NASA Swift telescope: अंतरिक्ष में नासा के बूढ़े योद्धा स्विफ्ट टेलीस्कोप को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है. यह उपग्रह पृथ्वी पर गिरने की कगार पर है. लिहाजा इसे बचाने के लिए नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन मोटे खर्च वाला बचाव अभियान शुरू कर रहा है.
नासा का कहना है कि वह अपने बूढ़े स्विफ्ट टेलीस्कोप को खोना नहीं चाहता है. यह बेहद महत्वपूर्ण है और बेहद जरूरी सूचनाएं नासा तक पहुंचाता है. यही वजह है कि नासा अपने बूढ़े स्विफ्ट टेलीस्कोप को पृथ्वी पर गिरने से बचाने के लिए 300000000000 डॉलर खर्च करने जा रहा है.
बता दें कि स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी एक ऐसा उपग्रह है जो ब्रह्मांड में गामा-रे बर्स्ट (सबसे शक्तिशाली विस्फोट) और अन्य ब्रह्मांडीय घटनाओं का अध्ययन करता है और उसकी जानकारी नासा के वैज्ञानिकों को भेजता है.
स्विफ्ट को 2004 में लॉन्च किया गया था. अब यह नीचे गिर रहा है क्योंकि उसकी सोलर पैनल्स की बैटरी कमजोर हो गई है. इसे जल्दी से ऊंची कक्षा में भेजना जरूरी है, वरना यह पृथ्वी के वायुमंडल में जलकर खत्म हो जाएगा.
अब इसको पृथ्वी पर गिरने से बचाने के लिए नासा ने कैटालिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज को स्विफ्ट को ऊंची कक्षा में ले जाने के लिए बूस्टर देने का काम सौंपा है.
स्विफ्ट क्यों डूब रहा है?
बता दें कि 2004 में लॉन्च होने के बाद स्विफ्ट की बैटरी कमजोर हो गई है. तेज सौर गतिविधि के कारण इसे ऊंची कक्षा में ले जाना जरूरी है. लिहाजा नासा ने 30 हजार करोड़ रुपये खर्च कर स्विफ्ट को ऊंची कक्षा में ले जाने के लिए एक विमान से लॉन्च होने वाले रॉकेट का इस्तेमाल करने का फैसला किया है.
कैसे बचेगा स्विफ्ट
नासा स्विफ्ट को बचाने के लिए पेगासस रॉकेट का इस्तेमाल करेगा. यह पहला ऐसा मिशन होगा जिसमें एक पुराने उपग्रह को बचाने के लिए स्पेस रॉबोट या स्पेसक्राफ्ट भेजा जाएगा. स्विफ्ट अभी भी अच्छी तरह काम कर रहा है और ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली विस्फोटों का पता लगा रहा है.
सिर्फ स्विफ्ट नहीं ये सैनानी भी खतरे में
स्विफ्ट की तरह ही नासा का हबल टेलीस्कोप भी उम्रदराज हो चुका है. 36 साल पुराना हबल भी वायुमंडल में गिरने का खतरा झेल रहा है.
क्या बोले वैज्ञानिक
नासा के विज्ञान प्रमुख निक फॉक्स का कहना है, “स्विफ्ट हमें बहुत महत्वपूर्ण जानकारी देता है. हम इसे खोना नहीं चाहते.”
यह मिशन अक्टूबर में पूरा होने की उम्मीद है. स्विफ्ट को सितंबर तक वापस लौटना पड़ सकता है, इसलिए बचाव अभियान जल्दी शुरू किया जा रहा है.




