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बारिश का मौसम आते ही सुल्तानपुर की प्राकृतिक खूबसूरती अपने चरम पर पहुंच जाती है. हरियाली से लदे खेत, गोमती नदी का मनमोहक दृश्य, ऐतिहासिक धरोहरें और पेड़ों से घिरी सड़कें इस जिले को मानसून में घूमने के लिए खास बना देती हैं.
बारिश की फुहार पड़ते ही सुल्तानपुर का नज़ारा पूरी तरह बदल जाता है. खेत हरियाली से भर उठते हैं और गोमती नदी का प्रवाह भी अधिक मनमोहक दिखाई देता है. गांवों की कच्ची गलियां, पेड़ों से टपकती बूंदें, दूर तक फैली हरियाली, सुबह की ठंडी हवा और बादलों से ढका आसमान प्रकृति की खूबसूरती को और निखार देते हैं. यही मौसम सुल्तानपुर की प्राकृतिक सुंदरता को सबसे आकर्षक रूप में सामने लाता है.
बारिश के मौसम में सुल्तानपुर जिले के लंभुआ क्षेत्र स्थित दियरा राजमहल की खूबसूरती देखते ही बनती है. गोमती नदी के किनारे बना यह ऐतिहासिक महल भले ही अब उपयोग में नहीं है, लेकिन बरसात में इसकी भव्य इमारतें और चारों ओर फैली हरियाली ऐसा दृश्य प्रस्तुत करती हैं, मानो बादल इसकी छत पर उतर आए हों. प्रकृति और इतिहास का यह संगम बारिश के दिनों में इस किले को और भी आकर्षक बना देता है.
बारिश के मौसम में सुल्तानपुर के धान के खेत मनमोहक दिखाई देते हैं. किसान रोपाई में व्यस्त रहते हैं और दूर-दूर तक फैले हरे-भरे खेत आकर्षक नजारा पेश करते हैं. खेतों में भरा पानी, आसमान में छाए बादल और हवा के साथ लहराती धान की फसल प्राकृतिक सौंदर्य को और बढ़ा देती है. वहीं, गांवों के आसपास मौजूद आम, नीम और पीपल के पेड़ भी इस मौसम में और अधिक हरे-भरे नजर आते हैं.
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बारिश के मौसम में सुल्तानपुर के मंदिर और धार्मिक स्थल अलग ही खूबसूरती बिखेरते हैं. भीगे हुए प्राचीन भवन और मंदिरों की घंटियों की मधुर ध्वनि वातावरण को आध्यात्मिक बना देती है. डाकखाना चौराहे पर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर भी इस मौसम में और अधिक आकर्षक नजर आता है. मंदिर के ऊपर विराजमान भगवान श्रीराम की नीले रंग की प्रतिमा बारिश के बाद और अधिक चमकदार दिखाई देती है.
सुल्तानपुर की जीवनरेखा कही जाने वाली गोमती नदी बारिश के मौसम में अपने पूरे सौंदर्य के साथ बहती नजर आती है. जलस्तर बढ़ने से नदी का विस्तार और अधिक आकर्षक दिखाई देता है. किनारों पर फैली हरियाली, बहते पानी की कलकल ध्वनि और आसमान में छाए काले बादल मिलकर मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करते हैं. सुबह और शाम के समय नदी का किनारा फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए बेहद खूबसूरत लगता है. वहीं, नदी पर बने शहर के रेलवे पुल से गुजरती ट्रेन इस प्राकृतिक नजारे में चार चांद लगा देती है.
बारिश के मौसम में सुल्तानपुर की कई सड़कें पेड़ों की हरी-भरी सुरंग जैसी दिखाई देती हैं. दोनों ओर खड़े पेड़, भीगी सड़कें और हल्की बारिश मिलकर मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करते हैं. सुबह के समय धुंध और ठंडी हवाएं इस प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ा देती हैं. बाइक या कार से सफर के दौरान यह नजारा अलग ही अनुभव कराता है. वहीं, शहर की सड़कों के बीच बने डिवाइडरों पर लगे पेड़-पौधे भी बारिश के मौसम में शहर की खूबसूरती को और निखार देते हैं.
सुल्तानपुर जिले से गुजरने वाला लखनऊ-वाराणसी हाईवे बारिश और सावन के मौसम में बेहद खूबसूरत नजर आता है. शहर के किनारे से गुजरने वाले इस हाईवे के दोनों ओर फैली हरियाली और लहलहाते खेत इसकी सुंदरता को और बढ़ा देते हैं. यही वजह है कि यहां से गुजरने वाले कई यात्री पयागीपुर पुल पर रुककर इस मनमोहक नजारे का आनंद लेते हैं और अपने मोबाइल या कैमरे में इसे कैद करते हैं.
अगर आप प्राकृतिक सौंदर्य, ग्रामीण जीवन और शांत वातावरण को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो बारिश का मौसम सुल्तानपुर घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. हरियाली से लदे खेत, गोमती नदी, मंदिर, गांव और बारिश की ठंडी फुहारें मिलकर ऐसा मनमोहक अनुभव देती हैं, जिसे लंबे समय तक भुला पाना आसान नहीं होता.




