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SpaceX Falcon 9 Moon Crash: स्पेसएक्स का एक विशाल फाल्कन 9 रॉकेट मून की सतह से टकराकर क्रैश हो गया है. 8690 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हुए इस खौफनाक इंपैक्ट ने मून पर एक बड़ा क्रेटर बना दिया है. साउथ कोरिया के मून ऑर्बिटर दानूरी ने इस भयानक टक्कर की तस्वीरें कैप्चर की हैं. यह रॉकेट जनवरी 2025 से स्पेस में भटक रहा था. अब वैज्ञानिकों को इस क्रैश से अहम डेटा मिलने की उम्मीद है.
दक्षिण कोरिया के डैनुरी लूनर ऑर्बिटर ने उस गड्ढे की यह तस्वीर ली है जो 5 अगस्त, 2026 को चंद्रमा से टकराने पर स्पेसएक्स फाल्कन 9 के ऊपरी हिस्से (अपर स्टेज) के कारण बना था. (इमेज क्रेडिट: KARI)
नई दिल्ली: स्पेसएक्स का भारी भरकम फाल्कन 9 रॉकेट बुधवार को चांद से टकराकर तबाह हो गया है. करीब 8690 किलोमीटर प्रति घंटे की भयानक रफ्तार से इस रॉकेट ने चांद की सतह पर जोरदार हिट किया है. इस भयंकर टक्कर से चांद के आइंस्टीन क्रेटर के पास एक नया गड्ढा बन गया है. साउथ कोरिया के चांद ऑर्बिटर दानूरी ने इस पूरी घटना को अपने कैमरे में कैद किया है. दानूरी ने क्रैश से ठीक पहले और तुरंत बाद की तस्वीरें भी भेजी हैं. ये तस्वीरें चांद की सतह पर हुए भारी नुकसान की गवाही दे रही हैं. यह रॉकेट जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था. ब्लू घोस्ट लूनर लैंडर को स्पेस में छोड़ने के बाद यह लगातार भटक रहा था. आखिरकार ग्रेविटी के कारण यह चांद से टकरा गया. वैज्ञानिकों को इस ऐतिहासिक क्रैश से चांद के बारे में बहुत अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है.
फाल्कन 9 रॉकेट चांद की सतह पर कैसे हुआ क्रैश?
स्पेसएक्स का फाल्कन 9 रॉकेट जनवरी 2025 में एक अहम मिशन पर भेजा गया था. इस मिशन का टारगेट दो प्राइवेट रोबोटिक चांद लैंडर को उनके ऑर्बिट तक पहुंचाना था. इनमें से एक लैंडर ब्लू घोस्ट था और दूसरा रेजिलिएंस था. ब्लू घोस्ट लैंडर तो मार्च 2025 में चांद पर सही सलामत उतर गया था. मगर रेजिलिएंस अपनी लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया था.
फाल्कन 9 का पहला स्टेज तो धरती पर वापस लौट आया था. लेकिन इसका दूसरा स्टेज अपना सारा फ्यूल खत्म करने के बाद स्पेस में ही फंस गया. 4000 किलोग्राम वजन का यह रॉकेट धरती के चक्कर लगा रहा था. समय के साथ सोलर एक्टिविटी और ग्रेविटी ने इसे चांद की तरफ खींच लिया. आखिरकार यह विशाल रॉकेट चांद से टकराकर पूरी तरह तबाह हो गया.
टकराव वाली जगह की पहले और बाद की तस्वीरें. (इमेज क्रेडिट: KARI)
दानूरी ऑर्बिटर ने क्रैश की तस्वीरें कैसे कैप्चर कीं?
साउथ कोरिया का चांद ऑर्बिटर दानूरी इस समय चांद के चक्कर लगा रहा है. कोरिया एयरोस्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अधिकारियों ने इस घटना की पूरी डिटेल शेयर की है. अधिकारियों ने एक्स पर कहा, ‘दानूरी ने टक्कर से करीब 30 मिनट पहले अपनी ऑब्जर्वेशन शुरू कर दी थी’.
ऑर्बिटर ने इंपैक्ट वाली जगह के ऊपर से कई बार उड़ान भरी. इस दौरान उसने पूरे इलाके के आठ अलग-अलग इमेजिंग सेशन पूरे किए. दानूरी ने क्रैश से पहले और बाद का पूरा फुटेज सुरक्षित कर लिया है. इन तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि रॉकेट गिरने से चांद की सतह कैसे बदल गई है. मलबे के निशान भी इन शानदार तस्वीरों में बहुत साफ नजर आ रहे हैं.
एक और ‘पहले और बाद’ की तस्वीर, जिसमें ‘पहले’ वाली फोटो 2015 में NASA के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने ली थी. (इमेज क्रेडिट: KARI)
इस खौफनाक रॉकेट क्रैश से वैज्ञानिकों को क्या मिलेगा?
इस रॉकेट क्रैश की घटना वैज्ञानिकों के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है. यह एक ऐसा इंपैक्ट है जिसके बारे में वैज्ञानिकों को पहले से बहुत कुछ पता था. उन्हें रॉकेट की स्पीड और वजन की पूरी जानकारी थी. वैज्ञानिकों ने पहले ही अनुमान लगाया था कि यह रॉकेट 8690 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से टकराएगा. इससे चांद पर करीब 27 मीटर चौड़ा एक बड़ा क्रेटर बनने का अनुमान था.
दानूरी का डेटा इन सभी भविष्यवाणियों को साबित करने में मदद करेगा. अधिकारियों के मुताबिक दानूरी के डेटा को नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर के साथ जोड़ा जाएगा. इस इंटरनेशनल रिसर्च से चांद की सतह और वहां के वातावरण को समझने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी. स्पेन के कुछ एस्ट्रोनॉमर्स ने भी इस टक्कर का वीडियो कैप्चर करने का दावा किया है. देखें वीडियो




