Facebook-Instagram Limit : रात में नहीं चला सकेंगे फेसबुक और इंस्टाग्राम, बच्चों के अकाउंट पर मां-बाप का कंट्रोल


Last Updated:

Facebook-Instagram Limit : सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की वजह से बच्चों की मानसिक सेहत पर पड़ने वाले असर को लेकर अमेरिकी अदालत ने कंपनी पर मोटा हर्जाना ठोक दिया है. साथ ही कई शर्तें पर लगा दी हैं. अब मेटा को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों के लिए नियमों को और सख्त बनाने होंगे.

Zoom

सोशल मीडिया पर बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण बढ़ाए जाएंगे.

नई दिल्ली. कहते हैं कि समस्या जहां से पैदा होती है, उसका हल भी वहीं से निकलता है. सोशल मीडिया के चक्कर में परेशान पूरी दुनिया के लिए इसका हल भी वहीं से निकला जहां से इसकी शुरुआत हुई थी. हम बात कर रहे हैं अमेरिका में फेसबुक और इंस्टाग्राम के खिलाफ चल रहे मुकदमे और उसे खत्म करने के लिए रखी गई शर्तों की. फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा ने अपने ऊपर चल रहे मुकदमों को खत्म करने के लिए कई शर्तें मानने पर हामी भर दी है. खासकर 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर कड़े नियम बनाए गए हैं.

दरअसल, फेसबुक और इंस्टाग्राम की शुरुआत अमेरिका से ही हुई और अब वहां की अदालतों ने इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 17 अरब डॉलर का हर्जाना लगाया है. इस समझौते के तहत कंपनी ने नाबालिग यूजर्स के लिए अपने प्लेटफॉर्म्स पर कई अहम सुरक्षा बदलाव करने पर भी सहमति जताई है. कंपनी पर आरोप था कि उसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की वजह से बच्चों के दिमाग खराब हो रहे हैं. उनकी गोपनीयता पर भी असर पड़ रहा है.

क्या रखी है कंपनी पर शर्त
मेटा ने सबसे बड़ा बदलाव 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए Facebook और Instagram के इस्तेमाल को लेकर किया है. दोनों प्लेटफॉर्म को मिलाकर रोजाना 2 घंटे की डिफॉल्ट इस्तेमाल सीमा तय की जाएगी. इस लिमिट को बढ़ाने या हटाने के लिए माता-पिता की मंजूरी जरूरी होगी. इसका मतलब है कि अगर किशोर रोजाना 2 घंटे से ज्यादा समय तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो उन्हें मां-बाप की मंजूरी लेनी पड़ेगी.

रात में रहेगी इस्तेमाल पर रोक
मेटा और अमेरिकी कोर्ट के बीच हुए समझौते के तहत किशोर यूजर्स रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक Facebook और Instagram का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे. इसके अलावा सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक नोटिफिकेशन डिफॉल्ट रूप से म्यूट रहेंगे. हालांकि, डायरेक्ट मैसेज और सुरक्षा से जुड़े जरूरी अलर्ट इससे बाहर होंगे. लगातार सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले किशोरों को बीच-बीच में ब्रेक लेने के लिए रिमाइंडर भी दिए जाएंगे.

मां-बाप के हाथ में होगा पूरा कंट्रोल
Meta को नाबालिग यूजर्स की पहचान के लिए ज्यादा सख्त वेरिफिकेशन प्रोसेस अपनाने होंगे.माता-पिता के लिए कंट्रोल्स को आसान बनाने और बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट से बचाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी किए जाएंगे. कुछ ऐसे फीचर्स पर भी पाबंदियां लगाई जाएंगी जिनको लेकर बच्चों की मानसिक सेहत पर असर की चिंता जताई जाती रही है. इनमें सार्वजनिक लाइक काउंट और कुछ ब्यूटी फिल्टर जैसे फीचर्स शामिल हैं.

भारत और दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
अमेरिका में हुआ यह समझौता भारत में सीधे तौर पर लागू नहीं होगा, लेकिन बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर इसका असर दुनियाभर में पड़ सकता है और टेक कंपनियों पर अपने प्लेटफॉर्म को बच्चों के लिए ज्यादा सुरक्षित बनाने का दबाव बढ़ सकता है. भारत में भी बच्चों के डेटा और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े नियम मौजूद हैं. ऐसे में आने वाले समय में उम्र के सत्यापन और मां -बाप के कंट्रोल के साथ बच्चों के स्क्रीन टाइम पर और भी ज्यादा सख्ती देखने को मिल सकती है. ऐसा होता है तो यहां भी सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर नियम सख्त बनाए जा सकते हैं.

यूट्यूब और टिकटॉक पर भी शिकंजा
अदालत की ओर से फेसबुक और इंस्टाग्राम पर शिकंजा कसने के बाद YouTube और TikTok पर भी नजर टेढ़ी हो सकती है. Meta ने कहा है कि वह इस समझौते के चलते साल 2026 की तीसरी तिमाही में करीब 10 अरब डॉलर का कानूनी खर्च करेगी. Meta का तर्क है कि सिर्फ Facebook और Instagram पर प्रतिबंध लगाए गए तो बच्चे दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की तरफ जा सकते हैं. लिहाजा समझौते में YouTube और TikTok को भी जोड़ा गया है. इन प्लेटफॉर्म्स को भी बच्चों के लिए एक घंटे की रोजाना सीमा, रात में इस्तेमाल पर रोक और उम्र की जांच जैसे सुरक्षा उपाय लागू करने होंगे. साथ ही उन्हें Meta के बराबर तय रकम का भुगतान भी करना होगा. कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि समझौते का असर तभी प्रभावी होगा जब दूसरे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए इसी तरह के कदम उठाएंगे.

मेटा पर क्यों कसा शिकंजा
अमेरिका के कई राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने साल 2023 में Meta के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. आरोप लगाया गया था कि Facebook और Instagram को इस तरह डिजाइन किया गया कि बच्चे और किशोर इन प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा समय बिताएं. राज्यों का दावा था कि इससे बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. Meta पर माता-पिता और आम यूजर्स को इन संभावित खतरों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं देने का भी आरोप लगाया गया था.

About the Author

authorimg

Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

और पढ़ें



Source link

Nemish Agrawal
Nemish Agrawalhttps://tv1indianews.in
Tv Journalist • Editor • Writer Digital Creator • Photographer Travel Vlogger • Web-App Developer IT Cell • Social Worker

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img