देश में चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया है. असम, केरल, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में एक और पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा. असम, केरल और पुडुचेरी में एक चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा. तमिलनाडु में भी एक चरण में ही 23 अप्रैल को मतदान होगा लेकिन पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होंगे. इस बार के चुनाव में हिंदू वोटर्स के साथ-साथ मुस्लिम वोटर्स भी काफी निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं. खासकर पश्चिम बंगाल और असम में मुस्लिम वोटरों की भूमिका को लेकर राजनीति तेज हो सकती है. खासकर बुर्का में वोट डालने वाली मुस्लिम महिलाओं को लेकर आने वाले दिनों में राजनीति गर्मा सकती है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है ‘बुर्का पॉलिटिक्स’ का मामला असम और बंगाल में वैसे ही गूंजेगा जैसे हरियाणा, दिल्ली और बिहार में गूंजा था? चुनाव आयोग का गाइडलाइन वही रहेगा जो बीते बिहार चुनाव में था?
देश में जब भी चुनाव होते हैं उस समय बुर्का और घूंघट वाली महिलाओं की पहचान का मुद्दा अक्सर चर्चा में रहता है. साल 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव और अन्य चुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग ने इस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं. भारत के चुनावी नियमों के अनुसार, हर मतदाता की पहचान सुनिश्चित करना अनिवार्य है ताकि ‘बोगस वोटिंग’ को रोका जा सके. ऐसे में 2026 में के चुनावों में भी चुनाव आयोग वही प्रक्रिया अपनाएगी, जो बीते बिहार चुनाव में अपनाई थी.
महिला अधिकारियों की तैनाती: आयोग ने स्पष्ट किया है कि बुर्का या घूंघट वाली महिलाओं की पहचान केवल महिला मतदान अधिकारियों या तैनात महिला आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा ही की जाएगी.
गोपनीयता का सम्मान: पहचान की प्रक्रिया के दौरान महिला की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाएगा. यदि आवश्यक हो, तो मतदान केंद्र के भीतर एक सुरक्षित या ओझल क्षेत्र बनाया जाता है जहां महिला अपना पर्दा हटाकर पहचान पत्र से अपना चेहरा मिलान करा सके.
सम्मानजनक व्यवहार: दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह गरिमापूर्ण होनी चाहिए और किसी भी मतदाता को अपमानित महसूस नहीं कराया जाना चाहिए.
असम, बंगाल, केरल और तमिलनाडु में मुस्लिम आबादी कितनी?
पश्चिम बंगाल: यहां मुस्लिम आबादी लगभग 27% से 30% के बीच है. राज्य की 294 सीटों में से लगभग 100-110 सीटों पर मुस्लिम वोटर्स का सीधा प्रभाव है. मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में यह आबादी 50% से भी अधिक है.
असम: यहां मुस्लिम आबादी लगभग 34% से 40% तक पहुंच चुकी है. राज्य की 126 सीटों में से लगभग 35 सीटों पर मुस्लिम वोटर्स किंगमेकर की भूमिका में हैं. हालांकि, हालिया परिसीमन के बाद भाजपा का दावा है कि 103 सीटों पर हिंदू यानी स्वदेशी प्रभाव बढ़ा है, जबकि 23 सीटों पर मुस्लिम बहुमत में हैं.
केरल: केरल में मुस्लिम आबादी करीब 26.5% है. यहां की 140 सीटों में से मालाप्पुरम और कासरगोड जैसे क्षेत्रों की लगभग 40-45 सीटों पर मुस्लिम वोटर्स का दबदबा है. यहां मुस्लिम लीग (IUML) एक बड़ी ताकत है.
तमिलनाडु और पुडुचेरी: तमिलनाडु में मुस्लिम आबादी लगभग 6% और पुडुचेरी में 6.1% है. यहां संख्या कम होने के बावजूद कई शहरी सीटों पर ये निर्णायक साबित होते हैं.
साल 2024 के लोकसभा चुनावों और उसके बाद के घटनाक्रमों में भाजपा जैसी पार्टियों ने चुनाव आयोग से मांग की थी कि बुर्का पहनने वाली महिलाओं की सघन जांच के लिए विशेष महिला कर्मचारी तैनात किए जाएं ताकि फर्जी मतदान न हो. बिहार चुनाव के दौरान करीब 90,000 पोलिंग बूथों पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से इसीलिए लगाया गया था ताकि वे मुस्लिम बहुल इलाकों में पहचान सुनिश्चित करने में मदद कर सकें. असम में बीजेपी और विपक्षी दलों के बीच मुस्लिम मतदाताओं की पहचान और ‘मिया मुस्लिम’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर काफी तीखी बहस हो रही है. असम में नागरिकता और घुसपैठ का मुद्दा हमेशा से हावी रहा है. ऐसे में बुर्का या धार्मिक पहचान के आधार पर वोटरों की जांच का मामला राजनीतिक रूप से यहां काफी गर्मा सकता है.





