ड्रैगन के खिलाफ भारत बना ‘मजबूत दीवार’, इंडो-पैसिफिक में चीन की दादागिरी खत्म, अमेरिका ने बनाया खास हथियार


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ड्रैगन के खिलाफ भारत बना ‘मजबूत दीवार’, इंडो-पैसिफिक में चीन की दादागिरी खत्म

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अमेरिकी कमांडर ने इंडो-पैसिफिक रीजन में पल रहे बहुत बड़े खतरे से दुनिया को सरेआम आगाह किया है. पपारो ने कहा, “पार्टनरशिप ही अमेरिका की रणनीति का सबसे बड़ा आधार है. भारत को पाकिस्तान के साथ भी लगातार बहुत भारी तनाव का सामना करना पड़ता है. इसके बावजूद भारत पूरे रीजन में अपनी कड़ी युद्धक क्षमता पर भारी फोकस कर रहा है.”

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अमेरिकी कमांडर ने कहा कि इंडो-पैसिफिक रणनीति के लिए भारत अहम है. (फाइल फोटो)

वॉशिंगटन. भारत, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन का मुकाबला करने की अमेरिकी रणनीति में एक अहम स्तंभ के तौर पर उभर रहा है. अमेरिकी सेना के शीर्ष नेतृत्व ने भारत के साथ बढ़ते रक्षा संबंधों और तालमेल को खास तौर पर रेखांकित किया है. अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल जॉन पपारो ने इस हफ्ते सांसदों से कहा कि भारत के साथ संबंध उनकी प्राथमिकता है. उन्होंने इस रिश्ते को लगातार ऊपर की ओर बढ़ता हुआ बताया और इसे अपनी सबसे सक्रिय सैन्य साझेदारियों में से एक कहा.

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई, जब वॉशिंगटन चीन की बढ़ती सैन्य ताकत पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय साझेदारों के साथ संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. पपारो ने कहा कि ‘मेजर डिफेंस पार्टनरशिप’ (प्रमुख रक्षा साझेदारी) ढांचे के तहत, अमेरिका-भारत सुरक्षा संबंधों में लगातार जटिल होते जा रहे सैन्य अभ्यासों, रक्षा सौदों और रणनीतिक बातचीत के जरिए जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है.

उन्होंने समुद्री सुरक्षा और पानी के नीचे की गतिविधियों की जानकारी जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग की ओर इशारा किया. इसमें विदेशी सैन्य बिक्री के जरिए भारत की ओर से एमक्यू-9बी ड्रोन खरीदने की योजना भी शामिल है. पपारो ने भारत को इस क्षेत्र में स्थिरता लाने वाली ताकत बताया. उन्होंने कहा कि भारत दक्षिण एशिया के भीतर स्थिरता का एक स्रोत बना हुआ है. साथ ही, हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारियों और रक्षा सहयोग को भी मजबूत कर रहा है. उन्होंने भारत की बढ़ती क्षेत्रीय भूमिका का भी जिक्र किया. इसमें श्रीलंका में किया गया निवेश और मॉरीशस के साथ किए गए समझौते शामिल हैं, जिनका मकसद समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना और यह सुनिश्चित करना है कि रणनीतिक बुनियादी ढांचा विरोधी ताकतों के प्रभाव से मुक्त रहे.

इंडो-पैसिफिक कमांडर ने ‘क्वाड’ जैसे बहुपक्षीय समूहों में भारत की भागीदारी को भी रेखांकित किया. इस समूह में भारत के साथ-साथ अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं. यह समुद्री सुरक्षा तथा लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार कर रहा है. उन्होंने कहा, “मालाबार जैसे सैन्य अभ्यास, जिनमें ये चारों देश शामिल होते हैं, इस क्षेत्र में आपसी तालमेल बनाने और संयुक्त सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिहाज से बेहद अहम बन गए हैं.”

पपारो ने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका की रणनीति का मूल आधार उसकी साझेदारियां हैं. उन्होंने इन गठबंधनों और साझेदारियों को वॉशिंगटन का सबसे बड़ा असंतुलित लाभ बताया. उन्होंने यह भी कहा कि भारत को पाकिस्तान के साथ लगातार तनाव का सामना करना पड़ता है और हाल के सैन्य टकराव पारंपरिक रूप से विवादित क्षेत्रों से आगे तक फैल गए हैं. इसके बावजूद, उन्होंने कहा कि भारत का मुख्य ध्यान इस पूरे क्षेत्र में अपनी निवारक क्षमता और विश्वसनीय युद्धक क्षमता को बनाए रखने पर केंद्रित है. हालांकि, इंडो-पैसिफिक कमांडर ने चेतावनी दी कि चीन की हरकतें और रूस व उत्तर कोरिया के साथ उसके गहरे होते संबंध, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक जटिल चुनौती पेश करते हैं.

इंडो-पैसिफिक कमांडर के अलावा, अमेरिकी सांसदों ने भी बीजिंग के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए भारत के साथ साझेदारी को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया. प्रतिनिधि एडम स्मिथ ने कहा कि इस क्षेत्र में प्रतिरोध और विश्वसनीयता के लिए गठबंधन बहुत जरूरी हैं. उन्होंने कहा, “हमें उन संबंधों को बनाए रखने की जरूरत है. हमें उन लोगों को यह बताने की जरूरत है कि हम उनके साथ हैं और वे हम पर भरोसा कर सकते हैं.”

गौरतलब है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन गया है, क्योंकि चीन अपने सैन्य आधुनिकीकरण की गति बढ़ा रहा है और पूरे क्षेत्र में अपनी मौजूदगी का विस्तार कर रहा है. अमेरिका ने भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे साझेदारों के साथ संबंधों को मजबूत करके इसका जवाब दिया है, जिसमें ‘क्वाड’ के माध्यम से किया गया प्रयास भी शामिल है. इसके अलावा संयुक्त सैन्य अभ्यास व रक्षा सहयोग का भी विस्तार किया गया है.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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