IT शेयरों में बिकवाली से घरेलू बाजार धड़ाम, सेंसेक्स 893 अंक लुढ़का, रुपया भी कमजोर


डॉलर में तेज़ी के बीच दिल्ली में सोना 3,000 रुपये सस्ता हुआ, चांदी 10,500 रुपये टूटी

विदेशी बाजारों में डॉलर के मजबूत होने से राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने की कीमतें 3,000 रुपये टूटकर 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गईं, जबकि चांदी 10,500 रुपये लुढ़ककर दो महीने से ज्यादा के निचले स्तर पर आ गई।

अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 3,000 रुपये या दो प्रतिशत घटकर 1,49,300 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गई।

सोना आखिरी बार 27 मार्च को इस स्तर के आसपास रहा था, जब इसकी कीमत 1,47,800 रुपये प्रति 10 ग्राम थी।

चांदी पर भी बिकवाली का असर पड़ा और यह 10,500 रुपये या 4.3 प्रतिशत टूटकर 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गई, जो दो महीने से ज्यादा समय में इसका सबसे निचला स्तर है। चांदी तीन अप्रैल को 2,37,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक-जिंस सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘मंगलवार को घरेलू बाजारों में सोने की कीमतें कम रहीं क्योंकि मजबूत डॉलर और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों का कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है।’’

कोटक सिक्योरिटीज में जिंस शोध की एवीपी, कायनात चैनवाला ने कहा, ‘‘सोमवार को कीमती धातुओं में थोड़ी बढ़त देखी गई थी क्योंकि अमेरिका-ईरान बातचीत में प्रगति का असर कच्चे तेल पर पड़ा था, लेकिन यह बढ़त ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई क्योंकि ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें फिर से हावी हो गईं।’’

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना 70.33 डॉलर या लगभग दो प्रतिशत टूटकर 4,121.10 डॉलर प्रति औंस रह गया, जबकि चांदी चार प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 62.27 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।

विश्लेषकों ने कहा कि मजबूत डॉलर कीमती धातुओं के लिए मुख्य बाधा बनकर उभरा है।

मिराए एसेट शेयरखान में जिंस प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा, ‘‘अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की चिंताओं के कारण जिंसों पर दबाव है, इसलिए हाजिर सोने की कीमत लगभग दो प्रतिशत टूटकर 4,120 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई।’’

लगातार छठे सत्र में बढ़त के साथ डॉलर इंडेक्स 101.15 के स्तर पर पहुंच गया, जो मई, 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कारोबारी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें और बढ़ाने की संभावना को ध्यान में रख रहे हैं।



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