US Military Testosterone Test: Operator Syndrome News | US Army News Hindi- कमजोरी नहीं चलेगी! अमेरिकी सेना में अब होगी टेस्टोस्टेरोन स्क्रीनिंग


वाशिंगटन: अमेरिकी सेना में अब 30 साल की उम्र पार करते ही एक नई स्वास्थ्य जांच अनिवार्य होगी. रक्षा विभाग पेंटागन ने फैसला किया है कि 30 साल या उससे अधिक उम्र के सभी सक्रिय ड्यूटी और रिजर्व सैन्यकर्मियों की नियमित टेस्टोस्टेरोन की कमी की स्क्रीनिंग की जाएगी. इस कदम का मकसद सिर्फ बीमारी पकड़ना नहीं, बल्कि सैनिकों की युद्ध क्षमता, शारीरिक ताकत और मानसिक फिटनेस को लंबे समय तक बनाए रखना है. पेंटागन का कहना है कि यह फैसला सैन्य तैयारियों को और मजबूत बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. विभाग का मानना है कि कई सैनिकों में लंबे समय तक कठिन प्रशिक्षण और लगातार ऑपरेशनल दबाव के कारण ऐसी समस्याएं विकसित हो जाती हैं, जिन्हें वह ‘ऑपरेटर सिंड्रोम’ के नाम से पहचानता है. लेकिन सवाल है कि क्या महिला सैनिकों की भी यह टेस्टिंग होगी? पेंटागन इस पर चुप है.

टेस्टोस्टेरोन क्या है?

टेस्टोस्टेरोन एक स्टेरॉयड हार्मोन है, जिसे सामान्य तौर पर ‘मेल सेक्स हार्मोन’ कहा जाता है. हालांकि यह असल में पुरुष और महिला दोनों के शरीर में मौजूद होता है. बस मात्रा में बहुत फर्क होता है. पुरुषों में यह ज्यादा होता है तो वहीं महिलाओं में कम होता है.

पेंटागन ने ऐसा क्यों किया?

दरअसल ऑपरेटर सिंड्रोम से ग्रस्त सैनिकों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने, लगातार थकान और ऊर्जा की कमी, मांसपेशियों की ताकत और सहनशक्ति में गिरावट, नींद से जुड़ी समस्याएं, याददाश्त और एकाग्रता में कमी, तनाव, चिंता या अवसाद जैसे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी लक्षण और रिकवरी में अधिक समय लगने जैसे समस्याएं नजर आ सकती हैं. इसी को ध्यान में रखकर पेंटागन ने यह फैसला किया है.

नई पॉलिसी की घोषणा स्थानीय समयानुसार बुधवार को की गई और पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा कि रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने परफॉर्मेंस को ऑप्टिमाइज करने, ऑपरेटर सिंड्रोम से निपटने और मिशन की तैयारी को मैक्सिमाइज करने के लिए एक बेहतर स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल का निर्देश दिया था.

टेस्टोस्टेरोन टेस्ट किन लोगों का होगा?

पेंटागन के प्रवक्ता पार्नेल ने कहा, ‘तत्काल प्रभाव से 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी सक्रिय ड्यूटी और रिजर्व सैन्य कर्मियों की उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान टेस्टोस्टेरोन की कमी की अनिवार्य स्क्रीनिंग की जाएगी. 30 साल से कम आयु के सैन्यकर्मी भी यदि चाहें, तो अपनी पीरियोडिक हेल्थ असेसमेंट के दौरान यह जांच करा सकते हैं.’

अमेरिकी युद्ध मंत्री ने दी इजाजत

पेंटागन ने कहा कि यह पहल ऐसी तत्पर, घातक और युद्ध के मैदान में निर्णायक बढ़त हासिल करने में सक्षम सैन्य शक्ति तैयार करने और बनाए रखने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो ताकत के जरिए शांति के उद्देश्य को पूरा कर सके. पार्नेल के अनुसार, बेहतर स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल डिपार्टमेंट के वॉरफाइटर परफॉर्मेंस ऑप्टिमाइजेशन-टोटल फोर्स फिटनेस प्रोग्राम को पूरा करता है और फोर्स के स्वास्थ्य, अच्छे प्रदर्शन और लचीलेपन में लगातार निवेश को दिखाता है. उन्होंने कहा कि यह प्रोटोकॉल डिपार्टमेंट को एक पूरी बेसलाइन बनाने और टारगेटेड टेस्टोस्टेरोन थेरेपी देने में मदद करेगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि यह एक स्वास्थ्य, काबिल और पूरी तरह से असरदार फाइटिंग फोर्स बनाए रखे.

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इससे जुड़े ज्ञापन पर साइन किया. इसमें कहा गया है कि यह नीति तत्काल प्रभाव से लागू होगी. इसके तहत 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी सैन्यकर्मियों के लिए पीरियोडिक हेल्थ असेसमेंट (पीएचए) के दौरान टेस्टोस्टेरोन की कमी की जांच अनिवार्य होगी. वहीं, 30 वर्ष से कम आयु के सैन्यकर्मी अपनी इच्छा से यह जांच करा सकेंगे. ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि ‘पूरे सैन्य बल में ‘ऑपरेटर सिंड्रोम’ के उपचार से मिले अनुभवों को लागू करते हुए लक्षित टेस्टोस्टेरोन थेरेपी सीधे तौर पर सैनिकों की युद्धक क्षमता और तत्परता को बेहतर बनाती है.’

(एजेंसी/IANS इनपुट के साथ.)



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