उधर नंद देवी, इधर कीवी के खेत, बीच में लीती…बागेश्वर का ये गांव धरती का स्वर्ग, कैसे पहुंचे?


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Bageshwar ki local news : बागेश्वर जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर लीती गांव को नामिक ग्लेशियर का प्रवेश द्वार माना जाता है. नामिक ग्लेशियर की ओर जाने वाले ट्रैकिंग प्रेमियों के लिए यह गांव पड़ाव की तरह है. लोकल 18 से लीती के रहने वाले लक्ष्मण सिंह कोरंगा बताते हैं कि गांव से नंदा देवी और नंदा घुंघटी जैसी चोटियां साफ दिखाई देती हैं. लीती गांव की एक और पहचान यहां होने वाली कीवी की खेती है. गांव की जलवायु कीवी उगाने के लिए अनुकूल हैं. ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गांव की 30 महिलाओं ने मिलकर होम स्टे शुरू किया है.

बागेश्वर. उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का लीती गांव अब ग्रामीण पर्यटन के नक्शे पर अपनी अलग पहचान बना रहा है. कपकोट विकासखंड में स्थित यह गांव प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और पहाड़ी संस्कृति के कारण पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है. समुद्र तल से करीब 1800 से 2000 मीटर की ऊंचाई पर बसे लीती गांव से हिमालय की बर्फीली चोटियों का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है. लोकल 18 से स्थानीय निवासी लक्ष्मण सिंह कोरंगा बताते हैं कि गांव से नंदा देवी और नंदा घुंघटी जैसी प्रसिद्ध चोटियों के सुंदर नजारे पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. सुबह के समय जब सूरज की किरणें बर्फ से ढकी चोटियों पर पड़ती हैं, तो पूरा क्षेत्र बेहद खूबसूरत दिखाई देता है. शहरों की भागदौड़ से दूर, शांत वातावरण और स्वच्छ हवा पर्यटकों को सुकून देती है. बागेश्वर जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लीती गांव को नामिक ग्लेशियर का प्रवेश द्वार भी माना जाता है. नामिक ग्लेशियर की ओर जाने वाले पर्यटकों और ट्रैकिंग प्रेमियों के लिए यह गांव महत्वपूर्ण पड़ाव बन सकता है. यहां से आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लिया जा सकता है.

करीब से समझने का मौका

लीती गांव की एक और खास पहचान यहां होने वाली कीवी की खेती है. गांव की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां कीवी उत्पादन के लिए अनुकूल मानी जाती हैं. स्थानीय किसान पारंपरिक खेती के साथ बागवानी की ओर भी बढ़ रहे हैं, जिससे उनकी आय के नए साधन विकसित हो रहे हैं. ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गांव की करीब 30 महिलाओं ने मिलकर होम स्टे शुरू किए हैं. इन होम स्टे के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय लोगों के घरों में ठहरने, पहाड़ी खान-पान का स्वाद लेने और स्थानीय संस्कृति को करीब से समझने का अवसर मिलता है. महिलाओं की इस पहल से गांव में रोजगार के अवसर बढ़े हैं, और परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगी है.

अनोखा संगम

होम स्टे संचालक पर्यटकों को स्थानीय व्यंजन, पहाड़ी जीवनशैली और पारंपरिक आतिथ्य से परिचित करा रहे हैं. इससे पर्यटकों को होटल की सुविधाओं के साथ गांव के वास्तविक जीवन का अनुभव भी मिलता है. पर्यटन को बेहतर सुविधाओं, सड़क संपर्क और प्रचार-प्रसार से और बढ़ावा दिया जा सकता है. लीती गांव में ग्रामीण पर्यटन की संभावनाएं रोजगार सृजन और पलायन रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं. प्राकृतिक सौंदर्य, हिमालयी दृश्य, कीवी की खेती और पहाड़ी संस्कृति का अनोखा संगम लीती गांव को भविष्य के एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित कर रहा है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

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