Bathing tips: क्या आप बिना कपड़ों के स्नान करते हैं? नहाने से जुड़ी इन बातों को जान लेंगे तो फिर कभी नहीं करेंगे ये काम


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हर दिन हम सभी स्नान करते हैं. गर्मियों में स्नान किए बिना तो रहा भी नहीं जा सकता है. स्नान करने का सबका अपना-अपना तरीका होता है. कोई सुबह तो कोई दोपहर तो कोई शाम में नहाना पसंद करता है. कुछ लोग कपड़े पहने ही नहाते हैं तो अधिकतर लोग बिना कपड़ों के स्नान करते हैं. हर चीज को करने का एक सही तरीका, नियम, समय होता है. स्नान करने का सही तरीका, समय क्या है, कैसे किसी को नहाना चाहिए, कपड़े में या बिना कपड़ों में? यहां जानिए नहाने से संबंधित कुछ मजेदार बातें…

हम सभी हर दिन खाते हैं, घूमते-फिरते हैं, ऑफिस जाते हैं, ठीक उसी तरह से खुद की हाइजीन का ख्याल रखते हुए नहाते भी हैं. दिन भर की दिनचर्या में नहाना भी एक सबसे महत्वपूर्ण काम है. हालांकि, कम समय होने के कारण कुछ लोग तो जल्दी-जल्दी नहा कर निकल जाते हैं. आमतौर पर लोग कपड़े उतार कर नहाते हैं. खासकर, जब आप अपने बाथरूम में होते हैं, लेकिन नदी-तालाब में नहाते वक्त काफी लोग शर्म, झिझक के कारण कपड़े पहने ही स्नान कर लेते हैं.

हमारे पूर्वजों और वैदिक ग्रंथों में स्नान के बारे में काफी कुछ कहा गया है. यहां से आप स्नान से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं.

जब ऑफिस सुबह ही जाना होता है, तो काफी लोग सुबह उठते ही सबसे पहले ब्रश करने के बाद फटाफट स्नान कर लेते हैं. कुछ लोग तो ऐसे भी होते हैं, जो बिना स्नान किए किचन में नहीं जाते हैं. नहाने का मतलब है साफ-सफाई. ऐसा कहा जाता है कि नहाने से शरीर हल्का होता है.

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आमतौर पर 100 में से 95 लोग कपड़े उतार कर ही स्नान करते हैं. इससे सही तरीके से आप शरीर पर साबुन लगा सकते हैं. बिना कपड़ों के नहाने से शरीर को अच्छी तरह से साफ करने में आसानी होती है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यूड यानी कपड़े पूरी तरह से स्नान करने से कुछ समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. कुछ लोगों का मानना ​​है कि लंबे समय तक बिना कपड़ों के स्नान करने से घर में बुरी आत्माएं आ सकती हैं. कुछ बुजुर्गों के अनुसार, बिना कपड़ों के नहाने से व्यक्ति के मन और घर पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

इसके अलावा, ऐसा भी कहा जाता है कि बिना कपड़ों के स्नान करना देवी लक्ष्मी के लिए शुभ नहीं होता. इससे आर्थिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ता है, इसलिए शरीर पर किसी प्रकार का कपड़ा बांधकर स्नान करने की सलाह दी जाती है.

इस तरह स्नान करने के पीछे एक और कहानी है. कृष्ण द्वारा गोपियों को चिढ़ाने के लिए कपड़े चुराने की कहानी तो आपने भी सुनी होगी. कहा जाता है कि इसका अर्थ यह है कि नग्न होकर स्नान नहीं करना चाहिए. एक और बात ये है कि पुराने समय में शौचालय नहीं होते थे, इसलिए बाहर आप बिना कपड़ों के नहीं ना सकते.

एक और दिलचस्प जानकारी ये सामने आती है कि पहले के जमाने में बड़े-बड़े बाथरूम नहीं हुआ करते थे, लोग छोटे से कमरे में नहाते थे. सुविधा ना होने, ग्राउंड पर घर बने होने से शौचालय, बाथरूम में सांप, कीड़ों के घुसने का खतरा रहता था, इसलिए उन्हें कम कपड़े पहनकर नहाने की सलाह दी जाती थी. अब, चूंकि घरों में बाथरूम होते हैं, इसलिए इस प्रथा का पालन लोग नहीं करते और कपड़ों के बिना नहाते हैं.

बिना कपड़ों के स्नान करने से अचानक कोई आपातकालीन स्थिति आ जाए तो तुरंत बाहर निकलना संभव नहीं होता. खासकर, जब आप कहीं बाहर, किसी रिश्तेदार, होटल, रिसॉर्ट्स आदि में हों. ऐसे में कुछ ना कुछ छोटा सा कपड़ा, टॉवल आदि में ही नहाना चाहिए. पहले से कपड़े पहनकर स्नान करना बेहतर है.

धार्मिक या पारंपरिक मान्यताओं में शरीर को ढक कर स्नान करने की सलाह दी जाती है. इसका कारण लज्जा, संस्कार या निजता की भावना हो सकता है, न कि कोई वैज्ञानिक या सेहत संबंधित कोई खतरा. पहले के समय में लोग खुले स्थानों जैसे नदियों, तालाबों में नहाते थे, इसलिए कपड़े पहनना सामाजिक रूप से जरूरी माना जाता था. आप घर के बाथरूम में नहाते हैं तो बिना कपड़ों के स्नान करना बिल्कुल सामान्य, सुरक्षित और अधिक स्वच्छ तरीका है. कपड़े पहनकर नहाना परंपरा या व्यक्तिगत सोच का मामला है. यह कोई जरूरी नियम नहीं.

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