टेक्नोलॉजी की दुनिया में आज जो कंपनी सबसे आगे है, जरूरी नहीं कि वह हमेशा नंबर-1 रहे क्योंकि मार्केट बदलते ही कस्टमर्स की पसंद और जरूरतें भी बदल जाती हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण कभी मोबाइल की दुनिया में राज करने वाली ब्लैकबेरी (BlackBerry) और नोकिया (Nokia) हैं. वहीं, IBM ने भी पर्सनल कंप्यूटर से अपनी पहचान बनाई थी. समय बदला तो इन कंपनियों के पुराने कारोबार कमजोर पड़ गए. लेकिन इन्होंने पूरी तरह हार मानने के बजाय अपना बिजनेस मॉडल ही बदल दिया. आज BlackBerry सॉफ्टवेयर, Nokia टेलीकॉम नेटवर्क और AI से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर, जबकि IBM क्लाउड, AI और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी पर फोकस कर रही है.
BlackBerry ने फोन छोड़कर सॉफ्टवेयर पकड़ा
एक समय ब्लैकबेरी का फोन बिजनेस की दुनिया में स्टेटस सिंबल माना जाता था. इसके फिजिकल कीबोर्ड और सुरक्षित मैसेजिंग सिस्टम काफी फेमस थे. लेकिन iPhone और Android स्मार्टफोन आने के बाद कंपनी तेजी से पिछड़ गई. आखिरकार 2016 में BlackBerry ने खुद फोन बनाना बंद कर दिया. इसके बाद कंपनी ने अपनी दिशा बदलते हुए QNX सॉफ्टवेयर और सिक्योर कम्युनिकेशन पर ध्यान देना शुरू किया. QNX का इस्तेमाल कारों और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में किया जाता है. कंपनी अब सरकारों और बड़ी कंपनियों के लिए सुरक्षित सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध कराती है.
IBM ने PC छोड़कर AI और क्लाउड चुना
IBM की पहचान भी कभी कंप्यूटर हार्डवेयर से जुड़ी थी. कंपनी ने पर्सनल कंप्यूटर को फेमस बनाने में बड़ा रोल निभाया. लेकिन समय के साथ PC कारोबार में कॉम्टिशन बढ़ा और मुनाफा कम होने लगा. IBM ने करीब दो दशक पहले PC बिजनेस से बाहर निकलने का फैसला किया.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अब कंपनी का मुख्य फोकस एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर, हाइब्रिड क्लाउड, AI और हाई-एंड कंप्यूटिंग पर है. यानी कंपनी ने आम लोगों के कंप्यूटर बेचने के बजाय बड़ी कंपनियों की टेक्नोलॉजी जरूरतों को अपना बाजार बना लिया.
Nokia ने मोबाइल से नेटवर्किंग तक का सफर तय किया
नोकिया कभी दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फोन कंपनी थी. 2000 के दशक में इसके फोन हर जगह दिखाई देते थे. लेकिन स्मार्टफोन के दौर में कंपनी Apple और Android से मुकाबला नहीं कर पाई. 2014 में Nokia ने अपना ज्यादातर मोबाइल फोन कारोबार Microsoft को बेच दिया. इसके बाद कंपनी ने टेलीकॉम और नेटवर्किंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित किया. अब Nokia मोबाइल फोन बेचने के बजाय उन नेटवर्क सिस्टम और उपकरणों पर काम करती है, जिनसे टेलीकॉम कंपनियां अपनी सर्विसेस चलाती हैं.
कंपनी अब AI डेटा सेंटर के बढ़ते कारोबार को भी बड़ा मौका मान रही है. AI के लिए बड़ी संख्या में सर्वर और डेटा सेंटर की जरूरत है और इन्हें जोड़ने के लिए हाई-स्पीड नेटवर्क की जरूरत पड़ती है.
पुरानी ताकत को नए तरीके से इस्तेमाल किया
इन तीनों कंपनियों की कहानी में एक बात समान है. इन्होंने अपनी पुरानी पहचान को पूरी तरह खत्म करने के बजाय उन तकनीकों का इस्तेमाल किया, जो उनके पास पहले से मौजूद थीं. BlackBerry के पास सिक्योरिटी और सॉफ्टवेयर की विशेषज्ञता थी. Nokia के पास नेटवर्क और टेलीकॉम का अनुभव था. IBM के पास एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी और कंप्यूटिंग का लंबा अनुभव था. इन कंपनियों ने इन्हीं ताकतों को नए बाजार के हिसाब से इस्तेमाल किया.
इन कंपनियों की वापसी बताती है कि किसी बिजनेस के लिए सिर्फ पुराना सफल प्रोडक्ट काफी नहीं है. कस्टमर्स की पसंद बदलने पर कंपनी को भी बदलना पड़ता है. हालांकि, बिजनेस को नया रूप देना आसान नहीं होता और हर कंपनी ऐसा करके सफल हो जाए, यह जरूरी नहीं है. लेकिन BlackBerry, Nokia और IBM की कहानी दिखाती है कि सही समय पर बिजनेस मॉडल बदलना और अपनी असली ताकत पहचानना किसी पुरानी कंपनी को दोबारा मजबूत बना सकता है.




