सांप ने आदमी को ऐसी जगह काटा, अस्पताल का बिल आया 11 करोड़ रुपए, भोंके गए 54 इंजेक्शन


कैलिफोर्निया : एक शख्स अपने घर के बैकयार्ड में घूम रहा था, जहां उसे अचानक ऐसा लगा कि पैरों में कांटे चुभ गए हैं, पलट कर देखा तो एक सांप फन फैलाए बैठा था. ये कोई ऐसा-वैसा सांप नहीं बल्कि रैटलस्नेक था, जिसने इस शख्स के पैर की ऐसी खतरनाक जगह पर काटा कि जहर सीधे नस के रास्ते खून में मिल गया. कुछ सेकेंड्स में ही उसका शरीर फूलने लगा और अंदर जो चल रहा था, उसे देखकर डॉक्टर भी कांप गए. इस शख्स को बचाने के लिए 54 इंजेक्शन भोंके गए. जब इलाज पूरा हुआ और अस्पताल ने हाथ में पर्चा थमाया, परिवार के होश उड़ गए, पूरा बिल आया 11 करोड़ रुपए.

घर में ही रैटलस्नेक ने बनाया शिकार

ये घटना हुई इडाहो के रहने वाले क्रिस होवर्थ के साथ हुई है. क्रिस उत्तरी कैलिफोर्निया के ओरोविले में अपने माता-पिता के घर घूमने आए हुए थे. मई के महीने की एक बेहद सामान्य सी दोपहर को वो घर के पिछले हिस्से यानी बैकयार्ड में पानी की पाइपलाइन चेक करने के लिए गए. चलते-चलते अचानक उन्हें अपने पैर में कुछ चुभने का अहसास हुआ. पहले तो क्रिस को लगा कि शायद पैर किसी कंटीली झाड़ी या पौधे से छू गया है लेकिन जैसे ही उन्होंने नीचे अपनी नजरें दौड़ाईं, उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई. सामने एक खतरनाक रैटलस्नेक फन फैलाए बैठा था और क्रिस समझ गए कि उन्हें सांप ने अपना शिकार बना लिया है.

नस में सीधे घुसा सांप का जहर, जमने लगा शरीर का खून!

डॉक्टरों के मुताबिक, इस घटना में सबसे बदकिस्मती वाली बात ये रही कि रैटलस्नेक ने क्रिस को एक नहीं बल्कि दो बार काटा और उससे भी ज्यादा भयावह बात ये थी कि सांप का एक दांत सीधे क्रिस के पैर की नस के अंदर घुस गया था. सीधे नस में जहर जाने का मतलब था कि जहर बिना किसी रुकावट के सीधे उनके खून के बहाव में मिल गया और पलक झपकते ही पूरे शरीर में फैल गया.

कुछ ही मिनटों के अंदर क्रिस की हालत बेहद नाजुक होने लगी. उनके शरीर में भयानक सूजन आ गई, उनकी जीभ पूरी तरह सुन्न पड़ गई और उन्हें सांस लेने में बेहद तकलीफ होने लगी. जब उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों को पता चला कि क्रिस को ‘डिसैमिनेटेड इंट्रावास्कुलर कोगुलेशन’ (DIC) नाम की एक बेहद खतरनाक और दुर्लभ बीमारी हो गई है.

इस बीमारी में सांप के जहर के कारण शरीर का पूरा ब्लड-क्लॉटिंग सिस्टम पूरी तरह तबाह हो जाता है. इसकी वजह से शरीर के अंदरूनी हिस्सों में बेतहाशा खून बहने लगता है और खून के थक्के भी बनने लगते हैं, जो किसी भी इंसान को पल भर में मौत की नींद सुला सकता है.

अस्पताल में खत्म हो गई दवा, दूसरे शहर से मंगाना पड़ा एंटीवेनम

क्रिस के शरीर में जहर इस कदर बढ़ रहा था कि डॉक्टरों के हाथ-पांव फूल गए. ओरोविले अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके शरीर में जहर के असर को बेअसर करने के लिए एक के बाद एक कुल 36 एंटीवेनम के वाइल्स चढ़ा दिए लेकिन इतने इंजेक्शन देने के बाद भी क्रिस के शरीर का जहर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था और अस्पताल का पूरा का पूरा एंटीवेनम स्टॉक ही खत्म हो गया!

मरीज की हालत लगातार बिगड़ती देख डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए उन्हें तुरंत स्टैनफोर्ड हॉस्पिटल रेफर कर दिया. स्टैनफोर्ड के डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्रिस को 18 और एंटीवेनम के इंजेक्शन दिए, जिसके बाद कुल मिलाकर इस शख्स को 54 बार इंजेक्शन भोंके गए.

मेडिकल एक्पर्ट का कहना है कि रैटलस्नेक के काटने पर आम तौर पर मरीजों को बहुत कम एंटीवेनम की जरूरत पड़ती है. किसी इंसान को 54 एंटीवेनम के वाइल्स देना नॉर्मल बात नहीं है. कैलिफोर्निया पॉइजन कंट्रोल सिस्टम के मेडिकल डायरेक्टर डॉ रायस वोहरा ने बताया कि ये वास्तव में एक बेहद बदकिस्मत और गंभीर मामला था, क्योंकि कई बार जहर इतना खूंखार होता है कि एंटीवेनम भी पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है.

अस्पताल का बिल आया 11 करोड़ रुपए, फूंक दिए करोड़ों

इस पूरे इलाज के बाद जो बिल सामने आया, उसे सुनकर अच्छे-अच्छों के पैरों तले जमीन खिसक सकती है. दोनों अस्पतालों का मिलाकर कुल बिल करीब 13 लाख डॉलर यानी भारतीय रुपयों में लगभग 11 करोड़ रुपये आया है.

अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, एंटीवेनम के सिर्फ एक वाइल की कीमत करीब 13,000 डॉलर यानी करीब 11 लाख रुपये थी. क्रिस के शरीर में एक-एक करके 54 इंजेक्शन भोंके गए, जिसका मतलब है कि सिर्फ दवा का खर्च ही लगभग 7 लाख डॉलर यानी करीब 6 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया था!

स्टैनफोर्ड हॉस्पिटल के आईसीयू में सिर्फ एक रात रुकने का कमरा चार्ज ही 61,000 डॉलर यानी लगभग 51 लाख रुपये था.

इसके अलावा क्रिस को एयरलिफ्ट करके दूसरे अस्पताल ले जाने, सीटी स्कैन, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा चढ़ाने का भी मोटा खर्च इस बिल में जुड़ा हुआ है.

राहत की बात ये है कि क्रिस के पास हेल्थ इंश्योरेंस है, जिससे इस बिल का एक बड़ा हिस्सा कवर होने की उम्मीद है. हालांकि, इंश्योरेंस के बाद भी उनके परिवार को अपनी जेब से कितनी बड़ी रकम चुकानी होगी, यह अभी तक पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है.



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