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Sagar Tourist Spot: अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं और जंगल, पहाड़, नदियों तथा पक्षियों से लगाव रखते हैं तो रानगिर आपके लिए बेहतरीन जगह है. अध्यात्म और संस्कृति में रुचि रखने वालों के लिए यह एक पावन स्थल है. यहां आस्था और पर्यटन का अनूठा संगम देखने को मिलता है. परिवार के साथ ट्रिप पर आने के लिए यह स्थान बेहद खूबसूरत है. यहां बिताए लम्हे हमेशा के लिए यादगार बन जाते हैं.
वर्तमान में मानसून की विदाई का समय चल रहा है. इस मौसम में जंगल और पहाड़ियां हरे-भरे पेड़ों से ढकी नजर आती हैं. जंगल और पहाड़ के बीचो-बीच लगभग 100 फीट की गहराई में देहार नदी कल-कल बहती है. नदी के किनारे और पहाड़ियों पर प्राचीन मंदिर स्थित हैं. यह मनोरम दृश्य श्रद्धालुओं को ओंकारेश्वर की याद दिला देता है. यहां की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक माहौल मन को शांति प्रदान करते हैं.
रानगिर क्षेत्र को अब एक प्रमुख पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यह क्षेत्र किसी हिल स्टेशन की तरह दिखाई देगा. इस विकास योजना से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ जाएंगी. यहां दो माता मंदिर स्थित हैं, जो इस क्षेत्र को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र बनाते हैं. एक बेहतरीन पर्यटन स्थल बनने के लिए यहां सभी जरूरी प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं.
घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां, देहार नदी और बड़ी-बड़ी चट्टानें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं. मां के दर्शन करने के बाद श्रद्धालु यहां की पहाड़ियों में घूमते हैं. यहां एक नए पुल का निर्माण कार्य भी चल रहा है. पुल बन जाने से दोनों ओर के लोगों का आवागमन बहुत सुलभ हो जाएगा. इसके बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में बड़ा इजाफा होगा.
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रानगिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बहुत गहरा है. इस स्थान का इतिहास बुंदेलखंड के राजा छत्रसाल और बाजीराव पेशवा के संबंधों से जुड़ा हुआ है. 17वीं शताब्दी में महाराजा छत्रसाल ने बुंदेलखंड के कई गढ़ बाजीराव पेशवा को सौंप दिए थे. बाजीराव पेशवा ने इनमें से यह इलाका गोविंद राव खेर को सौंपा था.
गोविंद राव खेर की वंशज रानी लक्ष्मी बाई ने रहली के रानगिर में हरसिद्धि माता मंदिर का निर्माण कराया था. इस प्राचीन हरसिद्धि माता मंदिर को निर्मित हुए लगभग 300 साल हो चुके हैं.रानगिर पहुंचने के लिए वर्तमान में दो प्रमुख रास्तों का उपयोग किया जाता है. पहला मार्ग सागर-रहलीज स्टेट हाईवे पर स्थित 5 मील चौराहे से जाता है. यहां से यह स्थल 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.
दूसरा मार्ग नेशनल हाईवे 44 पर स्थित सुरखी तिराहे से जाता है. सुरखी तिराहे से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी तय करके यहां पहुंचा जा सकता है. इसके अलावा एक तीसरा मार्ग भी बरौदा से बंसिया होते हुए तैयार किया गया है. इस तीसरे रास्ते पर फिलहाल पुल का निर्माण कार्य अधूरा है. जैसे ही यह पुल बनकर तैयार होगा, लोग तीसरे मार्ग से भी आ-जा सकेंगे. नया रास्ता शुरू होने से इस क्षेत्र के और अधिक विकसित होने की संभावना है.




