AI Agent कर सकता है पूरी खरीदारी, फिर भी लोग क्यों नहीं कर रहे भरोसा? सर्वे में सामने आई बड़ी वजह


आजकल AI सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रहा. अब पर्सनल AI एजेंट आ गए हैं जो आपके लिए पूरी खरीदारी कर सकते हैं. रिसर्च से लेकर प्राइस कंपेयर करने और आखिर में पेमेंट तक का काम ये एजेंट संभाल सकते हैं. मेटा का म्यूज (Muse) जैसे एजेंट इसी क्षमता का दावा कर रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि लोग इन्हें कितना भरोसा देते हैं?

एक नए सर्वे से पता चला है कि ज्यादातर लोग अभी पूरी तरह तैयार नहीं हैं. ACI Worldwide के लिए YouGov ने अमेरिका और ब्रिटेन के 3,000 से ज्यादा वयस्कों से फैशन और स्पोर्ट्सवियर की खरीदारी को लेकर राय मांगी. नतीजे चौंकाने वाले थे. 53 प्रतिशत लोगों ने साफ कहा कि वे किसी भी हालत में AI असिस्टेंट को अपनी तरफ से खरीदारी नहीं करने देंगे. सिर्फ 7 प्रतिशत लोग ऐसे थे जो बिना अपनी मंजूरी के भी एजेंट को खरीदारी की इजाजत दे सकते हैं.

अभी पूरा भरोसा नहीं 
एक्सेंचर के एक बड़े सर्वे में 25,000 से ज्यादा उपभोक्ताओं की राय ली गई. इसमें 74 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे पर्सनल AI एजेंट पर अपने सबसे अच्छे दोस्त से भी ज्यादा भरोसा कर सकते हैं कि वह उनकी तरफ से सही चीज खरीदेगा. लेकिन पूरी तरह ऑटोनॉमस शॉपिंग (यानी बिना पूछे पूरा काम करने) के लिए सिर्फ 9 प्रतिशत लोग तैयार थे. करीब एक-तिहाई लोगों ने कहा कि AI तय कर सकता है क्या खरीदना है, लेकिन पेमेंट वे खुद करेंगे.

साफ है कि लोग AI से रिसर्च और तुलना करवाने को तैयार हैं, लेकिन आखिरी कदम- यानी पैसा खर्च करने का फैसला- अभी खुद के हाथ में रखना चाहते हैं.

ACI Worldwide के डैन कोट्स कहते हैं, ‘अभी यह भरोसे का मुद्दा है. लोग डिस्कवरी और डिसीजन मेकिंग में AI की मदद लेने के आदी हो गए हैं, लेकिन ट्रिगर खुद खींचना चाहते हैं.”

विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी एजेंट्स के जरिए खरीदारी का सिस्टम जंगली पश्चिम जैसा है. मास्टरकार्ड का एजेंट पे और वीजा का इंटेलिजेंट कॉमर्स जैसे फ्रेमवर्क इस समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं. ये नियम बनाएंगे कि एजेंट, उपभोक्ता, व्यापारी और बैंक कैसे काम करेंगे, ताकि पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़े.

भरोसा बनाने में समय लगेगा. कुछ शुरुआती अनुभव अच्छे नहीं रहे. एक यूट्यूबर ने बताया कि म्यूज ने उनकी जानकारी के बिना फेसबुक मार्केटप्लेस पर उनका पता दे दिया और पिकअप तय कर दिया.

मेटा का कहना है कि म्यूज हमेशा मंजूरी मांगता है. ACI के फिल ब्रूनो कहते हैं कि कुछ नकारात्मक कहानियां भरोसे को जल्दी तोड़ सकती हैं. भरोसा धीरे-धीरे बनेगा. पहले टेक्नोलॉजी आजमाने वाले लोग शुरू करेंगे, फिर आम लोग. शुरुआत उन साइट्स से होगी जहां लोग पहले से वन-क्लिक ऑर्डरिंग के आदी हैं, जैसे अमेजन.

ब्रूनो कहते हैं कि सही सवाल यह नहीं है कि AI एजेंट तैयार हैं या नहीं. सवाल यह है कि वे कितने बेहतर हैं. क्या वे इतने बेहतर हैं कि लोग सचमुच चाहते हैं कि एजेंट उनके लिए खरीदारी करे?

अभी AI एजेंट्स क्षमता के मामले में आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का पूरा भरोसा जीतना बाकी है. जब तक सुरक्षा, पारदर्शिता और नियंत्रण के मुद्दे हल नहीं होते, ज्यादातर लोग आखिरी फैसला अपने हाथ में ही रखना पसंद करेंगे.



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Nemish Agrawal
Nemish Agrawalhttps://tv1indianews.in
Tv Journalist • Editor • Writer Digital Creator • Photographer Travel Vlogger • Web-App Developer IT Cell • Social Worker

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