आईएमएफ की चेतावनी, 2027 तक जारी रह सकती हैं तेल की ऊंची कीमतें
अगर खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जल्द खत्म भी हो जाता है, तो ऊर्जा की ऊंची कीमतें 2027 तक बनी रह सकती हैं। यह चेतावनी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की ओर से बुधवार को दी गई।
आईएमएफ ने कहा कि तेल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल बनी हुई है, जबकि रिफाइनिंग क्षमता और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर दबाव महंगाई बढ़ा रहा है और वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर असर डाल रहा है।
आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि अब तक अधिक दक्षता, ईंधन के विविध स्रोतों, आपातकालीन योजनाओं, रणनीतिक भंडार से आपूर्ति जारी करने और मांग-आपूर्ति में बदलाव के कारण ऊर्जा संकट का असर सीमित रहा है। हालांकि, महत्वपूर्ण जोखिम अभी भी बने हुए हैं।
थाईलैंड में अगले सप्ताह होने वाली आईएमएफ-विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों से पहले सिंगापुर में जॉर्जीवा ने कहा, “खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति बहाल होने की अनिश्चितता के बीच तेल की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल बनी हुई हैं। इसमें जोखिम, परिवहन की ऊंची लागत और अन्य कारक भूमिका निभा रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि दबाव सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं है। वैश्विक स्तर पर रिफाइनिंग क्षमता की संरचनात्मक कमी के कारण क्रैक स्प्रेड यानी कच्चे तेल की कीमत और उससे बनने वाले रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्य के बीच का अंतर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि इसका परिणाम डीजल और अन्य रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की रिकॉर्ड खुदरा कीमतों के रूप में सामने आया है।
खाड़ी क्षेत्र से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित है, क्योंकि जब तक होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही पर खतरा बना हुआ है, तब तक एलएनजी (एलएनजी) के परिवहन के विकल्प सीमित रहेंगे।
जॉर्जीवा ने कहा, “इसका दुनिया के अलग-अलग हिस्सों पर अलग-अलग असर पड़ रहा है, जिसमें एशिया और यूरोप विशेष रूप से प्रभावित हैं।”
यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही महंगाई के दबाव और कमजोर आर्थिक वृद्धि का सामना कर रही है।
जॉर्जीवा के मुताबिक, ऊर्जा की ऊंची लागत का असर उर्वरकों, खाद्य पदार्थों और प्रमुख औद्योगिक कच्चे माल की कीमतों पर पड़ता है। वहीं, अल नीनो खाद्य सुरक्षा पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। इस स्थिति से महंगाई बढ़ने के साथ आर्थिक वृद्धि पर भी दबाव पड़ता है।




