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Iran Missile News: ईरान के साथ बढ़ते सैन्य संघर्ष ने अमेरिका के अत्याधुनिक हथियारों के भंडार पर दबाव बढ़ा दिया है. इसी बीच अमेरिकी सेना ने 30 साल से ज्यादा समय बाद पहली बार पैट्रियट PAC-2 GEM-T इंटरसेप्टर मिसाइलों का नया ऑर्डर दिया है. रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान और मध्य पूर्व में लगातार मिसाइल हमलों का जवाब देने में बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर खर्च हुए हैं.
Patriot PAC-2 GEM-T पैट्रियट मिसाइल.
US Missile Stock: ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष का असर अब अमेरिका के हथियारों के भंडार पर साफ दिखने लगा है. हालात ऐसे बन गए हैं कि अमेरिकी सेना को 30 साल से ज्यादा समय बाद फिर से पुरानी लेकिन भरोसेमंद Patriot PAC-2 GEM-T इंटरसेप्टर मिसाइलें खरीदनी पड़ रही हैं. PAC-3 की कमी है. इसे सिर्फ एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि अमेरिका के घटते मिसाइल स्टॉक की बड़ी चेतावनी माना जा रहा है. द वार जोन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन ने पुष्टि की है कि उसे अमेरिकी सेना से तीन दशक बाद पहली बार नए PAC-2 GEM-T इंटरसेप्टर बनाने का घरेलू ऑर्डर मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में दिया गया करीब 441.6 मिलियन डॉलर का यह कॉन्ट्रैक्ट ईरान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी से जुड़ा है.
यह फैसला ऐसे समय आया है जब CBS News ने अमेरिकी सैन्य और खुफिया अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिका जितनी तेजी से Patriot, THAAD और दूसरी हाई-एंड मिसाइलें इस्तेमाल कर रहा है, उतनी तेजी से उनका उत्पादन नहीं हो पा रहा. अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा रफ्तार लंबे समय तक बनाए रखना संभव नहीं है और इससे अमेरिका की सैन्य तैयारी पर दबाव बढ़ रहा है.
मंत्री का दावा बनाम अधिकारियों की चिंता
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि अमेरिका के हथियारों का भंडार मजबूत है और लगातार बढ़ रहा है. लेकिन CBS न्यूज की रिपोर्ट में गुमनाम अधिकारियों ने अलग तस्वीर पेश की है. उनका कहना है कि रक्षा उद्योग इतनी तेजी से नई मिसाइलें नहीं बना पा रहा, जितनी तेजी से वे ईरान और मध्य पूर्व में खर्च हो रही हैं.
चीन को लेकर भी बढ़ी चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के सामने सिर्फ ईरान की चुनौती नहीं है. सैन्य अधिकारियों को यह भी चिंता है कि अगर इसी रफ्तार से हथियार खर्च होते रहे तो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन जैसी संभावित चुनौती से निपटने की तैयारी प्रभावित हो सकती है. अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल पापारो पहले ही अप्रैल में कह चुके हैं कि टॉमहॉक और JASSM जैसी मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाने में एक से दो साल लग सकते हैं.
क्यों अहम है PAC-2 की वापसी?
Patriot सिस्टम में आज सबसे आधुनिक PAC-3 इंटरसेप्टर इस्तेमाल होते हैं, लेकिन PAC-2 GEM-T अब भी बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में प्रभावी मानी जाती है. मौजूदा Patriot लॉन्चर दोनों तरह की मिसाइलें एक साथ दाग सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना कई वर्षों से सिर्फ PAC-3 खरीद रही थी. लेकिन अब 30 साल बाद PAC-2 का नया ऑर्डर इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका उपलब्ध हर विकल्प से अपने मिसाइल भंडार को तेजी से भरना चाहता है. हैरानी की बात यह है कि एक PAC-2 GEM-T इंटरसेप्टर की कीमत भी करीब 20 लाख डॉलर (19.3 करोड़ रुपये) मानी जाती है, जबकि अत्याधुनिक PAC-3 MSE की कीमत 53 लाख डॉलर प्रति मिसाइल है. यानी हर इंटरसेप्टर करोड़ों रुपये का पड़ रहा है.
सिर्फ अमेरिका नहीं, पूरी दुनिया पर असर
पैट्रियट मिसाइलों की भारी मांग का असर दूसरे देशों पर भी पड़ा है. यूक्रेन में युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों के कारण कई सहयोगी देशों की डिलीवरी प्रभावित हुई है. स्विट्जरलैंड को पैट्रियट सिस्टम की सप्लाई टालनी पड़ी, जबकि जर्मनी, जापान, पोलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे देशों को भी संभावित देरी की चेतावनी दी गई है.
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Yogendra Mishra holds a degree in Journalism from the University of Allahabad. He has been actively associated with the media industry since 2017 and brings extensive experience across various domains of journa…
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