दत्तात्रेय ने यूएस को दिया करारा जवाब, कहा- भारत केवल सपेरों-साधुओ का देश नहीं, अब बन चुका है ग्‍लोबल हब


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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दत्तात्रेय होसबोले ने अमेरिका में आरएसएस को लेकर फैली गलतफहमियों का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि भारत केवल सपेरों और साधुओं का देश नहीं है, बल्कि देश अब एक टेक हब बन चुका है. इसी का परिणाम है कि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. आरएसएस का उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और राष्ट्र को एकजुट बनाए रखना है.

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हडसन इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित ‘न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में बोल रहे थे दत्तात्रेय.

नई दिल्‍ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दत्तात्रेय होसबोले ने अमेरिका में आरएसएस को लेकर फैली गलतफहमियों का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि भारत केवल सपेरों और साधुओं का देश नहीं है, बल्कि देश अब एक टेक हब बन चुका है. इसी का परिणाम है कि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.

हडसन इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित ‘न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में बोलते हुए होसबोले ने कहा कि अमेरिका और पश्चिमी देशों में भारत की एक पुरानी छवि बनी हुई है. लोग अभी भी भारत को गरीबी, गंदगी और सपेरों वाला देश समझते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह धारणा पूरी तरह गलत है. आज भारत एक आधुनिक, प्रगतिशील और तेजी से विकास कर रही अर्थव्यवस्था है.

होसबोले ने स्पष्ट किया कि आरएसएस अमेरिका के श्‍वेत वर्चस्ववादी संगठन ‘कु क्लक्स क्लान’ का भारतीय संस्करण नहीं है. आरएसएस एक स्वैच्छिक जन आंदोलन है, जो भारत की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक मूल्यों से प्रेरित है. इसका मुख्य उद्देश्य अच्छा चरित्र, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी वाले स्वयंसेवक तैयार करना है.उन्होंने बताया कि आरएसएस देशभर में रोजाना और साप्ताहिक शाखाओं का आयोजन करता है.

इन शाखाओं के माध्यम से स्वयंसेवकों में राष्ट्रहित, सामाजिक एकता और सेवा भावना विकसित की जाती है. होसबोले ने कहा कि शाखाओं का उद्देश्य केवल वैचारिक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि ‘मानव सामाजिक पूंजी’ का निर्माण करना है.आरएसएस सरकार्यवाह ने यह भी कहा कि संगठन हिंदू पहचान और भारतीय संस्कृति को मजबूत करने के साथ ही पूरे समाज के विकास पर काम करता है. उन्होंने अल्पसंख्यकों और हिंदू पहचान को लेकर पश्चिमी दुनिया में फैली भ्रांतियों को भी दूर करने की कोशिश की.यह कार्यक्रम वाल्टर रसेल मीड के साथ एक सत्र में हुआ, जिसमें होसबोले ने आरएसएस के जमीनी कार्यों और राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला.

सेवा कार्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि आरएसएस के स्वयंसेवक आपदा के दौरान राहत और बचाव के कामों में आगे रहते हैं. बाढ़, भूकंप या अन्य संकट के समय संगठन के कार्यकर्ता बिना किसी भेदभाव के लोगों की मदद करते हैं. इसके अलावा, स्वयंसेवकों ने देशभर में करीब 40 स‍िविल इंस्‍टीट्यूशन बनाए हैं, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक डेवलपमेंट के लिए बेहतर काम कर रहे हैं. होसबोले ने जोर देकर कहा कि आरएसएस का उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और राष्ट्र को एकजुट बनाए रखना है. संगठन की एक्टिविटी जमीनी स्तर पर समाज को मजबूत करने और लोगों को जोड़ने का काम कर रही हैं.

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Sharad Pandeyविशेष संवाददाता

करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें



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