USS Abraham Lincoln News: चीन के सबसे प्रसिद्ध जनरल सुन जू ने अपनी किताब आर्ट ऑफ वार में लंबे समय तक सेना की किसी मोर्चे पर तैनाती को लेकर लिखा कि ये देश के लिए नुकसानदायक है. इससे सरकार के संसाधन ही खर्च होते हैं और सेना का जोश ठंडा हो जाता है. लेकिन शायद डोनाल्ड ट्रंप के जनरलों ने उन्हें इसके बारे में आगाह नहीं किया है. ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध को छह महीने होने वाले हैं. भले ही युद्ध रुका हुआ है, लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं निकल पाने से लगातार ट्रंप की सेना की तैनाती चल रही है. यही कारण है कि अमेरिकी डिफेंस फोर्सेस में सब ठीक नहीं चल रहा है. अमेरिकी नौसेना के सबसे बड़े युद्धपोतों में शामिल USS लिंकन पर तैनात हजारों जवानों की हालत को लेकर अब खुलकर सवाल उठने लगे हैं. ईरान युद्ध के बीच लंबी तैनाती, खराब हालात और मानसिक दबाव ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि सैनिकों के परिवार खुद सामने आकर नेवी से जवाब मांग रहे हैं.
259 दिन तैनाती, 208 दिन लगातार समंदर में
USS लिंकन 21 नवंबर को अमेरिका के सैन डिएगो से रवाना हुआ था और अब तक 259 दिन तैनात रह चुका है. इस दौरान जहाज सिर्फ दो बार रुका, जिसमें 7 जुलाई को ओमान की एक छोटी यात्रा शामिल है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जहाज पर मौजूद 5,000 नाविक और मरीन 208 दिन लगातार समुद्र में रहे. यही आंकड़ा अब पूरे विवाद का सबसे बड़ा कारण बन गया है.
परिवारों ने नेवी अफसरों को घेरा
अनादोलू एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक सैन डिएगो में गुरुवार को करीब 200 परिवारों ने नेवी के कार्यवाहक सचिव हुंग काओ से सीधा सवाल किया. यह सामान्य स्थिति नहीं मानी जाती, क्योंकि सैनिकों के परिवार वाले आमतौर पर सार्वजनिक तौर पर इस तरह खुलकर विरोध नहीं करते. परिवारों ने थकान, मानसिक स्वास्थ्य, खाने-पीने की कमी, पानी की गुणवत्ता, टूटे बाथरूम, सुरक्षा और मेल डिलीवरी में देरी जैसे मुद्दे उठाए.
हालात कैसे हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक जहाज पर टूटे टॉयलेट, पानी में गंदगी की आशंका और शावर में फफूंद जैसी समस्या सामने आई है. नेवी अधिकारियों ने माना कि एक इलाके में पाइप में जाम के कारण टॉयलेट प्रभावित हुए थे और जो फफूंद दिख रही है, वह वेंटिलेशन की समस्या से बनी नमी हो सकती है. सप्लाई की स्थिति भी खराब रही. खाने-पीने का सामान, पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स और मेल की डिलीवरी प्रभावित हुई. वाइस एडमिरल डगलस वेरिसिमो ने माना कि बहरीन के जरिए सप्लाई चेन में भारी बैकलॉग बना, खासकर लड़ाई शुरू होने के बाद. उन्होंने कहा, ‘अब स्थिति बेहतर हो रही है, लेकिन अभी भी ठीक नहीं है. कुछ समय के लिए हालात बेहद खराब थे.’
कब लौटेंगे, कोई जवाब नहीं
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह तैनाती कब खत्म होगी. नेवी ने बताया कि USS थियोडोर रूजवेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को मिडिल ईस्ट भेजने की तैयारी हो रही है, जो लिंकन की जगह ले सकता है. लेकिन वापसी की कोई तारीख नहीं दी गई. कारण बताया गया ‘ऑपरेशनल सिक्योरिटी’.
क्या यह बगावत का संकेत है?
हालात को देखकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिकी सेना के अंदर बगावत हो रही है. हाल ही में अमेरिकी सेना में कई बड़े अधिकारियों को हटाया गया है, जिनमें लेफ्टिनेंट जनरल चार्ल्स कोस्टांजा भी शामिल हैं. वह अपने कार्यकाल खत्म होने से करीब दो महीने पहले ही हटा दिए गए. इसके अलावा सेना में बड़े स्तर पर फेरबदल भी हुए हैं, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि अंदरूनी दबाव बढ़ रहा है.




