कम बजट में चाहिए रॉयल ट्रिप? अलवर की ये खूबसूरत जगहें कम खर्च में देंगी यादगार छुट्टियों का शानदार अनुभव


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Alwar Tourist Places: अगर आप कम बजट में शानदार यात्रा का आनंद लेना चाहते हैं, तो राजस्थान का अलवर जिला आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. अरावली की वादियों में बसा अलवर प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहरों और रोमांचक पर्यटन स्थलों के लिए प्रसिद्ध है. यहां का बाला किला, सिलीसेढ़ झील, सिटी पैलेस और सरिस्का टाइगर रिजर्व पर्यटकों को खास आकर्षित करते हैं. अलवर में घूमने, खाने और ठहरने के लिए कई बजट फ्रेंडली विकल्प उपलब्ध हैं, जिससे कम खर्च में भी शानदार ट्रिप का आनंद लिया जा सकता है. प्रकृति प्रेमियों, इतिहास के शौकीनों और परिवार के साथ घूमने वालों के लिए यह एक आदर्श पर्यटन स्थल है. दिल्ली-एनसीआर और जयपुर से इसकी अच्छी कनेक्टिविटी इसे वीकेंड ट्रिप के लिए और भी खास बनाती है.

सिलीसेढ़ झील: अगर आप अलवर आएं हैं तो सिलीसेढ़ झील घूमने के लिए बेहतरीन जगह हो सकती है. मानसून में अरावली की पहाड़ियों के बीच फैली हरियाली यहां की खूबसूरती बढ़ा देती है. अलवर शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित यह झील पानी से लबालब भरी रहती है. यहां पर्यटक बोटिंग का आनंद ले सकते हैं और झील किनारे बने ऐतिहासिक लेक पैलेस होटल से प्राकृतिक नजारों का मजा उठा सकते हैं. शांत माहौल और खूबसूरत दृश्य इसे खास पिकनिक स्पॉट बनाते हैं.

सरिस्का टाइगर रिजर्व: अलवर का सरिस्का टाइगर रिजर्व घूमने में लाइटिंग करने के लिए एक अच्छा स्थान है. यहां पर आपको बाघों की दहाड़ सुनने और उनके शावकों की साइटिंग देखने को मिलेगी. हालांकि मानसून की दस्तक के साथ ही ‘सरिस्का टाइगर रिजर्व’ को आगामी 1 जुलाई से अगले तीन महीनों (जुलाई, अगस्त और सितंबर) के लिए पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया जाता है. ऐसे में अगर सरिस्का टाइगर रिजर्व घूमने आना है तो 1 जुलाई से पहले पहले सरिस्का आ सकते हैं. यहां पर बाघ-बाघिन और उनके शावकों की जबरदस्त साइटिंग देखने को मिलती है. सरिस्का में फिलहाल बाघों की कुल संख्या बढ़कर 54 हो गई, जिसमें 26 शावक है. इनकी सरिस्का के जंगल में लगातार साइटिंग देखने को मिलती है.

भानगढ़ का किला: अलवर के भानगढ़ का किला घूमने जाने से पहले समय का खास ध्यान रखने की आवश्यकता है. भानगढ़ किला अलवर शहर से लगभग 80–90 किलोमीटर दूर है. ऐसे में सड़क मार्ग से वहां पहुंचने में करीब 1.5 से 2 घंटे का समय लगता है. यहां पर पर्यटकों की एंट्री सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक होती है. सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किले में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है. जिले का भानगढ़ किला देश के सबसे चर्चित भूतिया स्थलों में गिना जाता है. अरावली की पहाड़ियों के बीच बना यह किला अपनी ऐतिहासिक वास्तुकला और रहस्यमयी कहानियों के लिए प्रसिद्ध है. मान्यता है कि तांत्रिक के श्राप के कारण यह नगर उजड़ गया. दिन में पर्यटक इसकी खूबसूरती देखने आते हैं, जबकि रात में यहां अजीब आवाजें और रहस्यमयी घटनाओं की चर्चाएं लोगों को रोमांचित करती हैं.

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मूसी महारानी की छतरी: अलवर के सिटी पैलेस के बाहर सागर जलाशय के पास स्थित मूसी महारानी की छतरी ऐतिहासिक और स्थापत्य कला का सुंदर उदाहरण है. इसका निर्माण महाराजा विनय सिंह ने 1815 ई. में महाराजा बख्तावर सिंह और रानी मूसी की स्मृति में करवाया था. मान्यता है कि रानी मूसी अपने पति की चिता पर सती हो गई थीं. दो मंजिला इस स्मारक का निचला भाग लाल पत्थर और ऊपरी भाग सफेद संगमरमर से बना है. इसकी छतों पर सुंदर पौराणिक चित्र और नक्काशी देखने को मिलती है. सूर्योदय और सूर्यास्त के समय इसकी सुंदरता और भी आकर्षक दिखाई देती है. साल भर देशी व विदेशी पर्यटक यहां घूमने के लिए आते हैं. कई फिल्मों की शूटिंग सहित काफी प्री वेडिंग शूट भी यहां हो चुकी है.

बाला किला: राजस्थान अपने ऐतिहासिक किलों और महलों के लिए प्रसिद्ध है. अलवर की अरावली पहाड़ियों पर स्थित बाला किला करीब 700 साल पुराना है और अपनी शानदार वास्तुकला के लिए जाना जाता है. हालांकि इसे अलवर का ‘कुंवारा किला’ भी कहा जाता है, क्योंकि इतिहास में यह कभी जीता नहीं गया. करीब 8 किलोमीटर में फैले इस किले का निर्माण हसन खान मेवाती ने 1551 ईस्वी में करवाया जिसको कायमखानी शैली में बनाया गया. बने इस किले की दीवारों में दुश्मनों पर हमला करने के लिए 500 से अधिक बड़े छेद बनाए गए थे. किले से पूरा अलवर शहर का सुंदर दृश्य दिखाई देता है. यहां पर पर्यटक जमकर फोटो खींचते हैं.

सिटी पैलेस: अलवर शहर में स्थित सिटी पैलेस घूमने के लिए अच्छी जगह है. यहां पर पैलेस की आकर्षक डिजाइन फोटोग्राफी के लिए शानदार जगह है. करीब 250 साल पुराना अलवर का सिटी प्लेस जैसे राजा बख्तावर सिंह ने बनवाया था. हालांकि अलवर में इसे विनय विलास पैलेस के नाम से भी जाना जाता है. सिटी पैलेस की दीवारें, छत की भित्तिचित्र और दर्पण का काम इस महल की खासियत है और इसकी शोभा को दोगुना करते हैं. यह महल मुगल और राजस्थानी डिजाइन्स की झलक दिखाता है.

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