वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता के बीच सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से बुधवार को घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। MCX पर सोने का अक्टूबर 2026 कॉन्ट्रैक्ट शुरुआती कारोबार में मामूली कमजोरी के साथ खुलने के बाद तेजी में आ गया। वहीं, चांदी भी बढ़त के साथ कारोबार करती हुई ₹2.40 लाख प्रति किलो के पार पहुंच गई।
सोने ने शुरुआती कमजोरी के बाद पकड़ी रफ्तार
MCX पर 5 अक्टूबर 2026 का सोना वायदा पिछली क्लोजिंग ₹1,52,579 प्रति 10 ग्राम के मुकाबले मामूली गिरावट के साथ ₹1,52,120 पर खुला। हालांकि, कारोबार शुरू होने के कुछ ही समय बाद इसमें तेजी लौट आई। सुबह 11:17 बजे सोना ₹547 यानी 0.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹1,53,126 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।
कारोबार के दौरान सोने ने अब तक ₹1,52,101 का निचला और ₹1,53,168 प्रति 10 ग्राम का ऊपरी स्तर छुआ। इन स्तरों से संकेत मिलता है कि उस समय घरेलू वायदा बाजार में सोने पर खरीदारी का दबाव बना हुआ था।
चांदी ₹2.40 लाख के पार, दिन का ऊपरी स्तर भी नया
सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखने को मिली। 4 दिसंबर 2026 का चांदी कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग ₹2,39,427 प्रति किलो के मुकाबले मामूली बढ़त के साथ ₹2,39,620 पर खुला। इसके बाद खरीदारी बढ़ी और खबर लिखे जाने तक चांदी ₹1,169 यानी 0.49 प्रतिशत की तेजी के साथ ₹2,40,596 प्रति किलो पर पहुंच गई।
कारोबार के दौरान चांदी ने ₹2,38,933 प्रति किलो का निचला स्तर और ₹2,40,620 प्रति किलो का ऊपरी स्तर छुआ। यानी चांदी ने दिन के कारोबार में ₹2.40 लाख का स्तर पार कर लिया था।
वैश्विक बाजार में मिला-जुला रुख, फेड पर भी नजर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालांकि तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। सोना 0.18 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,430 डॉलर प्रति औंस पर था, जबकि चांदी 0.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ 67 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।
बाजार जानकारों के मुताबिक वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और अनिश्चितता के कारण निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहा है, जिसका फायदा सोने और चांदी को मिल रहा है। हालांकि, अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों को लेकर निवेशक सतर्क हैं। इन आंकड़ों का असर आगे ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों पर पड़ सकता है।
जानकारों का कहना है कि अगले सप्ताह होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक तक सोने और चांदी में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में वैश्विक घटनाक्रम और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े आने वाले दिनों में कीमती धातुओं की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।




