पहले ना, फ‍िर हां… जेडी वेंस के पाक‍िस्‍तान जाने पर इतना कंफ्यूजन क्‍यों, क्‍या ट्रंप जाने वाले थे इस्‍लामाबाद


कुछ देर पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि सुरक्षा कारणों से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान नहीं जाएंगे. लेकिन अब व्हाइट हाउस ने इस पूरे मामले में यू-टर्न मार ल‍िया. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने आधिकारिक तौर पर यह साफ कर दिया है कि ईरान के साथ होने वाली शांति वार्ता के अगले दौर में हिस्सा लेने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान जाएंगे. उनके साथ राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर भी होंगे. कहीं, इसके पीछे ट्रंप का इस्‍लामाबाद प्‍लान तो नहीं.

जब सीएनएन ने व्हाइट हाउस के एक अधिकारी से पूछा कि अभी तो आपके बॉस यानी ट्रंप साहब कह रहे थे कि वेंस नहीं जाएंगे, फिर ये अचानक क्या हो गया? इस पर अधिकारी ने बस दो शब्दों में कहा- ‘चीजें बदल गई हैं’. ये ‘चीजें’ कैसे बदलीं, किसने बदलीं और क्या पर्दे के पीछे कोई बड़ी डील हो गई है, यह अभी एक गहरा राज बना हुआ है.

कहां से आया कंफ्यूजन

इस पूरे कन्फ्यूजन की जड़ डोनाल्ड ट्रंप का वो इंटरव्यू है जो उन्होंने ‘एमएस नाउ’ को दिया था. ट्रंप ने उस बातचीत में साफ कहा था कि सीक्रेट सर्विस चौबीस घंटे के नोटिस पर सुरक्षा की गारंटी नहीं ले सकती, इसलिए जेडी वेंस का पाकिस्तान जाना कैंसिल कर दिया गया है. ट्रंप के इस बयान से भारी कूटनीतिक भ्रम फैल गया था कि आखिर इस्लामाबाद में होने वाली इस महा-बैठक में अमेरिका की तरफ से नुमाइंदगी करेगा कौन? ट्रंप ने बस इतना कहकर बात खत्म कर दी थी कि कल शाम तक उनके ‘प्रतिनिधि’ वहां पहुंच जाएंगे. लेकिन अब व्हाइट हाउस के ऐलान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका ईरान के साथ इस डील को लेकर कितना गंभीर है और अपने सबसे बड़े मोहरों को इस्लामाबाद के मैदान में उतार रहा है.

लेकिन कहानी में ट्विस्ट सिर्फ इतना ही नहीं है. सीएनएन की रिपोर्ट ने इस पूरे वीवीआईपी मूवमेंट के पीछे सीक्रेट सर्विस के एक बेहद कड़े और दिलचस्प नियम का भी खुलासा किया है. दरअसल, सीक्रेट सर्विस की पॉलिसी यह कहती है कि अमेरिका के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति एक ही समय पर एक ही जगह मौजूद नहीं होने चाहिए. खासकर जब बात किसी ऐसे इलाके की हो जहां तनाव चल रहा हो या सुरक्षा का भारी खतरा हो, जैसे कि अभी का मिडिल ईस्ट और पाकिस्तान. तो यह नियम और भी सख्त हो जाता है. यह सिर्फ विदेशी दौरों के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका के अंदरूनी दौरों पर भी लागू होता है, ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में देश का नेतृत्व एक साथ खतरे में न पड़े.

तो क्‍या ट्रंप जाने वाले थे इस्‍लामाबाद

अब इस नियम का इस्लामाबाद की इस नेगोशिएशन से क्या लेना-देना है? दरअसल, ट्रंप पहले ही यह इशारा कर चुके हैं कि अगर ईरान के साथ कोई ‘फाइनल डील’ यानी पक्का समझौता होता है, तो वो खुद इस समझौते पर मुहर लगाने के लिए इस्लामाबाद जा सकते हैं. अब सीक्रेट सर्विस का प्रोटोकॉल कहता है कि अगर ट्रंप की इस्लामाबाद में एंट्री होती है, तो उसी वक्त जेडी वेंस को पाकिस्तान छोड़कर फौरन अमेरिका वापस लौटना पड़ेगा. यानी दोनों टॉप लीडर इस्लामाबाद की जमीन पर एक साथ मौजूद नहीं रह सकते.

दूसरी बार जाएंगे इस्‍लामाबाद

जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर की यह तिकड़ी कोई पहली बार पाकिस्तान का रुख नहीं कर रही है. करीब एक हफ्ते पहले भी ईरान के साथ पहले दौर की बातचीत के लिए ये तीनों इस्लामाबाद में ही मौजूद थे. उस वक्त कई दिनों की माथापच्ची के बावजूद कोई नतीजा नहीं निकला था और वो वार्ता बिना किसी शांति समझौते के ही खत्म हो गई थी. अब यह नया दौर शुरू होने जा रहा है, और इस बार दांव और भी बड़ा है.

अब यह है कि अमेरिका की तरफ से टीम फाइनल हो गई है, इस्लामाबाद का मैरियट होटल सज गया है, सुरक्षा के नाम पर पूरे शहर को किले में बदल दिया गया है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी हवा में तैर रहा है कि क्या होर्मुज की नाकेबंदी से खफा ईरान इस बातचीत की मेज तक आएगा? दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका के इस भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल के सामने ईरान अपना कौन सा पत्ता फेंकता है.



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