेट बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।

इसके विपरीत, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल, टेक महिंद्रा और सन फार्मा के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजीत मिश्रा ने कहा, “अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता के जारी रहने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया और निवेशकों की धारणा पर असर पड़ा। इसके अलावा नियामकीय प्रावधानों के कारण बैंकों के शेयर भी दबाव में रहे।”

बीएसई पर सूचीबद्ध कुल 2,257 कंपनियों के शेयर गिरकर बंद हुए जबकि 1,998 कंपनियों में तेजी रही और 172 अन्य अपरिवर्तित रहे।

व्यापक बाजार में छोटी कंपनियों का बीएसई स्मालकैप सूचकांक 0.42 प्रतिशत की बढ़त पर रहा जबकि मझोली कंपनियों का मिडकैप सूचकांक 0.27 प्रतिशत की गिरावट में रहा।

क्षेत्रवार सूचकांकों में पीएसयू बैंक खंड में सर्वाधिक 2.20 प्रतिशत की सुस्ती रही जबकि बैंकेक्स 1.61 प्रतिशत गिर गया। निजी बैंकों के खंड में 1.23 प्रतिशत और वाहन खंड में 0.98 प्रतिशत की गिरावट रही।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख (संपत्ति प्रबंधन) सिद्धार्थ खेमका ने कहा, “आरबीआई ने बैंकों के लिए ‘प्रत्याशित ऋण ह्रास’ (ईसीएल) ढांचे को अप्रैल 2027 से लागू करने को अंतिम रूप दे दिया है। इस बदलाव के कारण निकट अवधि में बैंकों की वित्तीय प्रावधान की जरूरत बढ़ सकती है और मुनाफा भी दबाव में आ सकता है।”



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