Mega Tsunami Alaska 2025: 481-Meter Wave Hits Tracy Arm Fjord, Research Details | अलास्का मेगा सुनामी 2025: 481 मीटर ऊंची लहर ने मचाई तबाही


अलास्का की खूबसूरत वादियों में पिछले साल कुछ ऐसा हुआ, जिसकी भनक किसी को न लगी. अगस्त 2025 में यहां एक ‘मेगा सुनामी’ आई थी, जिसकी ऊंचाई भारत के कुतुब मीनार से 6 गुना ज्यादा थी. ताज्जुब की बात यह है कि जब यह भयानक लहर समुद्र से टकराई, तो किसी को कानो-कान खबर तक नहीं हुई. अब वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट डेटा और रिसर्च के जरिए इस प्रलय की पूरी कहानी दुनिया के सामने रखी है. जर्नल ‘साइंस’ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, यह लहर 481 मीटर (1,578 फीट) ऊंची थी. दिल्ली के कुतुब मीनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है, यानी यह सुनामी उससे कहीं ज्यादा विशाल थी. यह घटना 10 अगस्त 2025 की सुबह करीब 5:30 बजे अलास्का के ट्रेसी आर्म फ्योर्ड (Tracy Arm Fjord) में हुई थी. रिसर्चर इसे ‘नियर मिस’ डिजास्टर कह रहे हैं, क्योंकि अगर यह कुछ घंटे बाद आती, तो वहां मौजूद हजारों टूरिस्ट की जान जाना तय था.

सुनामी आने की असली वजह क्या थी?

इस महाविनाशक लहर के पीछे कोई भूकंप नहीं, बल्कि एक विशाल लैंडस्लाइड यानी भूस्खलन था. दक्षिण सॉयर ग्लेशियर के तेजी से पिघलने की वजह से उसके ऊपर मौजूद पहाड़ कमजोर हो गया था. अचानक पहाड़ का एक बहुत बड़ा हिस्सा, जो करीब 6.4 करोड़ क्यूबिक मीटर था, सीधे समुद्र में गिर गया. इतनी भारी मात्रा में मलबा गिरने से पानी में भारी उथल-पुथल हुई और एक विशालकाय लहर पैदा हो गई. यह लहर 250 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा की रफ्तार से आगे बढ़ी थी.

किसी को इस घटना का पता क्यों नहीं चला?

ट्रेसी आर्म फ्योर्ड एक रिमोट एरिया है, जहां सिर्फ क्रूज शिप और कायकर्स जाते हैं. जिस समय लैंडस्लाइड हुआ, उस वक्त वहां कोई जहाज मौजूद नहीं था. सूरज निकलने से पहले ही इस तबाही ने अपना काम कर दिया था. जब वैज्ञानिकों ने बाद में सैटेलाइट तस्वीरों की जांच की, तो उन्हें पहाड़ों पर पेड़ों और हरियाली के गायब होने के निशान मिले. सुनामी की लहरों ने पहाड़ों को 481 मीटर की ऊंचाई तक पूरी तरह से नंगा कर दिया था.

24 घंटे तक पानी में क्यों होता रहा कंपन?

इस घटना का सबसे अजीब पहलू इसका कंपन था. वैज्ञानिकों ने पाया कि लहर टकराने के बाद समुद्र का पानी किसी बाल्टी की तरह एक तरफ से दूसरी तरफ हिलता रहा. इसे साइंस की भाषा में ‘सेइचे’ (Seiche) कहा जाता है. इस हरकत की वजह से पूरी दुनिया के सीस्मोग्राफ पर करीब 36 घंटे तक हल्का कंपन दर्ज किया गया. यह कंपन हर 66 सेकंड के अंतराल पर हो रहा था. इससे पता चलता है कि वह सुनामी कितनी शक्तिशाली थी.

क्या भविष्य में बढ़ेगा ऐसी लहरों का खतरा?

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन इस खतरे को और बढ़ा रहा है. जैसे-जैसे ग्लेशियर पिघल रहे हैं, पहाड़ों को मिलने वाला सहारा खत्म हो रहा है. इससे लैंडस्लाइड की घटनाएं बढ़ रही हैं. अलास्का की यह घटना 1958 के बाद दर्ज की गई दूसरी सबसे ऊंची सुनामी है. आने वाले समय में अगर ऐसी लहरें दिन के समय आती हैं, तो यह टूरिस्ट जहाजों के लिए काल साबित हो सकती हैं.



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