भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी को लंदन हाईकोर्ट से बड़ा झटका, भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका खारिज


उस मामले में भंडारी ने तर्क दिया था कि अगर उन्हें भारत प्रत्यर्पित किया जाता है तो उन्हें यातना का सामना करना पड़ सकता है, और अदालत ने मानवीय आधार पर उनके प्रत्यर्पण को अस्वीकार कर दिया था।

इसी मिसाल का हवाला देते हुए नीरव मोदी ने तर्क दिया कि अगर उन्हें भारत वापस भेजा गया तो उन्हें भी यातना का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, सीबीआई के अधिकारियों ने कार्यवाही के दौरान इस दावे का खंडन करते हुए तर्क प्रस्तुत किए।

ब्रिटेन के हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए पाया कि नीरव मोदी द्वारा दायर याचिका मामले को दोबारा खोलने के लिए आवश्यक असाधारण परिस्थितियों की कसौटी पर खरी नहीं उतरती। न्यायालय ने कहा कि प्रस्तुत आधार पर्याप्त नहीं थे और इसलिए पूर्व के फैसले पर पुनर्विचार करना उचित नहीं होगा।

नीरव मोदी भारत में पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में वांछित है, जिसमें कथित तौर पर राज्य द्वारा संचालित ऋणदाता के नाम पर जारी की गई फर्जी गारंटी का उपयोग करके विदेशी ऋण प्राप्त करने का आरोप है।

सीबीआई द्वारा घोटाले की जांच शुरू करने से कुछ ही समय पहले वह जनवरी 2018 में भारत छोड़कर चले गए थे।

2019 में यूनाइटेड किंगडम में उनकी गिरफ्तारी के बाद ब्रिटिश अदालतों ने भारत में उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी। अदालतों ने मामले पर विचार करते हुए भारत में उनके साथ होने वाले व्यवहार के संबंध में दिए गए आश्वासनों को स्वीकार किया और उनके प्रत्यर्पण में कोई कानूनी बाधा नहीं पाई, जिसके परिणामस्वरूप उनकी पिछली अपीलें खारिज कर दी गईं।



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

spot_imgspot_img