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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सीजफायर बढ़ाने का ऐलान कर दिया है. सीजफायर की मियाद खत्म होने से ठीक पहले उन्होंने सीजफायर बढ़ाने का ऐलान कर दिया. ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के कहने पर उन्होंने इसे बढ़ाया है, ताकि ईरान को सोचने-समझने का समय मिले. लेकिन असल वजह यह भी है कि उनके पास हथियारों की कमी है.
अमेरिका के पास हुई हथियारों की कमी.
वॉशिंगटन: अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के साथ युद्धविराम को बढ़ा दिया है. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि पाकिस्तान के पीएम के आग्रह पर उन्होंने ऐसा किया है. लेकिन ट्रंप जो दिखाना चाहते हैं, चीजें उतनी साफ नहीं हैं. बल्कि वह अमेरिका ऐसा करके अमेरिका की इज्जत बचाने में लगे हैं. क्योंकि जो रिपोर्ट्स अब सामने आ रही हैं, वह ट्रंप की कमजोरी दिखाती हैं. ईरान के साथ सात हफ्तों तक चले युद्ध के बाद अमेरिका की सैन्य ताकत को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है. इस जंग में अमेरिका ने अपने सबसे अहम मिसाइल जखीरे का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है, जिससे भविष्य में किसी बड़े युद्ध की स्थिति में जोखिम बढ़ सकता है.
अमेरिका को किन-किन हथियारों की हुई कमी?
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के विश्लेषण और CNN की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने इस युद्ध के दौरान अपने प्रिसीजन स्ट्राइक मिसाइल का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल कर लिया. इसके अलावा THAAD मिसाइलों का कम से कम आधा और पैट्रियट एयर डिफेंस मिसाइलों का लगभग 50 प्रतिशत जखीरा भी इस युद्ध में चला चुका है. इतना ही नहीं, अमेरिका ने अपने टॉमहॉक मिसाइलों का करीब 30 प्रतिशत, लंबी दूरी के जॉइंट एयर टूसरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल का 20 प्रतिशत और SM-3 तथा SM-6 मिसाइलों का भी लगभग 20 प्रतिशत इस्तेमाल कर लिया है.
एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति अमेरिका के लिए एक ‘खतरनाक खिड़की’ पैदा करती है, खासकर पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में, जहां चीन जैसे बड़े प्रतिद्वंद्वी का खतरा बना हुआ है. CSIS के विशेषज्ञ और पूर्व अमेरिकी मरीन कर्नल मार्क कैंशियन के मुताबिक, ‘इतनी भारी मात्रा में हथियारों के इस्तेमाल से अमेरिका की सैन्य तैयारी पर असर पड़ा है. इन स्टॉक को भरने में 1 से 4 साल लग सकते हैं, जबकि पूरी क्षमता वापस पाने में और ज्यादा समय लगेगा.’
क्या ईरान के खिलाफ लड़ सकता है युद्ध?
रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल अमेरिका के पास इतना जखीरा है कि वह ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रख सकता है, अगर सीजफायर टूटता है. लेकिन अगर चीन जैसे किसी बड़े देश के साथ टकराव होता है, तो मौजूदा हथियारों का स्टॉक पर्याप्त नहीं होगा. अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सेना के पास अभी भी जरूरत के हिसाब से पर्याप्त संसाधन हैं और वह किसी भी समय कार्रवाई करने के लिए तैयार है.
ट्रंप को पहले ही दी थी चेतावनी
हालांकि इससे पहले भी अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि लंबा युद्ध हथियारों के भंडार को प्रभावित कर सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले ही जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने ट्रंप प्रशासन को इस खतरे के बारे में आगाह किया था. इस बीच, अमेरिका ने मिसाइल उत्पादन बढ़ाने के लिए कई नए कॉन्ट्रैक्ट साइन किए हैं, लेकिन इन हथियारों की आपूर्ति में 3 से 5 साल तक का समय लग सकता है. राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर चिंता जताई जा रही है. अमेरिकी सीनेटर मार्क केली ने कहा कि ईरान के पास बड़ी मात्रा में ड्रोन और मिसाइलें हैं, ऐसे में सवाल यह है कि अमेरिका अपने एयर डिफेंस सिस्टम को कैसे और कब तक दोबारा भर पाएगा.
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योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें





