नई दिल्ली35 मिनट पहले
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उत्तराखंड के जंगलों में अप्रैल के पहले हफ्ते से आग लग गई है। वास्तुशिल्प के लिए हेलिकॉप्टर का उपयोग किया जाता है।
उत्तराखंड में जंगल के आग मामले में बुधवार 8 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अप्रैल के पहले सप्ताह से लगी आग से अब तक 11 जिले प्रभावित हैं। गढ़वाल मंडल के मंडल रुद्रप्रयाग, शिमला, उत्तरकाशी, निवेशकों से सबसे अधिक प्रभावित हैं और मंडल का कुछ हिस्सा इसमें शामिल है। जबकि कुमाऊँ मंडल का अभ्यारण्य, चंपावत, अपोलो, बागेश्वर, अमृतसर सर्वाधिक प्रभावित हैं।
जंगल में आग लगने से 5 लोगों की मौत हो गई और चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पिछले साल नवंबर से अब तक जंगल में आग लगने की 998 घटनाएं हो गई हैं, जिनमें 1316 हेक्टेयर जंगल जल की भेंट चढ़ गए हैं।
वन विभाग, फायर ब्रिगेड, पुलिस के साथ-साथ सेना के जवान वापसी ऑपरेशन में लगे हुए हैं। आर्मी एरिया में एग्रीकल्चरल एयरफोर्स के एमआई-17 हेलिकॉप्टर की लीज में मदद की गई है। वहीं, रुद्रप्रयाग के जंगल में आग लगाने के आरोप में 3 लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है।

3 पेंट में स्वीकृत, आग की लंबाई के कारण
- विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तराखंड में 15 फरवरी से 15 जून यानी 4 महीने का फायर सीजन होता है। मतलब फरवरी के मध्य से जंगल में आग लगने की घटनाएं शुरू हो जाती हैं, जो अप्रैल में तेजी से बढ़ती हैं। इसी 15 जून को बारिश शुरू हो जाती है और धीरे-धीरे बारिश खत्म हो जाती है।
- कुछ स्थानों पर आग लगने का कारण समुद्र के मौसम में कम बारिश और उथल-पुथल होना है। समुद्र तटीय समुद्र तट से समुद्र तट पर आग लगने की घटनाओं में वृद्धि होती है। कम एलिज़ाबेथ की वजह से पेरूल के स्टाल्स में सबसे ज्यादा आग लग रही है। पहाड़ों से पत्थर गिरने के कारण से भी बढ़ती हैं आग की घटनाएं।
- कुछ जगहों पर इंसानों द्वारा भी की जाने वाली घटनाएं होती हैं। जंगल में हरी घास उगाने के लिए स्थानीय लोगों को भी आग की घटनाओं का एहसास होता है। इन पर वन विभाग नजर रखता है।

एयरफोर्स के एमआई-17 आश्रम के आश्रम भीमताल से पानी लेकर आग बबूला हो रहे हैं।
आग लगने पर क्या कार्रवाई हुई
- मुख्यमंत्री पुस्तर सिंह धामी ने काम में लगे कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
- आग लगने के मामले में 383 मामले दर्ज हैं। इसमें लोगों के खिलाफ 315 अज्ञात मामले दर्ज हैं, जबकि 59 मामले दर्ज हैं।
- बार-बार इस आग की घटनाओं में ज्वालामुखी पाए जाने पर अलौकिक एक्ट के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। फसल काटने के बाद पराली को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
- शहरी क्षेत्र में जंगलों के आसपास के जंगलों में आग लगाने पर भी पूर्ण रोक लगाई गई है।
- प्रदेशभर में आग की घटनाओं को रोकने के लिए 1438 फायर क्रूज स्टेशन बनाए गए हैं, जिसमें 4000 फायर ब्रिगेड की स्थापना की गई है।

तस्वीर 26 अप्रैल की है। अल्मोडा के जंगल में लगी आग बुझी जा रही है।
आग्नेयास्त्रों के लिए क्या किया जा रहा है
- प्रदेशभर में 3700 कर्मचारियों को आग लगाने के लिए नियुक्त किया गया है। 4 महीने के लिए फायर सीजन में वन फ्रेंड्स की विशेषता है।
- इसके अलावा पीआरडी मदद, बिजनेस, पीएससी, युवा और महिला मंगल आश्रमों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की भी ली जा रही है।
- आग सब्सट्रेट के लिए मुख्य रूप से झाप (हरे व्यापारियों की लकड़ी) आयरन और स्टील के (झांपा) का उपयोग किया जाता है।
आगरा आश्रम के आश्रम की 3 तस्वीरें…

लछमोली से आगे ददुआ गांव के जंगल में लगी आग को फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने भड़काया।

कालिका के पास जंगल में लगी आग को भड़काती रानीखेत फायर यूनिट टीम।

फैक्ट्री फैक्ट्री गनियादौली के पास जंगल में लगी आग पर फायर फाइटर्स ने भौतिक विज्ञानी पाया।
