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Anil Kochhar Education Loan Gift: भारतीय-अमेरिकी अनिल कोचर ने नॉर्थ कैरोलिना यूनिवर्सिटी के 176 स्टूडेंट्स का एजुकेशन लोन चुकाने का ऐलान कर सबको चौंका दिया. अपने पिता प्रकाश चंद कोचर की याद में दिया यह तोहफा स्टूडेंट्स को कर्जमुक्त होकर सपने पूरे करने की आजादी देगा.
Anil Kochhar: अनिल कोचर ने पिता के नाम पर 100 से ज्यादा बच्चों का लोन खुद चुकाने का ऐलान किया है
यह सिर्फ पैसों की मदद नहीं थी, बल्कि उन स्टूडेंट्स के सपनों को दी गई ऐसी उड़ान थी, जिस पर अब कर्ज का कोई बोझ नहीं होगा. abc13.com की रिपोर्ट के अनुसार, अनिल कोचर ने अपने पिता प्रकाश चंद कोचर की याद में यह ऐतिहासिक उपहार दिया. उन्होंने कहा, वह चाहते हैं कि ये स्टूडेंट्स आज जब इस हॉल से बाहर निकलें तो उनके पास न केवल एक डिग्री हो, बल्कि अपने लक्ष्यों को पाने और रिस्क लेने की पूरी आजादी भी हो. यह एक बेटे की अपने पिता की विरासत को सलाम करने की अनोखी कोशिश थी.
अनिल कोचर की एक घोषणा से बदल गई स्टूडेंट्स की दुनिया
नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी (NC State) के विल्सन कॉलेज ऑफ टेक्सटाइल्स में 8 मई का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. समारोह के मुख्य वक्ता अनिल कोचर ने अपने भाषण के दौरान जैसे ही यह कहा कि वह और उनकी पत्नी मर्लिन शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के सभी ग्रेजुएट्स के अंतिम वर्ष का एजुकेशन लोन कवर करेंगे, वहां मौजूद 176 छात्र और उनके परिवार भावुक हो गए. अनिल कोचर ने स्पष्ट किया कि यह उपहार उनके पिता स्वर्गीय प्रकाश चंद कोचर के सम्मान में है.
पंजाब से अमेरिका आए थे प्रकाश चंद कोचर
अनिल कोचर के पिता प्रकाश चंद कोचर की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है. उनका जन्म पंजाब (भारत) में हुआ था. साल 1946 में वह विल्सन कॉलेज ऑफ टेक्सटाइल्स में दाखिला लेने वाले दूसरे भारतीय छात्र बने थे. तब उनके पास केवल उम्मीद और कुछ कर गुजरने का जज्बा था. उन्होंने 1950 में ग्रेजुएशन और 1952 में मास्टर्स की डिग्री ली. उन्होंने न केवल टेक्सटाइल इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई, बल्कि अपनी पत्नी क्रिस्टीन हेयस (जिनसे वह इसी कॉलेज में मिले थे) के साथ मिलकर अमेरिका को अपना घर बनाया.
विरासत को आगे बढ़ाती पीढ़ी
प्रकाश चंद कोचर के निधन के बाद उनकी पत्नी क्रिस्टीन ने ‘प्रकाश चंद कोचर मेमोरियल टेक्सटाइल स्कॉलरशिप’ की शुरुआत की थी. अब उनके बेटे अनिल और बहू मर्लिन ने इस विरासत को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. उन्होंने यूनिवर्सिटी के लिए 3 बड़े उपहार शुरू किए हैं:
- डीन चेयर एंडोमेंट: कॉलेज के संसाधनों और विकास के लिए.
- फैकल्टी फंड: शिक्षकों के शोध, यात्रा और प्रोफेशनल डेवलपमेंट के लिए.
- ग्रेजुएट सपोर्ट एंडोमेंट: टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स को रिसर्च और कॉन्फ्रेंस के लिए आर्थिक मदद.
‘कर्ज नहीं, अब सिर्फ करियर पर फोकस करें’
अनिल कोचर ने स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए कहा- मेरे पिता कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि उनका बेटा उसी संस्थान में भाषण देगा जिसने कभी उनका स्वागत किया था. उन्होंने यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स से कहा कि वे अब बिना पैसों की चिंता किए रिस्क ले सकते हैं और उस जीवन का निर्माण कर सकते हैं जिसके लिए उन्होंने इतनी कड़ी मेहनत की है. कॉलेज प्रशासन फिलहाल इस दान की कुल कीमत कैलकुलेट कर रहा है, लेकिन इसका प्रभाव अनमोल है.
भारतीय समुदाय विदेश में न केवल तरक्की कर रहा है, बल्कि ‘पे-बैक’ (समाज को वापस देने) की संस्कृति को भी मजबूती से निभा रहा है.
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Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें





