उधर, रोहिणी आचार्य ने रविवार को एक्स पर लिखा, “जनादेश की पीठ में खंजर, स्वार्थ के लिए लोकतंत्र का सौदा।” उन्होंने कहा कि मतदाताओं ने निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनकर भेजा था, लेकिन जीत के बाद उनका भाजपा के साथ जाना जनादेश के साथ सीधा धोखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं के लिए निजी और राजनीतिक स्वार्थ सर्वोपरि है। इस घटनाक्रम ने बिहार में एनडीए के भीतर आपसी समन्वय और गठबंधन धर्म को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
आईएएनएस के इनपुट के साथ




