बर्फीले लद्दाख में अब दिखेंगे 25 लाख फूल, 10,600 फीट पर बना फ्लावर गार्डन, एंट्री टिकट सिर्फ 25 रुपये


Ladakh Flower Garden: लद्दाख का नाम सुनते ही आमतौर पर बर्फीले पहाड़, सूनी घाटियां और ऊंची सड़कों का ख्याल आता है, लेकिन अब इसी ठंडी और ऊंचाई वाली जमीन पर फूलों के रंग भी नजर आएंगे. लेह के चोगलामसर और स्टकना इलाके में तैयार किए गए दो बड़े फ्लावर फील्ड्स पर्यटकों के लिए खोल दिए गए हैं. करीब 40 एकड़ में फैले इन फूलों के खेतों में 25 लाख से ज्यादा फूल लगाए गए हैं. खास बात यह है कि यह जगह समुद्र तल से करीब 10,600 फीट की ऊंचाई पर है.

ऐसे में यहां फूलों की खेती और उन्हें पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करना अपने आप में खास पहल है. कम बजट में लद्दाख घूमने वालों के लिए भी यह नया आकर्षण बन सकता है.

10,600 फीट पर फूलों की रंगीन दुनिया

चोगलामसर और स्टकना में तैयार किए गए इन ट्विन फ्लावर फील्ड्स में 24 लाख से ज्यादा लिलियम और करीब एक लाख ग्लैडियोलस के फूल शामिल हैं. प्रशासन के अनुसार यहां अलग-अलग रंगों के फूल लद्दाख की भूरी पहाड़ियों के बीच बेहद अलग नजारा पेश कर रहे हैं. इन फ्लावर फील्ड्स का उद्घाटन 18 सितंबर को लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने किया. प्रशासन ने इसे दुनिया के सबसे ऊंचाई पर स्थित ट्विन फ्लावर फील्ड्स बताया है. हालांकि यह दावा प्रशासन की ओर से किया गया है.

टिकट सिर्फ 25 रुपये

इस जगह की एक और खास बात इसकी कम एंट्री फीस है. पर्यटकों के लिए टिकट 25 रुपये रखा गया है, जबकि बच्चों को 10 रुपये में प्रवेश मिलेगा. टिकट से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल फ्लावर फील्ड्स के रखरखाव और देखभाल में किया जाएगा. यानी परिवार के साथ लद्दाख घूमने वाले पर्यटक कम खर्च में इस नए आकर्षण को अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं. फूलों के मौसम में यहां अलग-अलग रंगों का नजारा फोटोग्राफी पसंद करने वालों को भी आकर्षित कर सकता है.

बंजर जमीन पर फूल उगाने की पहल

चोगलामसर में फूलों की खेती के लिए पौधारोपण का काम 16 जुलाई से शुरू किया गया था. करीब दो महीने बाद सितंबर के पहले सप्ताह में यहां फूल खिलने लगे. दूसरी ओर स्टकना में अगस्त से अब तक करीब 14 लाख लिलियम के पौधे लगाए जा चुके हैं. यहां फूल अक्टूबर के अंत तक खिलने की उम्मीद है. पीले, सफेद, नारंगी और लाल रंगों के फूल जब पहाड़ी इलाके में दिखाई देते हैं तो पूरा क्षेत्र सामान्य लद्दाखी परिदृश्य से बिल्कुल अलग नजर आता है. इसी वजह से इन जगहों को पर्यटन के साथ फूलों की खेती के लिए भी विकसित किया जा रहा है.

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पर्यटन के साथ किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

यह परियोजना केवल घूमने-फिरने की जगह बनाने तक सीमित नहीं है. कृषि विभाग का उद्देश्य व्यावसायिक फूलों की खेती को बढ़ावा देना, किसानों की आय के नए रास्ते तैयार करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना भी है. चोगलामसर फ्लावर फील्ड को लिलियम, ग्लैडियोलस, ट्यूलिप और दूसरे सजावटी फूलों की खेती के प्रशिक्षण और प्रदर्शन केंद्र के तौर पर भी विकसित किया जाएगा. किसानों और युवाओं को फूलों की खेती, आधुनिक उत्पादन तकनीक और फसल कटाई के बाद फूलों के प्रबंधन से जुड़ी जानकारी दी जाएगी.

लिलियम की खेती पर खास ध्यान

प्रशासन के मुताबिक थोक बाजार में लिलियम के एक डंठल की कीमत करीब 60 से 70 रुपये तक मिल सकती है. इसी वजह से लद्दाख में इसकी व्यावसायिक खेती की संभावनाओं पर ध्यान दिया जा रहा है.

पहले साल परियोजना का संचालन कृषि विभाग करेगा. फूल खिलने के बाद इसे चुने गए सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स और सहकारी समितियों को सौंपने की योजना है. इन समूहों को फूलों की बिक्री और मार्केटिंग में भी मदद दी जाएगी. आगे चलकर खेती, कटाई और मूल्यवर्धन का काम समितियां खुद संभाल सकती हैं.



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