American Rich People Building Plan-B: ईरान और अमेरिका के बीच जंग की वजह से तबाही केवल शिया मुल्क में ही नहीं आई है. ईरान को तो बर्बादी झेलनी पड़ ही रही है, लेकिन ऐसा नहीं है कि इस जंग की आग से अमेरिका पूरी तरह सुरक्षित है. भविष्य में किसी अनहोनी की आशंका के कारण अमेरिका का सबसे अमीर तबका अपने लिए दूसरे ठिकाने की तलाश कर रहा है. इसके लिए वह बेशुमार धन भी खर्च कर रहा है. यह हम नहीं बल्कि दुनिया के एक प्रतिष्ठित अखबार फाइनेशियल टाइम्स की रिपोर्ट में ये बातें कही गई है. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के सबसे अमीर लोग इन दिनों दुनिया के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले देशों में से एक न्यूजीलैंड में दूसरा आशियाना बना रहे हैं. अमेरिकियों में इस देश के प्रति दीवानगी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिलिकॉन वैली के अमीर निवेशकों के बीच न्यूजीलैंड का पासपोर्ट अब एक तरह का ‘स्टेटस सिंबल’ बनता जा रहा है.
अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकत है. उसके पास अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली है, दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा बजट है और दर्जनों देशों में उसके सैन्य ठिकाने हैं. इसके बावजूद जब देश के सबसे अमीर कारोबारी और निवेशक अपने लिए हजारों किलोमीटर दूर दूसरा ठिकाना तलाशने लगें, तो यह केवल निवेश की कहानी नहीं रह जाती. यह भविष्य की अनिश्चितताओं को लेकर बढ़ती चिंता की कहानी भी बन जाती है. हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया का संघर्ष, ईरान के साथ बढ़ता तनाव और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता ने दुनिया के संपन्न वर्ग की सोच बदल दी है. अब वे केवल पैसा कमाने की जगह नहीं, बल्कि ऐसा देश भी चाहते हैं जहां किसी बड़े वैश्विक संकट की स्थिति में सुरक्षित रहा जा सके. इसको लेकर दुनिया की
क्यों अमेरिका छोड़ रहे अमीर लोग
यह समझना जरूरी है कि अमेरिकी अरबपति स्थायी रूप से अमेरिका छोड़कर नहीं जा रहे. उनका कारोबार, कंपनियां और निवेश अब भी अमेरिका में ही हैं. लेकिन वे अपने लिए एक प्लान-बी तैयार कर रहे हैं. न्यूजीलैंड सरकार के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 14 महीन में 700 से ज्यादा अमीर विदेशी निवेशकों ने वहां के गोल्डन वीजा कार्यक्रम के तहत आवेदन किया है. इनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी अमेरिकी नागरिकों की है. अकेले 277 आवेदन अमेरिका से आए हैं और इनमें भी कैलिफोर्निया के निवेशकों की संख्या सबसे अधिक है.
सिलिकॉन वैली के निवेशकों का मानना है कि आज की दुनिया में केवल संपत्ति होना काफी नहीं है. जरूरत पड़ने पर सुरक्षित देश में रहने का अधिकार भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है. यही वजह है कि न्यूजीलैंड का पासपोर्ट अब उनके लिए एक तरह की सुरक्षा कवच की तरह देखा जा रहा है. कुछ निवेशक खुलकर यह भी स्वीकार कर चुके हैं कि दुनिया तेजी से बदल रही है. ऐसे में उनका हर डॉलर कहीं भी निवेश किया जा सकता है. यदि कोई देश बेहतर सुरक्षा, बेहतर जीवन और बेहतर अवसर देगा तो पूंजी भी उसी दिशा में जाएगी.
न्यूजीलैंड को ही क्यों बना रहे ठिकाना
सवाल उठता है कि आखिर न्यूजीलैंड में ऐसा क्या है, जो अमेरिका के सबसे अमीर लोगों को अपनी ओर खींच रहा है?
- पहली वजह उसकी भौगोलिक स्थिति है. न्यूजीलैंड दुनिया के बड़े संघर्ष क्षेत्रों से हजारों किलोमीटर दूर है. न वह किसी बड़े सैन्य गठबंधन का केंद्र है और न ही वैश्विक तनाव का प्रत्यक्ष हिस्सा. इसलिए संकट के समय इसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है.
- दूसरी वजह वहां की राजनीतिक स्थिरता है. छोटी आबादी, कम अपराध दर, साफ-सुथरा प्रशासन और बेहतर जीवन गुणवत्ता इसे दुनिया के सबसे शांत देशों में शामिल करती है.
- तीसरी वजह वहां का प्राकृतिक वातावरण है. पहाड़, झीलें, साफ हवा और कम भीड़भाड़ वाला जीवन लंबे समय से दुनिया के अरबपतियों को आकर्षित करता रहा है.
क्वीन्सटाउन जैसे शहर पहले ही कई अरबपतियों का पसंदीदा ठिकाना बन चुके हैं. स्थानीय लोग तो मजाक में इन्हें पहाड़ियों में सोने वाले अरबपति तक कहने लगे हैं.
कितना खर्च
न्यूजीलैंड ने हाल ही में अपने गोल्डन वीजा कार्यक्रम के नियम आसान किए हैं. अब कोई विदेशी निवेशक कम से कम 50 लाख न्यूजीलैंड डॉलर का निवेश कर वहां स्थायी रूप से रहने, काम करने और पढ़ाई का अधिकार हासिल कर सकता है. दूसरी श्रेणी में 1 करोड़ न्यूजीलैंड डॉलर तक के निवेश का विकल्प भी मौजूद है. यह निवेश सरकारी बॉन्ड, स्थानीय कंपनियों, फंड या दूसरे स्वीकृत क्षेत्रों में किया जा सकता है. सरकार ने संपत्ति खरीद, निवेश और वहां रहने से जुड़े कई नियमों में भी ढील दी है. इसी का नतीजा है कि आवेदन करने वालों की संख्या कुछ ही महीनों में कई गुना बढ़ गई. रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2025 के बाद से उत्तर अमेरिका, यूरोप और एशिया के निवेशक करीब 4.8 अरब न्यूजीलैंड डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जता चुके हैं.
न्यूजीलैंड को क्या होगा फायदा?
यह योजना केवल अमीर लोगों को बसाने के लिए नहीं बनाई गई है. न्यूजीलैंड सरकार का मकसद विदेशी पूंजी और वैश्विक अनुभव को अपनी अर्थव्यवस्था से जोड़ना है. प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन का कहना है कि इन निवेशकों के साथ केवल पैसा नहीं, बल्कि नई तकनीक, कारोबारी अनुभव और वैश्विक नेटवर्क भी देश में आ रहे हैं. इसका फायदा स्टार्टअप, खनिज, कृषि और नई तकनीक आधारित उद्योगों को मिल रहा है. यही वजह है कि सिलिकॉन वैली के कई बड़े निवेशक अब न्यूजीलैंड के स्टार्टअप में भी पैसा लगा रहे हैं.
बदल रही है दुनिया के अमीरों की सोच
एक समय था जब दुनिया के सबसे अमीर लोग केवल न्यूयॉर्क, लंदन या दुबई जैसे शहरों में निवेश को प्राथमिकता देते थे. अब तस्वीर बदल रही है. सुरक्षा, राजनीतिक स्थिरता, प्राकृतिक संसाधन और संकट के समय सुरक्षित रहने की क्षमता भी निवेश के बड़े पैमाने बन चुके हैं. यही वजह है कि अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के कई अरबपति भी अपने लिए दूसरा आशियाना तैयार कर रहे हैं. वे अमेरिका छोड़ नहीं रहे, लेकिन यह जरूर सुनिश्चित कर रहे हैं कि अगर भविष्य में दुनिया किसी बड़े संकट में फंसती है तो उनके पास रहने के लिए एक ऐसा ठिकाना हो, जहां युद्ध की आंच शायद कभी न पहुंचे.




