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गर्मियों में पालतू कुत्तों की देखभाल विशेष ध्यान मांगती है. तेज धूप और बढ़ते तापमान में कुत्तों को सुस्ती, भूख कम लगना और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. सादा दही और पतली छाछ उनकी ताजगी और पोषण बनाए रखने में मदद करते हैं, लेकिन इसे सुरक्षित मात्रा और सही तरीके से देना जरूरी है.
गर्मियों का मौसम पालतू कुत्तों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है. तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण कुत्तों में सुस्ती, भूख कम लगना और अधिक प्यास जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. लंबे समय तक गर्मी में रहने से हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है, जो उनकी सेहत के लिए गंभीर हो सकता है. ऐसे समय में पालतू जानवरों के खान-पान और पानी की मात्रा पर खास ध्यान देना जरूरी है. डॉ. गौरव कोहली ने लोकल 18 को बताया कि हल्के और ठंडक देने वाले खाद्य पदार्थ कुत्तों को राहत दे सकते हैं, इसलिए गर्मियों में डॉग के आहार में सही बदलाव करना उनकी सेहत बनाए रखने के लिए अहम है.

दही और छाछ को प्राकृतिक कूलेंट माना जाता है, जो शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करते हैं. गर्मियों में जब कुत्तों का शरीर जल्दी गर्म हो जाता है, तब थोड़ी मात्रा में सादा दही या पतली छाछ उन्हें ठंडक पहुंचाती है. इससे कुत्तों को आराम और तरोताजा महसूस होता है, और थकान भी कम हो सकती है. खासकर दोपहर या शाम के समय ट्रीट के रूप में दिया गया दही-छाछ कुत्तों को राहत देता है. हालांकि इसे हमेशा कमरे के तापमान पर देना बेहतर होता है, क्योंकि बहुत ठंडी या फ्रिज से निकली चीजें देने से गले या पाचन से जुड़ी परेशानी हो सकती है, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है.

दही और छाछ में प्राकृतिक प्रोबायोटिक्स और लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो कुत्तों के पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होते हैं. ये अच्छे बैक्टीरिया पेट में संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं और गैस, अपच या कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिला सकते हैं. गर्मियों में जब कुत्तों की भूख कम हो जाती है, हल्का और आसानी से पचने वाला आहार उनकी सेहत बनाए रखने में मदद करता है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में दही देने से पेट की कार्यप्रणाली बेहतर हो सकती है. हालांकि, हर कुत्ते की पाचन क्षमता अलग होती है, इसलिए शुरुआत में कम मात्रा देकर उसकी प्रतिक्रिया जरूर देखनी चाहिए.
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छाछ में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो कुत्तों के शरीर में तरल पदार्थों की कमी को पूरा करने में मदद करती है. गर्मियों में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है, खासकर जब कुत्ते बाहर ज्यादा समय बिताते हैं. ऐसे में पतली और बिना नमक वाली छाछ उन्हें हाइड्रेटेड रखने में सहायक हो सकती है और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकती है. हालांकि, छाछ देने के साथ-साथ हमेशा साफ और ताजा पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए. कुत्तों को कभी भी सिर्फ छाछ के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि पानी उनकी सबसे जरूरी आवश्यकता है.

सादा दही कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन B12 जैसे कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है. ये तत्व कुत्तों की हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं, जबकि प्रोटीन मांसपेशियों के विकास और शरीर की ताकत बनाए रखने में सहायक होता है. गर्मियों में जब कुत्ते कम खाते हैं, तब पौष्टिक ट्रीट के रूप में थोड़ी मात्रा में दही देना फायदेमंद हो सकता है. हालांकि, इसे मुख्य भोजन का विकल्प नहीं बनाना चाहिए. संतुलित डॉग फूड के साथ दही को अतिरिक्त पोषण के रूप में देना बेहतर होता है, ताकि कुत्ते की संपूर्ण सेहत बनी रहे.

कई लोग आदत या जानकारी की कमी के कारण कुत्तों को दूध पिलाते हैं, लेकिन यह हमेशा सही नहीं होता. कई कुत्तों में लैक्टोज पचाने की क्षमता कम होती है, जिससे दूध पीने के बाद दस्त, गैस या पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसी कारण दूध की बजाय दही या छाछ देने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इनमें लैक्टोज कम और प्रोबायोटिक्स अधिक होते हैं. अगर किसी कुत्ते को दूध से परेशानी होती है तो उसका सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए. सही जानकारी और सावधानी से ही पालतू जानवरों की सेहत सुरक्षित रखी जा सकती है.

कुत्तों को दही या छाछ देते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. हमेशा सादा, बिना नमक और बिना चीनी वाला दही ही दें, क्योंकि फ्लेवर्ड या मीठा दही कुत्तों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. शुरुआत में एक-दो चम्मच मात्रा से शुरू करना बेहतर होता है, ताकि यह देखा जा सके कि कुत्ता इसे आसानी से पचा पा रहा है या नहीं. बड़े कुत्तों को थोड़ी ज्यादा मात्रा दी जा सकती है, लेकिन रोजाना अधिक मात्रा देना सही नहीं माना जाता. दही-छाछ को मुख्य भोजन की जगह सिर्फ ट्रीट या सप्लीमेंट के रूप में ही देना चाहिए.

अगर दही या छाछ देने के बाद कुत्ते को उल्टी, दस्त या खुजली जैसी समस्या दिखे तो तुरंत इसका सेवन बंद कर देना चाहिए. कुछ कुत्तों को डेयरी उत्पादों से एलर्जी हो सकती है, जिससे उनकी सेहत प्रभावित हो सकती है. ऐसे मामलों में पशु चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी होता है. हर कुत्ते की सेहत और जरूरत अलग होती है, इसलिए आहार में बदलाव सोच-समझकर करना चाहिए. सही देखभाल और संतुलित भोजन से ही कुत्ते को गर्मियों में स्वस्थ और सक्रिय रखा जा सकता है.





