उत्तराखंड के देहरादून से करीब 90 किलोमीटर दूर, 7 हजार फीट की ऊंचाई पर बसा चकराता एक बेहद खूबसूरत और शांत हिल स्टेशन है. देवदार के घने जंगलों से घिरे इस क्षेत्र का इतिहास जितना सुंदर है, इसका पौराणिक महत्व भी उतना ही गहरा है. साहित्यकार मनोज इष्टवाल के अनुसार महाभारत काल में इस जगह को चक्रनगरी या एकचक्र कहा जाता था. पहाड़ों से घिरी विशेष भौगोलिक बनावट के कारण इसे एक सुरक्षित दायरा माना जाता था. लाक्षागृह की साजिश से बचने के बाद, पांडवों ने माता कुंती के साथ अपने अज्ञातवास का करीब एक महीना यहीं भेष बदलकर बिताया था. कहा जाता है कि यहां की एक गुफा में बकासुर नाम का क्रूर राक्षस रहता था, जो हर दिन भारी भोजन और एक इंसान की बलि लेता था. तब महाबली भीम ने उस राक्षस का वध करके नगरवासियों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी. अंग्रेजों ने इसके रणनीतिक महत्व और बेहतरीन मौसम को देखते हुए इसे ब्रिटिश सैन्य छावनी के रूप में विकसित किया. आज भी इसका बड़ा हिस्सा भारतीय सेना के नियंत्रण में है. अगर आप प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताना चाहते हैं तो चकराता की सैर जरूर करें.




